भारत सरकार का बड़ा फैसला...चीनी कंपनियों के लिए भारत में निवेश के रास्ते खुले!
News in Short
- चीन की 10% हिस्सेदारी वाली कंपनियों को भारत में निवेश की स्वचालित अनुमति दी गई।
- यह बदलाव विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत किया गया।
- भारत और चीन के सुधरते व्यापार रिश्तों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया।
- सरकार ने कुछ क्षेत्रों में एफडीआई प्रस्तावों के निपटारे की समयसीमा 60 दिन तय की।
- भारत में FDI में निरंतर वृद्धि हो रही है, 2025-26 तक यह 90 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
News in Detail
भारत सरकार ने चीन की हिस्सेदारी वाली कंपनियों के लिए निवेश आसान किया है। वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी की है। इसमें 10 प्रतिशत तक हिस्सेदारी वाली कंपनियों को स्वचालित मार्ग से निवेश की अनुमति दी गई है। यह निर्णय 1 मई 2026 से प्रभावी हो गया है।
फेमा के तहत निवेश पर दी गई छूट
यह बदलाव विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत किया गया है। पहले, चीन की कंपनियों को भारत में निवेश के लिए स्वीकृति प्राप्त करने में कठिनाइयां थीं। अब सरकार ने चीन के साथ सुधरते कारोबारी रिश्तों को देखते हुए यह कदम उठाया है। अब चीन या हांगकांग की 10% तक हिस्सेदारी वाली कंपनियां भारत में एफडीआई के स्वचालित मार्ग से निवेश कर सकेंगी। यह नियम तब लागू होगा जब कंपनियां ऐसे क्षेत्रों में निवेश करें जहां पहले से एफडीआई की अनुमति हो।
दूसरे देशों के लिए प्रतिबंध
यह छूट केवल उन कंपनियों के लिए लागू होगी जिनमें चीन या हांगकांग की हिस्सेदारी 10% तक है। हालांकि, भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले अन्य देशों में पंजीकृत कंपनियों पर यह नियम लागू नहीं होगा। इसका मतलब है कि अगर किसी कंपनी का मुख्यालय इन देशों में है, तो उन्हें यह निवेश छूट नहीं मिलेगी।
तेजी से निपटेंगे एफडीआई प्रस्ताव
सरकार ने यह निर्णय लिया है कि कुछ विशेष क्षेत्रों में एफडीआई प्रस्तावों का निपटारा 60 दिनों के भीतर किया जाएगा। इनमें पौलीसिलिकॉन, इलेक्ट्रॉनिक पूंजीगत उत्पाद और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे महत्वपूर्ण उद्योग शामिल हैं। इस फैसले से निवेश प्रक्रिया में तेजी आएगी और भारत में निवेश के अवसर बढ़ेंगे। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस फैसले को मंजूरी दी है और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने इसे लागू किया है।
2025-2026 में एफडीआई की बढ़ोतरी
भारत में एफडीआई में निरंतर वृद्धि हो रही है। अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक एफडीआई बढ़कर 88.29 अरब डॉलर (करीब 6.26 लाख करोड़ रुपये) हो गया। यह पिछले वित्त वर्ष से अधिक है, जो भारत के निवेश आकर्षण को दर्शाता है। भारत के शुद्ध एफडीआई में भी बढ़ोतरी हुई है, जो 95.9 करोड़ डॉलर से बढ़कर 6.26 अरब डॉलर हो गया।
अन्य देशों से निवेश की बढ़ोतरी
इस वर्ष एफडीआई में सबसे ज्यादा निवेश यूरोपीय देशों से आया है, जिनका कुल निवेश 42% था। इसके अलावा, अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख देशों से भी निवेश किया गया है। इससे भारत के निवेश आधार में विविधता आई है, और यह दिखाता है कि भारत निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बन चुका है।
निवेश की दिशा
रसायन, दवा, जैव प्रौद्योगिकी और खाद्य प्रसंस्करण में 65% निवेश हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस, रक्षा, मोटर वाहन और इलेक्ट्रिक वाहनों में भी गतिविधि बढ़ी है। भारत सरकार का अनुमान है कि 2025-26 तक एफडीआई 90 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इन्वेस्ट इंडिया कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इनसे करीब 31,000 रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
ये खबरें भी पढ़ें...
डेढ़ में महीने में दूसरी बार बिकी राजस्थान रॉयल्स की टीम, लक्ष्मी मित्तल और अदार पूनावाला नए मालिक
एनटीपीसी लारा में कोयला कांड; 575 ट्रेलर रास्ते से ही हुए गुल, सीबीआई ने कसी अधिकारियों पर नकेल
साइबर ठग से डील करने वाले एसआई समेत 3 सस्पेंड; भ्रष्टाचार और नशे में झगड़े पर कुल 6 पर हुआ एक्शन
पत्नी के प्राइवेट पार्ट में डाली मिर्च : इंदौर में शराबी पति की शर्मनाक करतूत, महिला की हालत गंभीर