जीएसटी काउंसिल का बड़ा फैसला: 10 हजार रुपए तक टैक्स चोरी पर नहीं मिलेगा नोटिस, गिरफ्तारी के लिए कोर्ट की मंजूरी

Manya Jain | Sootr Creatives | Oct 09, 2026, 16:48 IST
अब दस हजार तक की टैक्स चोरी पर नहीं मिलेगा नोटिस
जीएसटी काउंसिल के फैसले से कारोबारियों को राहतें मिली हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अब 10 हजार रुपए तक की टैक्स चोरी पर नोटिस नहीं दिया जाएगा। जीएसटी में गिरफ्तारी का अधिकार टैक्स अफसरों से छिन गया है, अब कोर्ट की मंजूरी जरूरी होगी। जीएसटी रिफंड नए नियम में समय-सीमा 15 से घटकर 10 दिन होगी। रिटर्न देरी की पेनाल्टी 25 हजार से घटाकर 10 हजार रुपए की गई है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • जीएसटी काउंसिल ने कारोबार आसान बनाने वाले फैसले लिए हैं।
  • 10 हजार रुपए तक की टैक्स चोरी पर नोटिस नहीं दिया जाएगा।
  • टैक्स अफसरों से गिरफ्तारी का अधिकार छिन गया है।
  • आपराधिक केस की सीमा 1 करोड़ से बढ़कर 5 करोड़ रुपए हुई।
  • रिफंड और रिटर्न देरी की पेनाल्टी में भी राहत मिली है।

जीएसटी में गिरफ्तारी का अधिकार क्यों छिना?

जीएसटी (Goods and Services Tax) को आए करीब नौ साल हुए। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने टैक्स व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। जीएसटी काउंसिल यानी कर से जुड़े फैसले लेने वाली परिषद ने यह कदम उठाया।



पहले धारा 69 के तहत कारोबारी को गिरफ्तार कर लिया जाता था। अब कोर्ट की मंजूरी जरूरी होगी। रिपोर्ट के मुताबिक यह GST arrest powers से जुड़ा बड़ा बदलाव है।



टैक्स चोरी पर नोटिस की नई सीमा क्या है?

फैसले के मुताबिक, 10 हजार रुपए तक की टैक्स चोरी पर नोटिस नहीं मिलेगा। पहले यह सीमा सिर्फ 1 हजार रुपए थी। यानी अब यह सीमा 10 गुना बढ़ गई है।



आपराधिक केस की सीमा भी बढ़ाई गई है। पहले 1 करोड़ रुपए तक के मामले में यह नियम लागू था। अब यह सीमा 5 करोड़ रुपए हो गई है। यानी 5 करोड़ रुपए तक के मामलों में कारोबारी पर आपराधिक केस नहीं चलेगा।



अब सवाल है कि क्या इससे छोटे कारोबारियों का डर कम होगा? और क्या टैक्स चोरी रोकने के लिए निगरानी पहले की तरह सख्त रहेगी?



जीएसटी रिफंड नए नियम में क्या बदला?

रिफंड आवेदन पर स्वीकृति या कमी बताने की समय-सीमा घटेगी। यह 15 दिन से घटकर 10 दिन होगी। रिपोर्ट के मुताबिक 90% रिफंड फैसले जोखिम के आधार पर होंगे। यानी सिस्टम खुद मंजूर करेगा। स्वीकृति के 3 दिन में आदेश जारी होगा।



जीएसटी रिटर्न की लेट फीस में कितनी राहत?

जीएसटी रिटर्न देरी से भरने पर न्यूनतम पेनाल्टी 25 हजार रुपए थी। अब यह घटाकर 10 हजार रुपए की गई है। GST return late fee में यह कटौती रिपोर्ट में राहत बताई गई है।



पहले बनाम अब: क्या बदला?

नोटिस की सीमा एक हजार से बढ़कर 10 हजार रुपए हो गई। आपराधिक केस की सीमा 1 करोड़ से बढ़कर 5 करोड़ रुपए हो गई।



रिफंड की समय-सीमा 15 दिन से घटकर 10 दिन हो गई। रिटर्न देरी की न्यूनतम पेनाल्टी 25 हजार से घटकर 10 हजार रुपए हो गई।



ई-कॉमर्स और माल वाहनों को राहत

अपंजीकृत व्यक्ति ई-कॉमर्स से सामान डिलीवर करे, तो जीएसटी 18% की जगह 5% लगेगा। अपंजीकृत यानी जिसने जीएसटी रजिस्ट्रेशन नहीं लिया।



माल वाहनों को भी राहत दी गई है। माल की जांच जहां से माल चला, उसी राज्य में होगी। जांच जहां माल पहुंचना है, उस राज्य में भी होगी।



एक राज्य का व्यापारी दूसरे राज्य में

एक राज्य का व्यापारी दूसरे राज्य में ऑफिस लिए बिना काम कर सकेगा। कर्मियों को ग्रुप इंश्योरेंस से सुरक्षा देने वाली कंपनियों को टैक्स क्रेडिट मिलेगा। टैक्स क्रेडिट यानी पहले चुकाए टैक्स का समायोजन।



दुर्लभ बीमारियों की दवा पर टैक्स शून्य

काउंसिल ने 7 दुर्लभ बीमारियों की आयातित दवाओं पर 5% आईजीएसटी हटा दिया है। यह टैक्स इलाज पर भी नहीं लगेगा। आईजीएसटी (IGST – Integrated Goods and Services Tax) आयात पर लगने वाला कर है।



इन बीमारियों में दवा का खर्च 10 लाख से 1 करोड़ रुपए तक होता है। रिपोर्ट के मुताबिक अब यह खर्च घटेगा।



कौन सी हैं ये 7 बीमारियां?

इनमें सिस्टिनोसिस, हाइपर इंसुलिनिज्म, अल्फा-मैनोसिडोसिस और वंशानुगत एंजियोएडेमा शामिल हैं। होमोजाइगस फेमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया भी सूची में है। प्राइमरी हाइपर-ऑक्सालुरिया और प्राइमरी इम्यूनोडेफिशिएंसी डिसऑर्डर भी शामिल हैं।



अब आगे क्या?

रिपोर्ट में इन बदलावों के लागू होने की तारीख नहीं बताई गई है। यानी नियम कब से लागू होंगे, यह आधिकारिक अधिसूचना से साफ होगा। अब GST Council decisions की अधिसूचना का इंतजार है। जीएसटी लागू हुए करीब नौ साल हो चुके हैं। इस दौरान कारोबारी नोटिस, पेनाल्टी और गिरफ्तारी के डर की शिकायत करते रहे हैं। नई सीमाएं और छोटी पेनाल्टी इस बोझ को हल्का कर सकती हैं। रिफंड जल्दी मिलेगा तो कारोबारियों की पूंजी फंसी नहीं रहेगी।



दुर्लभ बीमारियों की दवा पर टैक्स हटने से मरीज परिवारों को भी फायदा मिलेगा। फिर भी नियम लागू होने की तारीख और शर्तें देखना जरूरी है। इसलिए कारोबारियों को आधिकारिक अधिसूचना पर नजर रखनी चाहिए।



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