जीएसटी में बड़े बदलाव की तैयारी: कार से लेकर मोबाइल तक सस्ता हो सकता है ये सब कुछ

Amresh Kushwaha | Sept 17, 2026, 10:43 IST
त्योहारों पर सस्ता होगा ये सब
जीएसटी काउंसिल की 7 अक्टूबर को बैठक होगी। इसमें आईटीसी से जुड़े चार बड़े बदलावों पर फैसला संभव है। इससे कारोबारियों की करीब 25 हजार करोड़ रुपए की फंसी रकम निकल सकती है, जिससे कारें, ऑनलाइन खरीदी और मोबाइल प्लान सस्ते हो सकते हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • सरकार त्योहारी सीजन में जीएसटी नियमों में बदलाव पर विचार कर रही है।
  • इससे कारोबारियों की फंसी टैक्स क्रेडिट की रकम निकल सकती है।
  • जीएसटी काउंसिल की बैठक 7 अक्टूबर को होनी तय है।
  • चार बड़े बदलावों पर इस बैठक में फैसला संभव है।
  • इससे कारें, ऑनलाइन खरीदी और मोबाइल प्लान सस्ते हो सकते हैं।

त्योहारी सीजन के बीच सरकार जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (Goods and Services Tax) के कुछ नियमों में बदलाव पर विचार कर रही है। इससे कंपनियों और कारोबारियों की फंसी टैक्स क्रेडिट की रकम निकल सकती है। आगे पूंजी ब्लॉक होने की समस्या भी घट सकती है।



इसका सीधा असर जीएसटी दरों पर नहीं पड़ेगा। लेकिन कंपनियों की लागत और वर्किंग कैपिटल पर दबाव घटने से राहत मिल सकती है। इससे कार, ऑनलाइन खरीदी और कुछ सेवाओं में ज्यादा डिस्काउंट की गुंजाइश बन सकती है।



कब होगी बड़ी बैठक

जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक 07 अक्टूबर को तय है। इस बड़ी बैठक से पहले अफसरों की बैठक होगी। इसमें इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी (Input Tax Credit) सहित कई अहम मुद्दों पर विचार संभव है।



सूत्रों के मुताबिक इन बदलावों से कंपनियों के अटके करीब 25 हजार करोड़ रुपए का रास्ता साफ हो सकता है। यह रकम अभी अलग-अलग वजहों से कंपनियों के खातों में फंसी हुई है। अगर बैठक में सहमति बनती है, तो इसका असर सीधे बाजार पर दिखेगा।



वाहन क्षेत्र में क्या बदलेगा

अभी मोटर वाहनों और अचल संपत्ति निर्माण से जुड़े वर्क कॉन्ट्रैक्ट की सेवा पर आईटीसी ब्लॉक रहता है। यानी इन सेवाओं पर चुकाए गए जीएसटी का क्रेडिट वापस नहीं मिलता। अब इस रोक को हटाने या ढील देने का प्रस्ताव है।



यदि यह बदलाव होता है तो इनपुट जीएसटी का आईटीसी मिल सकेगा। इसका सीधा फायदा कार कंपनियों, ट्रैवल कंपनियों, डीलरों और व्यापारियों को होगा। इससे वाहन बनाने और बेचने की लागत घट सकती है। इसका नतीजा यह होगा कि कंपनियां ज्यादा डिस्काउंट दे सकेंगी और कारें सस्ती हो सकती हैं।



सप्लायर वाली अड़चन दूर होगी

अभी यदि सप्लायर ने जीएसटी जमा नहीं किया, तो खरीदार का आईटीसी अटक जाता है। इससे कई बार ईमानदार व्यापारी भी परेशान हो जाते हैं। अब प्रस्ताव है कि अगर सेवा मिल चुकी है और भुगतान बैंकिंग चैनल से हुआ है, तो खरीदार को आईटीसी मिलेगी। इससे उन ग्राहकों और व्यापारियों को राहत मिलेगी जो सही तरीके से लेनदेन करते हैं। सामान का दाम भी इससे थोड़ा घट सकता है, क्योंकि व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ नहीं रहेगा।



राज्यों के बीच क्रेडिट का इस्तेमाल

अभी अलग-अलग राज्यों में जमा आईटीसी दूसरे राज्य की जीएसटी देनदारी में इस्तेमाल नहीं होता। इससे कई राज्यों में काम करने वाली कंपनियों की पूंजी अटकी रहती है। अब प्रस्ताव है कि एक राज्य का अतिरिक्त आईटीसी दूसरे राज्य की जीएसटी देनदारी चुकाने में इस्तेमाल हो सके।



इसका सबसे बड़ा फायदा टेलीकॉम, इंफ्रा और ई-कॉमर्स यानी इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स (Electronic Commerce) कंपनियों को मिलेगा। इन कंपनियों की लागत कई राज्यों में एक साथ घट सकती है। इसका सीधा असर मोबाइल प्लान की कीमतों पर पड़ सकता है और यह सस्ते हो सकते हैं।



कंपनसेशन सेस पर राहत

अभी कंपनसेशन सेस का बचा हुआ आईटीसी सामान्य जीएसटी देनदारी में इस्तेमाल नहीं हो सकता। यह रकम कंपनियों के पास बिना इस्तेमाल के पड़ी रहती है। अब प्रस्ताव है कि इसे जीएसटी की सामान्य देनदारी चुकाने में भी इस्तेमाल किया जा सके।



इसका सबसे ज्यादा फायदा ऑटो सेक्टर को मिलेगा। इससे कंपनियों की फंसी पूंजी मुक्त होगी। जब कंपनियों के पास ज्यादा नकदी बचेगी, तो इसका फायदा आखिर में ग्राहकों तक भी पहुंच सकता है।



तीन मोर्चों पर मिल सकती है राहत

विशेषज्ञों के मुताबिक ग्राहकों को तीन अलग-अलग तरीकों से फायदा पहुंच सकता है। पहला मोर्चा है कारें। डीलरों और कारोबारियों की फंसी पूंजी निकलने से ऑफर और डिस्काउंट बढ़ने की गुंजाइश है।



दूसरा मोर्चा है ऑनलाइन खरीदी। यदि ई-कॉमर्स कंपनियों की वर्किंग कैपिटल लागत घटती है, तो बेहतर ऑफर मिल सकते हैं।



तीसरा मोर्चा है टेलीकॉम। आईटीसी के बेहतर इस्तेमाल से कंपनियों का कैश फ्लो सुधरेगा। इससे कैश फ्लो में सुधार होने पर मोबाइल प्लान की कीमतें भी घट सकती हैं।



एक्सपर्ट की राय

जीएसटी विशेषज्ञ मुकुल शर्मा के मुताबिक यह बदलाव सीधे टैक्स दरों में नहीं है। उनका कहना है कि यह बदलाव कंपनियों की कार्यशील पूंजी से जुड़ा है। उनके अनुसार जब कंपनियों की लागत घटती है, तो असर बाजार में दिखना तय है।



उन्होंने बताया कि अटकी हुई पूंजी निकलने से कंपनियां प्रतिस्पर्धा में ज्यादा डिस्काउंट दे सकती हैं। उनका मानना है कि यह बदलाव त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। हालांकि अंतिम फैसला 7 अक्टूबर की बैठक में ही होगा।



आगे क्या हो सकता है

अफसरों की बैठक में इन प्रस्तावों पर पहले चर्चा होगी। इसके बाद ही यह मुद्दे जीएसटी काउंसिल के सामने रखे जाएंगे। काउंसिल में राज्यों के प्रतिनिधि और केंद्र सरकार दोनों शामिल होते हैं।



किसी भी बदलाव पर अंतिम मुहर काउंसिल की बैठक में ही लगेगी। यदि यह चार प्रस्ताव मंजूर होते हैं, तो इसका असर त्योहारी सीजन में तुरंत दिख सकता है। कारोबारी और आम ग्राहक दोनों इस बैठक के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।



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