फिर बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम, लाल सागर से होर्मुज तक छिड़ा संग्राम
दुनिया की 30% तेल सप्लाई पर खतरा
मिडिल ईस्ट में तनाव अब दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा सिरदर्द बन चुका है। जिन तीन समुद्री और जमीनी रास्तों से खाड़ी देशों का तेल भारत समेत दुनिया भर में जाता था, वे तीनों एक साथ रुकने के कगार पर पहुंच गए हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पहले से ही बिगड़ी हुई थी। अब सऊदी अरब ने ड्रोन हमलों के बाद अपनी मुख्य पाइपलाइन बंद कर दी है। उधर यमन के तट पर बाब अल-मंदेब पर हूती विद्रोहियों का शिकंजा कसता दिख रहा है।
अगर ये तीनों रास्ते पूरी तरह ठप होते हैं, तो दुनिया की लगभग 30 फीसदी तेल सप्लाई रुक जाएगी। इसका सीधा असर यह होगा कि यूरोप, भारत और चीन जैसे बड़े देशों को जाने वाली ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह चरमरा जाएगी। दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल, गैस और समुद्री माल ढुलाई अचानक बहुत महंगी हो जाएगी।
किन तीन रास्तों पर फंसा पूरा पेंच?
दुनिया भर में जाने वाला करीब एक-तिहाई तेल इन्हीं तीन प्रमुख रास्तों से निकलता है। आइए अलग-अलग समझते हैं कि इन रास्तों की मौजूदा हालत क्या है:
1. सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन
सऊदी अरब का कच्चा तेल उसके पूर्वी हिस्से से जमीन के भीतर से होता हुआ लाल सागर के यानबू पोर्ट तक पाइपलाइन के जरिए जाता है। वहां से जहाजों में भरकर तेल यूरोप और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा जाता है।
इस पाइपलाइन से रोजाना 40 से 50 लाख बैरल तेल सप्लाई होता है, जो दुनिया के कुल तेल का लगभग 4 से 5 फीसदी हिस्सा है। इराकी क्षेत्र से हुए ड्रोन हमलों की वजह से सऊदी अरब ने एहतियात के तौर पर इस पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।
2. बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य
यह 29 किलोमीटर चौड़ा संकरा समुद्री रास्ता लाल सागर को अदन की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के कुल समुद्री तेल और गैस व्यापार का 5% से 12% हिस्सा (लगभग 40 से 50 लाख बैरल प्रतिदिन) इसी रास्ते से होकर जाता है।
लाल सागर के तट पर 18 घंटे चले जोरदार हमलों के बाद हूती विद्रोही इस पर नियंत्रण पाने के बिल्कुल करीब हैं। ईरान समर्थित हूतियों के नियंत्रण में जाने से तेहरान की पकड़ इस रूट पर मजबूत हो जाएगी। इससे खाड़ी देशों का निर्यात कभी भी रोका जा सकता है।
3. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल चोकपॉइंट है, जहां से दुनिया का करीब 20 फीसदी कच्चा तेल गुजरता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण इस रास्ते पर तेल टैंकरों की आवाजाही पहले से ही बहुत ज्यादा प्रभावित चल रही है।
भारत और आम जनता पर इसका असर?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कच्चे तेल के आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर है। हालांकि भारत ने हाल के दिनों में कई अन्य देशों से तेल खरीदना शुरू कर दिया है, जिससे सऊदी पाइपलाइन बंद होने का सीधा असर थोड़ा संभल सकता है। लेकिन जब पूरे समुद्री रास्ते ही ब्लॉक होने लगें, तो भारत पर इसका गंभीर असर पड़ना तय है।
- यूरोप को जाने वाला व्यापार ठप होने का डर: भारत केवल तेल मंगाने के लिए ही नहीं, बल्कि यूरोप को दवाइयां, मशीनरी और ईंधन निर्यात करने के लिए भी बाब अल-मंदेब के रास्ते नीदरलैंड के रॉटरडैम और फ्रांस के मार्सिले बंदरगाहों तक जाता है। यह रास्ता बंद होने से भारतीय निर्यात महंगा और लेट हो जाएगा।
- महंगाई और बाजार में मंदी: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पहले ही 100 डॉलर प्रति बैरल पर चल रही हैं। रास्ते बंद होने से दाम और तेजी से उछलेंगे। कच्चा माल महंगा होने से कंपनियों की लागत बढ़ेगी, उत्पादन घटेगा, शेयर बाजार में भारी गिरावट आएगी और आम उपभोक्ता के लिए हर चीज महंगी हो जाएगी।
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