टेरर फंडिंग जाल में फंसी हरिद्वार की ग्रेजुएट सोनम, J&K पुलिस ने धरा, करोड़ों के लेनदेन का आरोप
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- हरिद्वार की ग्रेजुएट युवती सोनम J&K पुलिस ने टेरर फंडिंग में गिरफ्तार की।
- उमर नामक कश्मीरी युवक ने सोनम को पैसों का लालच देकर फंसाया।
- सोनम ने 8-10 खातों के जरिए करीब 20 लाख रुपए ट्रांसफर किए।
- इसके बदले उसे 2 लाख रुपए कमीशन मिला।
- मामले की मुख्य जांच जम्मू-कश्मीर पुलिस के हाथ में है।
गरीबी ने फंसाया जाल में
उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के कलियर थाना क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के कठुआ जिले की लखनपुर पुलिस ने हरिद्वार से सोनम नामक एक ग्रेजुएट युवती को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने पाकिस्तान से जुड़े संदिग्ध लेनदेन में मदद की और इस तरह टेरर फंडिंग (Terror Funding) के नेटवर्क का हिस्सा बन गई।
एसएसपी (Senior Superintendent of Police) हरिद्वार नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि सोनम कलियर क्षेत्र की रहने वाली है। वह पढ़ी-लिखी ग्रेजुएट है, लेकिन उसके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। परिवार में आय का कोई और जरिया नहीं होने के कारण वह पैसों की तंगी से जूझ रही थी। यही तंगी उसे इस खतरनाक जाल तक ले गई।
सहेली बनी रास्ता, उमर बना जाल
सोनम ने संयुक्त पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने अपनी धनोरी निवासी सहेली के माध्यम से उमर नामक व्यक्ति से संपर्क किया था। यानी इस पूरे मामले में एंट्री एक भरोसेमंद दोस्त के जरिए हुई। उमर एक कश्मीरी युवक है।
इसी वित्तीय संकट के दौरान वह धनोरी में रहने वाली अपनी एक सहेली के जरिए उमर नाम के व्यक्ति के संपर्क में आई, जिसने उसे मोटी कमाई का लालच देकर इस अवैध धंधे में शामिल कर लिया।
उमर और कजन ने बिछाई पूरी बिसात
पूछताछ में सोनम ने बताया कि जब उसने उमर को अपने परिवार के आर्थिक संकट के बारे में बताया, तो उमर ने उसकी बात अपने एक कजन से कराई। इसके बाद उमर ने सोनम को 8-10 अलग-अलग बैंक खातों से संबंधित पासबुक, एटीएम कार्ड और चेकबुक कूरियर के जरिए भेजीं। इस तरह एक सुनियोजित नेटवर्क ने एक मजबूर लड़की को अपना मोहरा बना लिया।
उमर ने सोनम को पूरा तरीका समझाया कि इन खातों को कैसे एक्टिवेट करना है। इस तरह साजिशकर्ताओं ने सोनम के जरिए देश विरोधी वित्तीय नेटवर्क का जाल बुना।
20 लाख ट्रांसफर, 2 लाख कमीशन
योजना के मुताबिक, सोनम के पास मौजूद बैंक खातों में लगातार पैसे भेजे जाते थे। इसके बाद उमर से मिलने वाले निर्देशों के आधार पर सोनम उन पैसों को दूसरे खातों में ट्रांसफर करती थी। कुछ रकम उसे एटीएम के माध्यम से निकालनी होती थी, तो कुछ पैसे उसे यूपीआई (Unified Payments Interface) के जरिए भेजने होते थे।
सोनम ने कुबूल किया है कि वह अब तक इस नेटवर्क के जरिए लगभग 20 लाख रुपये ट्रांसफर कर चुकी है और इसके बदले उसे 2 लाख रुपए का कमीशन मिला था। यानी देश की सुरक्षा से जुड़े इस संदिग्ध नेटवर्क में उसकी कुल कमाई सिर्फ 2 लाख रुपए थी।
J&K पुलिस ने की बड़ी कार्रवाई
एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि जम्मू-कश्मीर की लखनपुर पुलिस ने कलियर थाने से संपर्क कर मामले के जरूरी दस्तावेज पेश किए थे। इसके बाद पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए सोनम को गिरफ्तार कर रवाना किया गया है।
चूंकि इस मामले का मुख्य मुकदमा पहले से ही जम्मू-कश्मीर में पंजीकृत है, इसलिए आगे की पूरी इन्वेस्टिगेशन वहीं की पुलिस द्वारा की जा रही है। हरिद्वार पुलिस जम्मू-कश्मीर पुलिस के संपर्क में है और आगे मिलने वाली जानकारियां साझा की जाएंगी।
गरीबी का फायदा उठाते हैं नेटवर्क
यह मामला एक बड़ी सच्चाई सामने रखता है। आर्थिक रूप से कमजोर और पढ़े-लिखे युवा किस तरह इस तरह के नेटवर्क के निशाने पर होते हैं, यह इस घटना से साफ है। एक ग्रेजुएट लड़की, जिसके पास हुनर था लेकिन रोजगार नहीं था, आसानी से इस जाल में आ गई। सिर्फ एक सहेली की जान-पहचान और मोटी कमाई के झांसे ने उसे उस रास्ते पर धकेल दिया जहां से वापसी मुश्किल है।
जांच अभी जारी है और यह देखना होगा कि इस नेटवर्क की जड़ें कहां तक फैली हैं।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक जिम्मेदारी और कानून के नजरिए से बेहद अहम है। टेरर फंडिंग के लिए आम और जरूरतमंद नागरिकों को निशाना बनाने की यह प्रवृत्ति खतरनाक है। UPI और बैंक खातों के जरिए होने वाला यह नेटवर्क डिजिटल वित्तीय सुरक्षा पर भी सवाल खड़ा करता है। भारतीय संविधान के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा कानून और UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) जैसे कानून इस तरह के मामलों को गंभीरता से लेते हैं। यह मामला यह भी बताता है कि बेरोजगारी और गरीबी किस तरह युवाओं को गलत रास्ते पर ले जाने का जरिया बन जाती है। समाज और सरकार दोनों के लिए यह संदेश है कि आर्थिक सुरक्षा और डिजिटल जागरूकता को बढ़ावा दिया जाए, ताकि ऐसे नेटवर्क कमजोर तबके का शोषण न कर सकें।
जरूरी FAQ
टेरर फंडिंग क्या होती है और इसमें आम नागरिकों की क्या भूमिका हो सकती है?
टेरर फंडिंग (Terror Funding) यानी आतंकी गतिविधियों के लिए पैसे पहुंचाना। इसमें अक्सर आम नागरिकों को अनजाने में या लालच देकर शामिल किया जाता है। इस मामले में उमर नामक व्यक्ति ने सोनम को बैंक खातों के जरिए पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा। सोनम को शायद पूरी जानकारी नहीं थी कि यह पैसा कहां जा रहा है, लेकिन कानूनी नजरिए से वह इस नेटवर्क का हिस्सा बन गई। UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत ऐसे मामलों में सजा बेहद कड़ी होती है।
हरिद्वार की सोनम को किस आरोप में गिरफ्तार किया गया और जांच कहां होगी?
सोनम को पाकिस्तान से जुड़े संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और टेरर फंडिंग के आरोप में जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले की लखनपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। हरिद्वार पुलिस ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि की है। चूंकि मुख्य मुकदमा जम्मू-कश्मीर में पंजीकृत है, इसलिए आगे की पूरी जांच वहीं की पुलिस करेगी। हरिद्वार पुलिस जरूरत पड़ने पर जानकारी साझा करती रहेगी।
इस मामले में उमर ने किस तरह सोनम को जाल में फंसाया?
उमर ने सोनम की आर्थिक कमजोरी का फायदा उठाया। पहले उसने सोनम की सहेली के जरिए उससे संपर्क बनाया। फिर उसने सोनम को मोटी कमाई का लालच देते हुए अपने कजन से मिलवाया। इसके बाद उमर ने 8-10 बैंक खातों की पासबुक, एटीएम कार्ड और चेकबुक कूरियर से सोनम के पास भेजी। सोनम को निर्देश मिलते थे कि इन खातों में आए पैसे UPI और एटीएम के जरिए दूसरे खातों में ट्रांसफर करे। बदले में सोनम को कमीशन मिलता था। करीब 20 लाख रुपए ट्रांसफर कराने पर उसे 2 लाख रुपए दिए गए।
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