रिटायरमेंट के दिन हाथों में हथकड़ी, 169 करोड़ के घोटाले में नपे आईएएस प्रदीप कुमार

Aman Vaishnav | Jul 01, 2026, 10:55 IST
आईएएस प्रदीप कुमार
बैंक घोटाले में सीबीआई ने हरियाणा के आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। हैरत की बात है कि IAS अधिकारी अपने रिटायरमेंट वाले दिन ही गिरफ्तार हुए हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • सीबीआई ने एक घोटाला में हरियाणा के IAS अधिकारी प्रदीप कुमार को गिरफ्तार किया है।
  • प्रदीप कुमार मंगलवार, 30 जून को ही रिटायर हुए थे।
  • IAS प्रदीप कुमार कई दिनों से फरार चल रहे थे।
  • यह बैंक घोटाला हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जुड़ा है।
  • इस मामले में अब तक तीन IAS अधिकारी गिरफ्तार हो चुके हैं।

रिटायरमेंट के दिन ही गिरफ्तारी

मंगलवार, 30 जून का दिन हरियाणा के IAS अधिकारी प्रदीप कुमार के लिए दोहरा साबित हुआ। एक तरफ वह सरकारी सेवा से रिटायर हुए।



वहीं दूसरी तरफ शाम होते ही सीबीआई ने उन्हें दबोच लिया। हरियाणा में यह अपनी तरह का पहला मामला है। यहां किसी IAS अधिकारी को रिटायरमेंट वाले दिन गिरफ्तार किया गया है।



इस मामले की जानकारी सीबीआई प्रवक्ता ने देर शाम इसकी दी। उन्होंने बताया कि यह घोटाला उस समय हुआ, जब प्रदीप कुमार हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में सदस्य सचिव थे। इस मामले में अब तक तीन IAS अधिकारी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।



कैसे हुआ पूरा फ्रॉड

दरअसल प्रदीप कुमार पर आईडीएफसी बैंक की सेक्टर 32 चंडीगढ़ शाखा में सरकारी फंड की हेराफेरी का आरोप है। जांच में सामने आया कि सदस्य सचिव रहते हुए उनके कामों का इस फ्रॉड से सीधा संबंध था। इन्वेस्टमेंट से जुड़ा पूरा काम उन्होंने खुद ही संभाला था।



जानकारी के अनुसार फिक्स्ड डिपॉजिट के नाम पर तय लिमिट से कहीं ज्यादा फंड बैंक को भेजा गया। HSPCB का पैसा पहले IDFC FIRST Bank की सेक्टर-32 शाखा, चंडीगढ़ में खोले गए एक अकाउंट में ट्रांसफर हुआ। हैरानी की बात यह है कि इस अकाउंट को खोलने का कोई रिकॉर्ड डिपार्टमेंट के पास नहीं मिला।



बिना मंजूरी अकाउंट, फर्जी लेनदेन

सीबीआई के मुताबिक यह साजिश काफी सुनियोजित थी। बिना किसी मंजूरी के अकाउंट खोला गया। फिक्स्ड डिपॉजिट बनाने के नाम पर पैसा उसमें ट्रांसफर कर दिया गया। लेकिन जांच में पता चला कि उस बैंक में असल में कोई फिक्स्ड डिपॉजिट बनाई ही नहीं गई।



इसके बजाय उस अकाउंट से लगातार धोखाधड़ी वाले डेबिट ट्रांजेक्शन किए गए। इससे सरकारी पैसे का बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल हुआ। हरियाणा सरकार को इस एक मामले में लगभग 169 करोड़ रुपए का नेट नुकसान हुआ है।



हरियाणा की अब तक की सबसे बड़ी वित्तीय क्षति

सीबीआई का कहना है कि यह हरियाणा के किसी भी सरकारी विभाग को हुआ अब तक का सबसे बड़ा फाइनेंशियल नुकसान है। प्रदीप कुमार लंबे समय से जांच एजेंसियों से बचते रहे। बार-बार बुलाए जाने पर भी वह जांच में शामिल नहीं हुए।



आखिरकार सीबीआई ने उनका ठिकाना ढूंढ निकाला और गिरफ्तार कर लिया। राज्य सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने यह जांच स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो हरियाणा से अपने हाथ में ली थी।



504 करोड़ के बड़े घोटाले का हिस्सा

HSPCB से जुड़ा यह फ्रॉड असल में एक बड़े बैंकिंग घोटाले का ही एक हिस्सा है। यह पूरा घोटाला चंडीगढ़ की DFC FIRST Bank सेक्टर-32 शाखा में हुआ था। इसमें हरियाणा सरकार के आठ अलग-अलग विभागों के करीब 504 करोड़ रुपए शामिल हैं।



सीबीआई के अनुसार यह पैसा फर्जी और अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट के नाम पर निकाला गया। साथ ही धोखाधड़ी वाले डेबिट ट्रांजेक्शन के जरिए भी रकम निकाली गई।



अब तक 17 आरोपियों पर चार्जशीट

इस पूरे मामले में सीबीआई अब तक 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें IDFC First बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह बैंक अधिकारी शामिल हैं। हरियाणा सरकार के तीन अधिकारी भी आरोपियों में हैं। इसके अलावा दो कंपनियां और छह निजी व्यक्ति भी चार्जशीट में नामजद हैं।



सीबीआई चंडीगढ़ से जुड़े दो और मामलों की जांच कर रही है। ये मामले चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और CREST से जुड़े हैं। इन दोनों मामलों में पहले ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।



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