हेल्थ इंश्योरेंस नए नियम 2027: कैशलेस इलाज पर 10% को-पेमेंट, हर इंश्योरेंस क्लेम पर मिलेंगे अधिकतम 5 लाख रुपए

Manya Jain | Sootr Creatives | Oct 06, 2026, 16:06 IST
1 जनवरी 2027 से बदल सकता है बीमा का नियम
हेल्थ इंश्योरेंस लेने वालों के लिए बड़ा बदलाव हो सकता है। गैर-जीवन बीमा कंपनियां 1 जनवरी 2027 से रिटेल पॉलिसी में 10% को-पेमेंट लागू करने पर विचार कर रही हैं। इसका मतलब है कि इंश्योरेंस क्लेम मंजूर होने पर ग्राहक को क्लेम की 10% रकम अपनी जेब से देनी पड़ सकती है। एक क्लेम पर ग्राहक की अधिकतम हिस्सेदारी 5 लाख रुपए रखने का प्रस्ताव है।

हेल्थ इंश्योरेंस नए नियम 2027 में क्या है?

रिपोर्ट के मुताबिक, व्यापक पॉलिसी लेने वाले ग्राहकों पर भी यह नियम लागू हो सकता है। उन्हें भी पात्र खर्च का 10% अपनी जेब से देना पड़ सकता है। हालांकि, ये स्वास्थ्य बीमा के नए नियम अभी सिर्फ प्रस्ताव हैं, इन्हें अभी अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।



अस्पताल में भर्ती होने के दौरान होने वाला पात्र खर्च इसके दायरे में आ सकता है। बीमारी के साथ दुर्घटना के कारण अस्पताल में भर्ती होने का खर्च भी इसमें शामिल हो सकता है। हालांकि, ओपीडी (OPD) यानी बिना अस्पताल में भर्ती हुए इलाज के खर्च का क्लेम इसमें शामिल नहीं होगा।



किन पॉलिसियों पर लागू हो सकता है नियम?

यह प्रस्ताव रिटेल इंडेम्निटी हेल्थ पॉलिसी पर लागू हो सकता है। इंडेम्निटी पॉलिसी का मतलब ऐसी पॉलिसी से है, जिसमें इलाज पर हुआ असल खर्च बीमा कंपनी से वापस मिलता है। ग्रुप के तहत आने वाली रिटेल पॉलिसी भी इसके दायरे में आ सकती है। कॉम्बी प्रोडक्ट के इंडेम्निटी हिस्से पर भी इसका असर पड़ सकता है।



इंटरनल माइग्रेशन और पोर्टेबिलिटी के कारोबार पर भी यह नियम लागू हो सकता है। पोर्टेबिलिटी का मतलब है अपनी हेल्थ पॉलिसी को एक बीमा कंपनी से दूसरी कंपनी में ले जाना।



कैशलेस इलाज पर भी देना होगा 10%?

यह नियम कैशलेस इलाज और रीइंबर्समेंट, दोनों पर लागू हो सकता है। रीइंबर्समेंट का मतलब है कि पहले मरीज खुद अस्पताल का बिल भरे और बाद में इंश्योरेंस कंपनी से पैसे वापस ले। यानी क्लेम किसी भी तरीके से किया जाए, ग्राहक को कुछ रकम अपनी जेब से देनी पड़ सकती है।



उदाहरण के लिए, अगर इलाज का खर्च 2 लाख रुपए है, तो 20 हजार रुपए ग्राहक को खुद देने पड़ सकते हैं। अब सवाल यह है कि क्या हर परिवार के लिए इतना खर्च अपनी जेब से उठाना आसान होगा?



दूसरी पॉलिसी भी नहीं आएगी काम

प्रस्ताव के मुताबिक 10% को-पेमेंट को राइडर के जरिए कम या खत्म नहीं किया जा सकेगा। राइडर यानी पॉलिसी के साथ लिया जाने वाला अतिरिक्त कवर। इसी तरह, बाद में पॉलिसी में बदलाव करके भी इसे बदला नहीं जा सकेगा।



ग्राहक इस 10% हिस्से की रकम किसी दूसरी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी से भी नहीं ले सकेगा।



सस्ता प्रीमियम या पूरा कवर, चुनाव किसका?

देशपांडे के मुताबिक, जो ग्राहक ज्यादा प्रीमियम भरता है, वह आमतौर पर ज्यादा बीमा कवर लेता है। यानी उसकी पॉलिसी में इलाज के लिए ज्यादा रकम तय होती है। ऐसे ग्राहक से इलाज के खर्च का कुछ हिस्सा लेना उन्हें सही नहीं लगता। इससे लोग ज्यादा कवर वाली पॉलिसी लेने से भी पीछे हट सकते हैं। सवाल यह है कि पूरा कवर लेने वाले ग्राहक को भी अपनी जेब से कुछ रकम देनी चाहिए?



जनरल इंश्योरेंस काउंसिल की दलील क्या है?

बीमा कंपनियों का कहना है कि जब इलाज का पूरा खर्च बीमा से मिलता है, तो कुछ अस्पताल अतिरिक्त जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। वे मरीज को ज्यादा प्रक्रियाएं कराने या ज्यादा दिनों तक अस्पताल में रखने की सलाह भी दे सकते हैं। महंगे कमरे लेने से भी इलाज का कुल खर्च बढ़ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि डॉक्टर की फीस और कुछ इलाज की फीस कमरे के किराये से जुड़ी होती है।



जनरल इंश्योरेंस काउंसिल यानी जीआई काउंसिल का मानना है कि जब मरीज के इलाज का पूरा खर्च बीमा कंपनी उठाती है, तो वह अस्पताल के बिल पर ज्यादा सवाल नहीं करता। इससे इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं की लागत बढ़ सकती है।



4300 से ज्यादा अस्पतालों के लिए एक पैनल

प्रस्ताव में सभी बीमा कंपनियों की ओर से अस्पतालों को एक ही सूची में शामिल करने की बात भी कही गई है। एम्पैनलमेंट का मतलब है अस्पताल को बीमा कंपनी की सूची में शामिल करना। जीआई काउंसिल 4,300 से ज्यादा अस्पतालों के लिए एक जैसी व्यवस्था बनाना चाहती है।



इससे इलाज की अलग-अलग प्रक्रियाओं और सेवाओं के लिए तय रेट बनाने की कोशिश होगी। मनमाने बिल रोकने के लिए इलाज के नतीजे के आधार पर अनुबंध करने का प्रस्ताव है। वहीं, ग्राहकों की शिकायतें सुलझाने के लिए अलग मंच बनाने की भी बात कही गई है।



कम्पटीशन को लेकर क्या है चिंता?

इंडस्ट्री के कुछ लोगों को इस बात की चिंता है कि सभी बीमा कंपनियां मिलकर पूरा खर्च कवर करने वाली पॉलिसी बंद कर सकती हैं। अगर ऐसा हुआ, तो बीमा कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा को लेकर सवाल उठ सकते हैं। ऐसे में ग्राहकों के पास विकल्प कितने बचेंगे, यह भी चिंता का विषय है।



फिलहाल यह सिर्फ एक प्रस्ताव है। जीआई काउंसिल के स्तर पर इस पर विचार चल रहा है।



यह खबर क्यों जरूरी है

हेल्थ इंश्योरेंस आम परिवारों के लिए बड़ी आर्थिक मदद है। अचानक इलाज का खर्च बढ़ जाए, तो बीमा पॉलिसी काफी राहत देती है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो मंजूर हुए क्लेम की 10% रकम ग्राहक को अपनी जेब से देनी होगी। इसलिए पॉलिसी लेने या बदलने से पहले उसकी शर्तों को अच्छी तरह समझना जरूरी होगा।



हर व्यक्ति को सही और भरोसेमंद इलाज मिलना जरूरी है। ऐसे किसी भी बदलाव में ग्राहकों की राय को भी महत्व दिया जाना चाहिए। फैसला लेने से पहले इन सभी सवालों पर खुलकर चर्चा होना जरूरी है।



FAQ

  1. क्या हेल्थ इंश्योरेंस के नए नियम 2027 में ग्राहकों को 10% योगदान देना होगा?
    हाँ, प्रस्तावित नए नियमों के अनुसार, ग्राहकों को पात्र खर्च का 10% देना पड़ सकता है, लेकिन यह अभी सिर्फ एक प्रस्ताव है और इसे लागू करने की प्रक्रिया जारी है।
  2. क्या यह नियम कैशलेस इलाज पर भी लागू होगा?
    हाँ, यह नियम कैशलेस इलाज और रीइंबर्समेंट दोनों पर लागू हो सकता है, जिसका मतलब है कि ग्राहक को क्लेम के किसी भी तरीके से 10% कटौती देनी होगी।
  3. क्या इस प्रस्ताव में ओपीडी खर्च शामिल हैं?
    नहीं, प्रस्ताव के तहत ओपीडी क्लेम दायरे से बाहर हैं। यह नियम केवल अस्पताल में भर्ती के पात्र खर्च पर लागू होगा।
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