Makar Sankranti 2026: सूर्य उपासना, वैज्ञानिक महत्व और दान का पावन पर्व
Kaushiki | Jan 14, 2026, 08:40 IST
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नई फसल का स्वागतImage credit : Kaushiki
ये मौलिक रूप से किसानों का त्योहार है। इस दिन नई फसल के आगमन पर ईश्वर को भोग लगाया जाता है। धरती मां की पूजा कर खुशहाली मांगी जाती है। डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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स्नान और दान का महत्वImage credit : Kaushiki
इस दिन लोग पवित्र नदियों में डुबकी लगाकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं। साथ ही गरीबों को तिल, गुड़, खिचड़ी और कंबल दान करना इस दिन का सबसे बड़ा पुण्य कर्म माना जाता है।
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सौर परिवर्तन का पर्वImage credit : Kaushiki
यह दिन खगोलीय रूप से बहुत खास है क्योंकि सूर्य उत्तर की ओर गमन करने लगते हैं। इससे दिन लंबे होने लगते हैं और ठिठुरती ठंड में कमी आने लगती है।
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मकर संक्रांति का त्योहारImage credit : Kaushiki
Makar Sankranti: मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सूर्य देव की उपासना और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का एक पावन उत्सव है। इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसे उत्तरायण की शुरुआत माना जाता है। 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को है। आइए जानें मकर संक्रांति का महत्व।
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भीष्म पितामह और मोक्षImage credit : Kaushiki
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, भीष्म पितामह ने देह त्यागने के लिए इसी दिन (उत्तरायण) का इंतजार किया था। ऐसा इसलिए, क्योंकि इसे मोक्ष प्राप्ति का समय माना जाता है।
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नाम अनेक, भावना एकImage credit : Kaushiki
मकर संक्रांति के पर्व को उत्तर भारत में खिचड़ी, पंजाब में लोहड़ी, गुजरात में सूर्य उत्तरायण, दक्षिण में पोंगल और असम में बिहू के नाम से एक ही उत्साह के साथ मनाते हैं।
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तिल-गुड़ का वैज्ञानिक मेलImage credit : Kaushiki
आयुर्वेद के मुताबिक, सर्दियों में तिल-गुड़ का सेवन शरीर को अंदरूनी गर्मी देता है। इसलिए तिल-गुड़ लीजिए और मीठा-मीठा बोलिए की परंपरा निभाई जाती है।
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पतंगबाजी की परंपराImage credit : Kaushiki
गुजरात और राजस्थान में आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। ये धूप में समय बिताने और विटामिन-D लेने का एक वैज्ञानिक और मजेदार तरीका है।