होर्मुज संकट से भारत की कंडोम इंडस्ट्री पर असर: कच्चे माल की कमी से 8000 करोड़ का बाजार दबाव में

Pawan Modiya | Apr 01, 2026, 24:27 IST
Photograph: (the sootr)
होर्मुज संकट (Hormuz Crisis) के कारण भारत की कंडोम इंडस्ट्री (Condom Industry) की सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। कच्चे माल की कमी और बढ़ती लागत से 8000 करोड़ रुपए का बाजार दबाव में है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक व्यापार और उद्योगों पर साफ दिखाई देने लगा है। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट (Strait of Hormuz Crisis) ने कई देशों की सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। भारत भी इससे अछूता नहीं है।



ताजा जानकारी के अनुसार इस संकट का असर अब भारत की कंडोम इंडस्ट्री (India Condom Industry) पर भी पड़ने लगा है। करीब 8000 करोड़ रुपए के इस बड़े बाजार में कच्चे माल की आपूर्ति बाधित होने और लागत बढ़ने से उत्पादन पर दबाव बढ़ रहा है।



विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इससे न केवल उद्योग बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) और परिवार नियोजन (Family Planning) कार्यक्रमों पर भी असर पड़ सकता है।



भारत की कंडोम इंडस्ट्री का आकार

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां कंडोम का उत्पादन और खपत दोनों बड़े पैमाने पर होते हैं। देश में कंडोम का बाजार लगभग 8000 करोड़ रुपए का माना जाता है।



इस इंडस्ट्री में कई प्रमुख कंपनियां शामिल हैं, जैसे-



  • एचएलएल लाइफकेयर (HLL Lifecare)
  • मैनकाइंड फार्मा (Mankind Pharma)
  • क्यूपिड लिमिटेड (Cupid Limited)

ये कंपनियां न केवल घरेलू बाजार की जरूरतें पूरी करती हैं बल्कि कई देशों को निर्यात भी करती हैं।



कच्चे माल की कमी बनी बड़ी चुनौती

कंडोम निर्माण के लिए कुछ विशेष रसायनों और पेट्रोकेमिकल आधारित उत्पादों की जरूरत होती है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं-



  • सिलिकॉन ऑयल (Silicone Oil)
  • अमोनिया (Ammonia)
  • पीवीसी फॉयल (PVC Foil)
  • एल्युमीनियम फॉयल (Aluminium Foil)
  • पैकेजिंग मटेरियल (Packaging Material)

पश्चिम एशिया में संकट के कारण इन कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इससे उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।



एक उद्योग विशेषज्ञ के अनुसार अमोनिया की कीमतों में 40 से 50 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। वहीं सिलिकॉन ऑयल की कमी से उत्पादन प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ रहा है।



कंडोम निर्माण में उपयोग होने वाले प्रमुख कच्चे माल

  • सिलिकॉन ऑयल (Silicone Oil)
  • अमोनिया (Ammonia)
  • पेट्रोकेमिकल आधारित रसायन (Petrochemical Chemicals)
  • पीवीसी फॉयल (PVC Foil)
  • एल्युमीनियम फॉयल (Aluminium Foil)

इन सभी सामग्रियों की आपूर्ति अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ी होती है।



पेट्रोकेमिकल सप्लाई पर संकट का असर

कर्नाटक ड्रग्स एंड फार्मास्युटिकल्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (Karnataka Drugs and Pharmaceutical Manufacturers Association) के अध्यक्ष जतीश एन शेठ (Jatish N Sheth) ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है।



उनके अनुसार,



पेट्रोकेमिकल संसाधनों का बड़ा हिस्सा ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में अन्य उद्योगों के लिए इन संसाधनों का आवंटन सीमित हो गया है।



सप्लाई चेन पर बढ़ता दबाव

कंडोम इंडस्ट्री सप्लाई चेन (Condom Industry Supply Chain) में कच्चे माल की कमी के कारण कंपनियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।



प्रमुख समस्याएं

  1. कच्चे माल की कमी
  2. आयात लागत में वृद्धि
  3. पैकेजिंग सामग्री की कीमतों में उतार-चढ़ाव
  4. ऑर्डर समय पर पूरा करने में कठिनाई

उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबी चली तो उत्पादन कम करना पड़ सकता है।



सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है असर

भारत में कंडोम केवल एक व्यावसायिक उत्पाद नहीं है बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य और परिवार नियोजन कार्यक्रमों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।



सरकार और कई गैर-सरकारी संस्थाएं इसे सस्ती कीमत पर उपलब्ध कराती हैं ताकि:



  • जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा मिले
  • यौन रोगों से बचाव हो
  • सुरक्षित यौन व्यवहार को प्रोत्साहन मिले

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के कारण कंडोम की कीमतें बढ़ती हैं तो इसका सीधा असर इसकी खपत पर पड़ सकता है।



क्या कहते हैं एक्सपर्ट

एक उद्योग विशेषज्ञ ने चेतावनी देते हुए कहा:



कंपनियों के सामने क्या विकल्प?

उद्योग विश्लेषकों का कहना है कि कंपनियां इस संकट से निपटने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर सकती हैं।



संभावित उपाय

  • वैकल्पिक सप्लाई स्रोत तलाशना
  • घरेलू उत्पादन बढ़ाना
  • लागत नियंत्रण उपाय अपनाना
  • सरकारी सहायता की मांग करना

हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भू-राजनीतिक संकट जल्दी समाप्त नहीं हुआ तो स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।



वैश्विक व्यापार पर भी असर

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों का परिवहन होता है। यदि इस मार्ग पर संकट बढ़ता है तो इसका असर केवल कंडोम इंडस्ट्री ही नहीं बल्कि कई अन्य उद्योगों पर भी पड़ सकता है।



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