स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से खुशखबरी: LPG और कच्चा तेल लेकर भारत आएंगे 40 टैंकर
समझें क्या है पूरा मामला...
- होर्मुज खुला, भारत में LPG संकट होगा खत्म!
- 40 टैंकर भारत की ओर, रसोई गैस की किल्लत होगी दूर।
- ईरान-अमेरिका डील से भारत को सबसे बड़ी राहत।
- साढ़े तीन महीने बाद होर्मुज खुला, 51% गिरा था LPG आयात।
- रघुराम राजन बोले: होर्मुज संकट एक चेतावनी है भारत के लिए।
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य ( Strait of Hormuz – स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ) में फंसे करीब 40 जहाज अब भारत की ओर रवाना होंगे। इन जहाजों पर भारी मात्रा में कच्चा तेल और रसोई गैस यानी LPG (Liquefied Petroleum Gas – तरल पेट्रोलियम गैस) लदी है।
28 फरवरी को लड़ाई शुरू होने के बाद से भारत का LPG आयात युद्ध से पहले के स्तर की तुलना में करीब 51 प्रतिशत तक गिर गया था। एक्सपर्ट का कहना है कि करीब एक महीने में सप्लाई सामान्य होने लगेगी।
भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने इस संकट को एक बड़ी चेतावनी बताया है और बड़े पेट्रोलियम रिजर्व बनाने की जरूरत पर जोर दिया है।
होर्मुज में क्यों फंसे थे जहाज
28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद युद्ध छिड़ गया था। इसके चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में सैकड़ों जहाजों की आवाजाही ठप हो गई थी।
होर्मुज वही समुद्री गलियारा है जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। खाड़ी देशों से तेल, गैस और दूसरा सामान एशियाई देशों तक इसी रास्ते से पहुंचता है।
करीब साढ़े तीन महीने बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हुआ है। इसके बाद अब इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू होने की उम्मीद जगी है।
भारत को सबसे ज्यादा नुकसान LPG में
होर्मुज में रुकावट का सबसे बुरा असर भारत की रसोई गैस सप्लाई पर पड़ा। ऊर्जा विश्लेषण संस्था Kpler के सीनियर एनर्जी एनालिस्ट सुमित रितोलिया के अनुसार भारत का LPG आयात युद्ध से पहले के स्तर की तुलना में करीब 51 प्रतिशत तक गिर गया।
LPG वह ईंधन है जो करोड़ों भारतीय घरों में खाना पकाने के काम आता है। आयात में इतनी बड़ी गिरावट का मतलब था देशभर में रसोई गैस की किल्लत।
भारत कुछ हद तक कच्चा तेल मंगाता रहा, लेकिन LPG सबसे ज्यादा प्रभावित हुई। इसकी वजह यह है कि LPG का व्यापार खास तरह के टैंकरों, तय डिलीवरी और सीमित सप्लायर पर निर्भर होता है।
40 टैंकर भारत की ओर रवाना होंगे
टेलीग्राफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार होर्मुज से निकलने के लिए कई दिनों से इंतजार कर रहे करीब 40 जहाजों में LPG के साथ-साथ भारी मात्रा में कच्चा तेल भी लदा है। ये जहाज अब भारत का रुख करेंगे।
रितोलिया का कहना है कि रिकवरी की प्रक्रिया एक साथ नहीं बल्कि चरणों में होगी। LPG और LNG (Liquefied Natural Gas – तरल प्राकृतिक गैस) सबसे पहले रिकवर होने वाले ईंधन होंगे।
एक महीने में सामान्य होगी सप्लाई
रितोलिया के अनुसार अगर शांति समझौता कायम रहा तो होर्मुज से जहाजों की आवाजाही करीब एक महीने में सामान्य हो जाएगी। खाड़ी क्षेत्र के एक्सपोर्ट टर्मिनल (Export Terminal – निर्यात केंद्र) सामान्य रूप से काम करने लगेंगे।
इससे ज्यादा जहाज उपलब्ध होंगे और मध्य-पूर्व के प्रमुख सप्लायर्स से कार्गो की आपूर्ति बढ़ेगी। पहले दौर में कुकिंग गैस और LNG कार्गो का दबदबा रहेगा।
रिफाइनरी सेक्टर को भी होगा फायदा
बाजार फिर से खुलने से भारत के रिफाइनिंग सेक्टर को भी बढ़ावा मिलेगा। कच्चे तेल की बेहतर उपलब्धता, कम फ्रेट और बीमा लागत से रिफाइनरी का कामकाज बढ़ेगा। इससे डीजल, जेट फ्यूल और पेट्रोल का निर्यात भी बढ़ सकता है।
राजन की चेतावनी: बड़े रिजर्व जरूरी
भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने इस पूरे संकट को एक बड़ी सीख के रूप में देखा है। उनका कहना है कि होर्मुज में आई रुकावट यह बताती है कि सप्लाई रुकने पर दुनिया कितनी कमजोर है।
राजन का कहना है कि भविष्य में ऐसे संकट से बचने के लिए भारत को बहुत बड़े पेट्रोलियम रिजर्व की जरूरत है। उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत को भी आकस्मिक योजनाएं बनानी होंगी और साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) की दिशा में लंबे समय के बदलाव को जारी रखना होगा।
FAQ
- होर्मुज जलडमरूमध्य का भारत के लिए क्या महत्व है?
होर्मुज स्ट्रेट वह समुद्री रास्ता है जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। भारत का बड़ा हिस्सा LPG, LNG और कच्चा तेल इसी रास्ते से आयात करता है। इस रास्ते में रुकावट आने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा सीधे प्रभावित होती है। - भारत का LPG आयात कितना प्रभावित हुआ था?
Kpler के एनर्जी एनालिस्ट सुमित रितोलिया के अनुसार भारत का LPG आयात युद्ध से पहले के स्तर की तुलना में करीब 51 प्रतिशत तक गिर गया था। LPG खास टैंकरों और सीमित सप्लायर पर निर्भर होती है, इसलिए इसपर सबसे ज्यादा असर पड़ा। अब समझौते के बाद धीरे-धीरे सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद है। - होर्मुज संकट के बाद भारत को क्या सबक लेना चाहिए?
पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन का कहना है कि भारत को बड़े पेट्रोलियम रिजर्व बनाने की जरूरत है। साथ ही आकस्मिक योजनाएं तैयार करनी होंगी और नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में बदलाव जारी रखना होगा। यह संकट बताता है कि एक ही रास्ते पर निर्भरता कितनी खतरनाक हो सकती है।
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