खूबसूरती देख चंदना के प्यार में डूबे कई आशिक, डॉक्टर-पुलिस तक के उड़े लाखों, जब सच सामने आया तो रह गए हैरान...
दरअसल इस घटना में सामने वाले को लगता था कि वह किसी लड़की से बात कर रहा है। असल में उस स्क्रीन के पीछे 23 साल का एक लड़का बैठा था। उस लड़के ने फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए एक हजार से ज्यादा लोगों से संपर्क साधा। इसके बाद 82 लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनसे लाखों रुपए वसूल लिए। चलिए जानते हैं कि इस पूरे फर्जीवाड़े का खेल कैसे चलता था और पुलिस ने इसे कैसे बेनकाब किया।
फर्जी चंदना और 27 फेक अकाउंट्स का पूरा जाल
इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी 23 साल का पवन कुमार है। वह हैदराबाद के कुकटपल्ली इलाके का रहने वाला है। पवन पॉलीटेक्निक डिप्लोमा की पढ़ाई कर रहा था, लेकिन उसने अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की और वह बेरोजगार था।
पैसे कमाने के लिए उसने एक खतरनाक रास्ता चुना। उसने सोशल मीडिया पर एक काल्पनिक महिला चंदना के नाम से 13 फर्जी इंस्टाग्राम और 14 फेसबुक अकाउंट्स बनाए। इन 27 फर्जी प्रोफाइल्स के जरिए वह लोगों को मैसेज भेजता था और उनसे बातें करना शुरू करता था।
डॉक्टर से लेकर पुलिस इंस्पेक्टर तक फंसे
पुलिस की जांच में पता चला है कि पवन ने करीब एक हजार से ज्यादा लोगों से बातचीत की थी। जैसे ही कोई उसकी बातों में आता था, वह चैट को प्राइवेट और पर्सनल विषयों की तरफ ले जाता था। सामने वाले पुरुषों को लगता था कि लड़की उनसे बात कर रही है। इसलिए वे अपनी प्राइवेट तस्वीरें और वीडियो भेजने लगते थे।
इस तरह पवन ने 82 पुरुषों को पूरी तरह अपने जाल में फंसा लिया। फंसाए गए लोगों में कई बड़े पेशों से जुड़े लोग शामिल थे।
- डॉक्टर (Doctors)
- बिजनेसमैन (Businessmen)
- लेक्चरर (Lecturers)
- गिग वर्कर्स (Gig Workers)
- एक पुलिस इंस्पेक्टर (Police Inspector)
इन 82 लोगों में 24 लोग दूसरे राज्यों के थे और 9 लोग विदेशों में रहने वाले थे।
ब्लैकमेलिंग का डर और 25 लाख की उगाही
पवन शिकार से मिली प्राइवेट तस्वीरों और वीडियो को अपने मोबाइल फोन में सेव कर लेता था। इसके बाद असली खेल शुरू होता था। वह पीड़ितों को दो बड़े डर दिखाता था।
- तस्वीरों और वीडियो को परिवार या परिचितों के पास भेजने और सोशल मीडिया पर वायरल करने का डर।
- पुलिस केस में फंसाने की धमकी।
इन दोनों डरों के सामने आते ही पीड़ित घबरा जाते थे और चंदना बने पवन की पैसों की मांग पूरी करने लगते थे। डीसीपी किरण खरे के अनुसार, बीते कुछ सालों में इस रैकेट के जरिए 25 लाख रुपए से ज्यादा की उगाही की गई है।
पुलिस इंस्पेक्टर भी हनीट्रैप का शिकार
इस हनीट्रैप में एक पुलिस इंस्पेक्टर भी बुरी तरह फंस गए। आरोपी पवन ने खुद को चंदना का रिश्तेदार बताया। इसके बाद इंस्पेक्टर की शादी चंदना से कराने का भरोसा दिलाया। शादी कराने के नाम पर उसने इंस्पेक्टर से करीब 10 लाख रुपये ऐंठ लिए।
इस कहानी में एक मोड़ तब आया जब अक्टूबर की शुरुआत में उस इंस्पेक्टर को एक अलग मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। इसमें उन पर धोखाधड़ी और यौन शोषण के आरोप लगे थे। अब इंस्पेक्टर की पत्नी ने दावा किया है कि उनके पति खुद पवन के जाल में फंसे थे। पत्नी की शिकायत पर खैरताबाद पुलिस ने अलग से मामला दर्ज कर लिया है।
ऐसे हुआ मामले का पर्दाफाश
इस बड़े घोटाले की पोल तब खुली जब 22 साल के एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट ने हिम्मत दिखाकर पुलिस से शिकायत की। स्टूडेंट ने बताया कि साल 2024 से उसे ब्लैकमेल किया जा रहा था। उससे लगभग 4 लाख रुपए वसूले जा चुके थे।
छात्र की शिकायत मिलने के बाद सैदाबाद पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और तकनीकी सुरागों के आधार पर के. पवन कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। उस पर संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया है।
पुलिस के सामने उठते बड़े सवाल
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस की जांच खत्म नहीं हुई है। अब पुलिस इन सवालों के जवाब तलाश रही है...
- क्या इन सभी 27 फर्जी अकाउंट्स को अकेले पवन ही चला रहा था?
- क्या केवल 82 लोगों से ही पैसे ऐंठे गए या पीड़ितों की संख्या इससे भी ज्यादा है?
- क्या इस पूरे ब्लैकमेलिंग नेटवर्क में पवन के साथ कोई और मददगार भी शामिल था?
इस घटना से हमें क्या सबक मिलता है?
यह मामला हम सभी के लिए एक बड़ी चेतावनी है। सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय इन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
- चेहरे पर न जाएं: किसी भी प्रोफाइल फोटो या नाम को देखकर यह तय न करें कि सामने वाला इंसान सच में वही है।
- प्राइवेट बातें और मीडिया न भेजें: अगर कोई बहुत जल्दी आपसे निजी बातें करने लगे या तस्वीरें-वीडियो मांगे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
- डरें नहीं, सबूत संभालें: अगर कोई आपको ब्लैकमेल करे तो घबराकर पैसे न दें। चैट के स्क्रीनशॉट, प्रोफाइल लिंक, फोन नंबर और पैसों के लेन-देन के सारे सबूत सुरक्षित रखें।
- शिकायत करें: तुरंत अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम सेल (Cyber Crime Cell) में शिकायत दर्ज कराएं।