द क्राफ्टेड जीनियस आईएस दिव्या मित्तल ने उजागर किए अपने सीक्रेट...
समझें क्या है पूरा मामला...
- आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने हाल ही में इस्तीफा दिया है।
- इस्तीफे के बाद उन्होंने अपनी नई किताब की जानकारी साझा की।
- किताब का नाम द क्राफ्टेड जीनियस है।
- इसमें उन्होंने यूपीएससी की तैयारी के सीक्रेट्स बताए हैं।
- यह किताब अब बाजार में और ऑनलाइन उपलब्ध है।
उत्तर प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने हाल ही में अपनी सेवा से इस्तीफा दिया है। यह जानकारी उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट के जरिए दी थी। उनकी यह पोस्ट तेजी से वायरल हुई थी।
इस्तीफे के कुछ समय बाद ही दिव्या ने एक नया एलान किया है। उन्होंने अपनी तैयारी और अफसर बनने तक के सफर के राज एक किताब में खोले हैं। उन्होंने इसे अपनी सबसे ईमानदार पेशकश बताया है।
भावुक पोस्ट में क्या लिखा था
अपने 13 साल के कार्यकाल को याद करते हुए दिव्या भावुक हो गई थीं। उन्होंने लिखा था कि उन्हें सबसे ज्यादा संतोष उन कामों से मिला जिनसे आम लोगों की जिंदगी बदली। जिस परिवार को पहली बार जमीन का हक मिला वह पल उन्हें आज भी याद है।
दिव्या मित्तल ने अपने बारे में एक ईमानदार बात भी लिखी थी। उन्होंने कहा था मैं कि मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आई हूं। उनके मुताबिक असल में उन्हें ही सबसे ज्यादा मिला। लोगों का प्यार और भरोसा हर दिन उनका हौसला बढ़ाता रहा।
देवरिया और मीरजापुर की सीख
बता दें कि दिव्या ने मीरजापुर की जिलाधिकारी रहते हुए एक बड़ा काम किया था। उन्होंने पहाड़ी गांव लहुरिया दह में 75 साल पुरानी पानी की समस्या खत्म कराई। नौ महीने के अभियान के बाद हर घर तक नल से पानी पहुंचा था।
देवरिया में तैनाती के दौरान उन्होंने कब्जा मुक्ति अभियान चलाया था। उन्होंने लोगों से सीधे अपील की थी, बुलडोजर की जगह भरोसे का रास्ता चुना।
इस अभियान में लोगों ने खुद 890 से ज्यादा अतिक्रमण हटाए थे। साथ ही 200 भूमिहीन मुसहर परिवारों को जमीन का कानूनी हक भी मिला था।
IIT से IAS तक का सफर
दिव्या का बचपन एक साधारण परिवार में बीता। उन्होंने कड़ी मेहनत से आईआईटी दिल्ली से बीटेक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद आईआईएम बैंगलोर से एमबीए की डिग्री भी हासिल की। दोनों संस्थानों में उन्हें डायरेक्टर मेरिट सर्टिफिकेट मिला था।
पढ़ाई के बाद उन्हें लंदन में जेपी मॉर्गन में अच्छी नौकरी मिल गई थी। वे वहां एग्जॉटिक डेरिवेटिव्स ट्रेडर के तौर पर काम करती थीं। पर विदेश में रहते हुए भी उन्हें कुछ अधूरा सा महसूस होता रहा। अपने देश से दूर रहना उन्हें लगातार खलता रहा।
तीन बार क्रैक की परीक्षा
इसी सोच के साथ दिव्या वापस भारत लौट आईं। उन्होंने पूरी तैयारी सेल्फ स्टडी से की थी। उन्होंने लगातार तीन प्रयासों में सिविल सेवा परीक्षा पास की। पहले उन्हें आईआरएस मिली, फिर आईपीएस।
आखिर में 2012 की सिविल सेवा परीक्षा में उन्हें ऑल इंडिया रैंक 68 के साथ आईएएस मिला। ट्रेनिंग के दौरान उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें अशोक बंबावले अवॉर्ड भी मिला था। यह अवॉर्ड बैच के सबसे बेहतरीन ट्रेनी अफसर को दिया जाता है।
अब किताब में खोले सीक्रेट्स
इस्तीफे के बाद दिव्या ने अपनी नई किताब का प्रचार शुरू किया है। किताब का नाम है द क्राफ्टेड जीनियस। उनके मुताबिक सफलता किस्मत नहीं, बल्कि एक सही तरीके और रणनीति का नतीजा है। किताब लिखने में उन्हें करीब डेढ़ साल का समय लगा था।
दिव्या ने बताया था कि सेवा के दौरान कई छात्र उनसे तैयारी को लेकर सवाल पूछते थे। सबके सवाल लगभग एक जैसे होते थे, कहां से शुरुआत करें और कैसे मोटिवेटेड रहें। इन्हीं सवालों के जवाब देने के लिए उन्होंने किताब लिखने का फैसला किया।
क्या है किताब में खास
यह किताब सिर्फ नोट्स या मॉडल आंसर की किताब नहीं है। इसमें तैयारी की पूरी रणनीति बताई गई है। किताब में कुल 20 चैप्टर हैं। पहला बड़ा हिस्सा तैयारी के शुरुआती 60 दिनों पर केंद्रित है, जिसे उन्होंने लॉन्च फेज नाम दिया है।
किताब में प्रीलिम्स की एलिमिनेशन तकनीक से लेकर मेंस की आंसर राइटिंग तक की रणनीति शामिल है। एस्से और इंटरव्यू की तैयारी पर भी अलग से चर्चा की गई है।
स्कूल-कॉलेज के छात्रों के लिए भी एक खास चैप्टर लिखा गया है। इसमें तनाव प्रबंधन और मानसिक मजबूती जैसे विषय भी शामिल किए गए हैं।
कहां मिलेगी किताब
द क्राफ्टेड जीनियस अब नागीन प्रकाशन के अलावा अमेजन और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है। यह नजदीकी बुकस्टोर पर भी मिल सकती है।
दिव्या मित्तल के सोशल मीडिया पर चार लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। इस्तीफे के बाद अब वे अपने अनुभवों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में जुटी हैं।
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