IAS अफसर ने गृह मंत्रालय को दी चुनौती, हाईकोर्ट ने पलटा CAT का फैसला, AGMUT कैडर में अब कौन है असली प्राधिकरण?

Neel Tiwari | Apr 01, 2026, 21:28 IST
Photograph: (the sootr)
दिल्ली हाईकोर्ट ने IAS अफसर पद्मा जायसवाल के मामले में गृह मंत्रालय को अधिकार दिया। CAT का फैसला पलटते हुए कोर्ट ने AGMUT कैडर के लिए गृह मंत्रालय को असली प्राधिकरण माना।

News in short

  • IAS अधिकारी पद्मा जायसवाल के खिलाफ कार्रवाई पर उठा अधिकार क्षेत्र का विवाद
  • CAT ने गृह मंत्रालय की कार्रवाई को अवैध बताते हुए रद्द किया था
  • दिल्ली हाई कोर्ट ने CAT के फैसले को गलत ठहराया
  • MHA ही संयुक्त कैडर का वैध प्रतिनिधि है - HC
  • अब IAS अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही फिर से शुरू होगी

Intro

दिल्ली हाईकोर्ट ने IAS अधिकारी और गृह मंत्रालय के बीच चल रहे अधिकार क्षेत्र के विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। यह मामला सिर्फ एक अधिकारी का नहीं, बल्कि पूरे AGMUT कैडर की प्रशासनिक व्यवस्था और अनुशासनात्मक अधिकारों से जुड़ा है। कोर्ट के फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि संयुक्त कैडर में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार किसके पास है।



News in detail

IAS अफसर पर लगे थे गंभीर आरोप

2003 बैच की IAS अधिकारी पद्मा जायसवाल को फरवरी 2007 में अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले में उपायुक्त (DC) के पद पर तैनात किया गया था। अपने कार्यकाल के दौरान उनके खिलाफ स्थानीय नागरिकों और प्रशासनिक स्तर पर कई गंभीर शिकायतें सामने आईं, जिनमें सरकारी राजस्व के गबन, वित्तीय अनियमितताओं और अपने पद का दुरुपयोग करने जैसे आरोप शामिल थे। इन आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था में हलचल पैदा कर दी थी, क्योंकि मामला एक वरिष्ठ IAS अधिकारी से जुड़ा हुआ था।



इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए गृह मंत्रालय ने 15 अप्रैल 2008 को उन्हें निलंबित कर दिया और उनके खिलाफ औपचारिक अनुशासनात्मक जांच शुरू की गई। विस्तृत जांच प्रक्रिया के बाद, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) से परामर्श लिया गया, जिसकी सिफारिश के आधार पर अधिकारी को सेवा से हटाने (Removal from Service) का कठोर दंड दिया गया।





यह खबरें भी पढ़ें...



इंदौर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब- लाड़ली बहना को 1500 रुपए तो दिव्यांग को 600 क्यों



रेलवे विजिलेंस अफसरों पर FIR हाईकोर्ट ने की रद्द, रीवा IG की कार्यप्रणाली पर सवाल



CAT ने कहा था, गृह मंत्रालय के पास अधिकार नहीं

गृह मंत्रालय की इस कार्रवाई को पद्मा जायसवाल ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) में चुनौती दी। उन्होंने तर्क दिया कि जिस समय कथित घटनाएं हुईं, उस समय वह अरुणाचल प्रदेश सरकार के अधीन कार्य कर रही थीं, इसलिए अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार संबंधित राज्य सरकार के पास होना चाहिए था, न कि केंद्र के गृह मंत्रालय के पास।



CAT ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए गृह मंत्रालय की पूरी कार्रवाई को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए निरस्त कर दिया। ट्रिब्यूनल का मानना था कि MHA ने अपने अधिकारों का अतिक्रमण किया है और नियमों के अनुसार वह इस प्रकार की कार्यवाही शुरू करने के लिए सक्षम प्राधिकरण नहीं था। इस फैसले के बाद यह मामला एक बड़े संवैधानिक और प्रशासनिक विवाद का रूप ले चुका था।



हाईकोर्ट में पलटा खेल, नियमों की नई व्याख्या

इस विवाद को लेकर मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा, जहां जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिविजनल बेंच ने विस्तृत सुनवाई की। कोर्ट ने इस पूरे मामले को केवल एक व्यक्तिगत विवाद के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे संयुक्त कैडर व्यवस्था की व्याख्या से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न माना।



कोर्ट ने IAS (कैडर) नियम, 1954 और अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 का गहन विश्लेषण करते हुए कहा कि इन नियमों की व्याख्या अलग-अलग नहीं बल्कि एक साथ (Harmonious Construction) की जानी चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि AGMUT जैसे संयुक्त कैडर में “राज्य सरकार” का अर्थ किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संयुक्त कैडर प्राधिकरण (Joint Cadre Authority) को दर्शाता है, जिसका प्रतिनिधित्व गृह मंत्रालय करता है।



1989 का फैसला बना टर्निंग पॉइंट

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में वर्ष 1989 के उस महत्वपूर्ण प्रस्ताव का भी उल्लेख किया, जिसमें AGMUT कैडर के सभी घटकों अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेशों ने मिलकर गृह मंत्रालय को सतर्कता और अनुशासनात्मक मामलों को संभालने के लिए अधिकृत किया था। कोर्ट ने कहा कि यह नामांकन (Nomination) पूरी तरह से वैधानिक प्रक्रिया के तहत किया गया था और इसका उद्देश्य अलग-अलग राज्यों में फैले कैडर के लिए एक समान और प्रभावी अनुशासनात्मक प्रणाली सुनिश्चित करना था। कोर्ट ने माना कि इस तरह की व्यवस्था प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।



फेडरल स्ट्रक्चर का तर्क भी हुआ खारिज

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि गृह मंत्रालय द्वारा इस प्रकार की कार्रवाई करना भारत के संघीय ढांचे (Federal Structure) का उल्लंघन है और यह राज्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप के समान है।



हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि IAS अधिकारी अखिल भारतीय सेवा का हिस्सा होते हैं, जिन्हें संसद द्वारा बनाए गए कानूनों और नियमों के तहत नियंत्रित किया जाता है। ऐसे में संयुक्त कैडर के मामलों में केंद्र सरकार की भूमिका पूरी तरह वैधानिक और संवैधानिक है, और इसे संघीय ढांचे के खिलाफ नहीं माना जा सकता।



CAT का आदेश रद्द, कार्रवाई फिर शुरू

विस्तृत सुनवाई और कानूनी विश्लेषण के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि गृह मंत्रालय के पास AGMUT कैडर के IAS अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने का पूरा अधिकार है।



इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि पद्मा जायसवाल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही को उसी चरण से फिर से शुरू किया जाए, जहां CAT ने इसे रोका था। इसका अर्थ यह है कि अब गृह मंत्रालय द्वारा की गई पूरी प्रक्रिया को वैध माना जाएगा और आगे की कार्रवाई नियमों के अनुसार जारी रहेगी।



यह खबरें भी पढ़ें...



नई आबकारी नीति पर सरकार को राहत, हाईकोर्ट ने स्टे से किया इनकार



भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट का दखल से इनकार, मुस्लिम पक्ष को झटका, हाईकोर्ट में 2 अप्रैल को सुनवाई



AGMUT कैडर में MHA की ताकत हुई साफ

यह फैसला न केवल एक व्यक्तिगत मामले का निपटारा है, बल्कि AGMUT कैडर की प्रशासनिक संरचना और अधिकारों को लेकर लंबे समय से चली आ रही अस्पष्टता को भी समाप्त करता है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि संयुक्त कैडर के मामलों में गृह मंत्रालय केवल एक बाहरी एजेंसी नहीं, बल्कि सभी घटक राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाला वैधानिक प्राधिकरण है।



इस निर्णय के बाद भविष्य में ऐसे मामलों में अधिकार क्षेत्र को लेकर विवाद की गुंजाइश काफी हद तक समाप्त हो जाएगी और प्रशासनिक निर्णयों में एकरूपता और स्पष्टता बनी रहेगी।



Tags:
  • IAS अधिकारी
  • दिल्ली हाईकोर्ट
  • गृह मंत्रालय
  • cat
  • अखिल भारतीय सेवा
  • AGMUT कैडर