सात गोली खाने वाले अफसर का इस्तीफा, जानें कौन हैं आईएएस रिंकू सिंह राही
News In Short
- उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस रिंकू सिंह राही ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
- उनका कहना है कि लंबे समय से कोई ठोस जिम्मेदारी नहीं मिल रही थी।
- वे राजस्व परिषद में अटैच रहकर सक्रिय रूप से काम नहीं कर पा रहे थे।
- अलीगढ़ के आटा चक्की वाले के बेटे ने 2021 में 683वीं रैंक से IAS पाया था।
- 2009 में घोटाला उजागर करने पर उन पर सात गोलियां चलाई गई थीं।
News In Detail
IAS का इस्तीफा, वजह है अनोखी
उत्तर प्रदेश कैडर के 2022 बैच के आईएएस (IAS - Indian Administrative Service) अधिकारी रिंकू सिंह राही ने अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। आमतौर पर आईएएस छोड़ने की बात नहीं सुनी जाती। लेकिन रिंकू सिंह का कहना है कि वेतन मिल रहा था, काम नहीं मिल रहा था।
उनका साफ कहना था कि जनसेवा के लिए इस सेवा में आए थे। यदि जनसेवा का मौका ही नहीं मिलेगा तो इस पद का क्या फायदा। यही सोचकर उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया।
काम नहीं मिला तो छोड़ दी कुर्सी
आईएएस रिंकू सिंह राही लंबे समय से राजस्व परिषद में अटैच थे। वहां कोई ठोस जिम्मेदारी नहीं थी। न कोई पोस्टिंग मिल रही थी, न कोई काम। उन्होंने खुद कहा कि वे सक्रिय रूप से काम नहीं कर पा रहे थे।
एक ऐसे अफसर के लिए जिसने जिंदगी दांव पर लगाकर सरकारी सेवा में आने का सपना पूरा किया हो, यह बेकार बैठना असहनीय था। यही कारण बना उनके इस्तीफे का।
आटा चक्की से IAS तक का सफर
रिंकू सिंह राही की कहानी संघर्ष और हौसले की मिसाल है। वे उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के रहने वाले हैं। उनके पिता आटा चक्की चलाते थे। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की। छात्रवृत्ति की मदद से आगे बढ़े और इंजीनियरिंग की डिग्री ली।
साल 2008 में उन्होंने पीसीएस (PCS - Provincial Civil Service) परीक्षा पास की और प्रशासनिक सेवा में पहली बार दाखिल हुए। हापुड़ में तैनाती के दौरान उन्हें आईएएस-पीसीएस कोचिंग केंद्र का निदेशक बनाया गया था। वहां वे छात्रों को पढ़ाते और मार्गदर्शन भी देते थे।
उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और यूपीएससी (UPSC - Union Public Service Commission) की परीक्षा फिर दी थी। 2021 में 683वीं रैंक हासिल कर वे आईएएस बन गए थे। यह सफर बताता है कि इरादा पक्का हो तो मुश्किलें रास्ता नहीं रोक सकतीं।
7 गोलियां खाईं, फिर भी नहीं रुके
रिंकू सिंह राही का नाम एक और घटना के लिए भी जाना जाता है। साल 2009 में वे मुजफ्फरनगर में समाज कल्याण अधिकारी थे। उस दौरान उन्होंने करोड़ों रुपए के एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया था।
घोटाले से जुड़े लोगों को यह नागवार गुजरा और उन पर जानलेवा हमला हो गया था। उन्हें सात गोलियां मारी गईं थी। इस हमले से उनका चेहरा बुरी तरह प्रभावित हुआ था। वहीं, रिंकू सिंह ने हार नहीं मानी। अलग-अलग जिलों में तबादलों के बावजूद वे पूरी निष्ठा से काम करते रहे।
उठक-बैठक वाला वायरल वीडियो
आईएएस रिंकू सिंह राही एक और वजह से चर्चा में आए थे। शाहजहांपुर में पुवायां तहसील के एसडीएम (SDM - Sub Divisional Magistrate) रहते हुए उन्होंने निरीक्षण के दौरान एक व्यक्ति को शौचालय के बाहर गंदगी फैलाते देखा था। दंड के तौर पर उन्होंने उठक-बैठक करवाई थी।
इस बात से नाराज वकीलों ने विरोध शुरू कर दिया था। राही खुद उनके बीच पहुंचे थे। उन्होंने माफी मांगी और सार्वजनिक रूप से खुद उठक-बैठक की थी। उन्होंने यह संदेश दिया कि नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं। यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ और लोगों ने उनकी तारीफ की थी।
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