शौक से न खाएं, ICMR की रिसर्च में एंटीबायोटिक से मौत का आंकड़ा आपको हैरान कर देगा
समझें क्या है पूरा मामला...
- ICMR की स्टडीमें दवा प्रतिरोधीसंक्रमण को खतरनाकबताया गया है।
- 20 बड़ेअस्पतालों में एक लाख 60 हजारमरीजों पर स्टडी हुई।
- 61.1 प्रतिशत संक्रमणकार्बापेनमएंटीबायोटिक केप्रतिरोधी मिले।
- इनसंक्रमण से मौत औरइलाज खर्च दोनोंज्यादा पाए गए।
- डॉक्टरों ने सहीएंटीबायोटिक इस्तेमालपर जोर दिया है।
बड़े अस्पतालों में हुई स्टडी
भारतीयआयुर्विज्ञान अनुसंधानपरिषद यानी ICMR(Indian Council of Medical Research) नेएक बड़ी स्टडी की है।इस स्टडी में देश के20 बड़े अस्पताल शामिलकिए गए। स्टडी अप्रैल2022 से अप्रैल 2025के बीच हुई।
इस दौरानकरीब एक लाख 60 हजार भर्तीमरीजों का डेटा जुटायागया। इसमें मुंबई केमहिम स्थित हिंदुजाअस्पताल के मरीज भीशामिल थे। यह स्टडी दलांसेट रीजनल हेल्थसाउथईस्ट एशिया नाम कीमेडिकल पत्रिका मेंछपी है।
चार बैक्टीरिया पर हुआ फोकस
स्टडी में कुल26 हजार 213 मरीजों मेंगंभीर संक्रमण पाए गए।ये संक्रमण चार प्रमुखग्राम-निगेटिवबैक्टीरिया से जुड़ेथे। इनमें ई कोली,क्लेब्सिएला निमोनिया,एसिनेटोबैक्टर बॉमानीऔर स्यूडोमोनासएरुगिनोसा शामिल हैं।स्टडी में सामने आयाकि इनमें से 61.1प्रतिशत संक्रमणकार्बापेनमएंटीबायोटिक केप्रतिरोधी थे।
कार्बापेनम को कुछ सालपहले तक गंभीर संक्रमणके इलाज की आखिरी दवामाना जाता था। लेकिनअब इसका इस्तेमाल पहलेसे कहीं ज्यादा बढ़गया है। यही वजह है किबैक्टीरिया इस दवा केखिलाफ प्रतिरोधी बनतेजा रहे हैं।
एक्सपर्ट का क्या कहना है
ICMRकी वरिष्ठ वैज्ञानिकऔर स्टडी की लेखिकाडॉ. कामिनी वालिया नेइस पर चिंता जताई है।उन्होंने कहा किएंटीमाइक्रोबियलरेजिस्टेंस अब दूर काखतरा नहीं रहा। यहपहले से ही भारतीयलोगों की जान ले रहाहै।
डॉ. वालिया नेबताया कि स्टडी मेंसाफ दिखा है किकार्बापेनम प्रतिरोधीसंक्रमण में मौत औरइलाज खर्च दोनों काफीज्यादा हैं। उन्होंनेकहा कि इसका हल सिर्फज्यादा ताकतवरएंटीबायोटिक बनानानहीं है। असली जरूरतबेहतर संक्रमण बचाव,समय पर जांच और सहीएंटीबायोटिक इस्तेमालकी है।
एंटीबायोटिक से मौत के आंकड़े क्या कहते हैं
स्टडीमें प्रतिरोधी औरसामान्य संक्रमण वालेमरीजों की मौत दर कीतुलना की गई।क्लेब्सिएला निमोनियाके प्रतिरोधी मामलोंमें मौत दर 31.2प्रतिशत रही। वहींसामान्य मामलों में यहदर 23.5 प्रतिशत थी। ईकोली में यह आंकड़ा24.4 प्रतिशत और 17.3प्रतिशत रहा।
एसिनेटोबैक्टर बॉमानीमें मौत दर 37.9प्रतिशत और 32.8प्रतिशत पाई गई।स्यूडोमोनास एरुगिनोसामें यह आंकड़ा 28.9प्रतिशत और 20.2प्रतिशत रहा। यानी हरमामले में प्रतिरोधीसंक्रमण ज्यादाजानलेवा साबित हुए।
इलाज पर भी आया ज्यादा खर्च
दवा प्रतिरोधीसंक्रमण के इलाज परमरीजों को ज्यादा पैसेखर्च करने पड़े हैं। स्टडीके मुताबिक इलाज काखर्च सामान्य मामलोंसे 1.1 से दो गुनाज्यादा रहा। प्रतिरोधीई कोली के इलाज परऔसतन 420 डॉलर खर्चहुए। वहीं सामान्यमामलों में यह खर्च211 डॉलर था।
क्लेब्सिएला निमोनियामें यह खर्च 587 डॉलरऔर 505 डॉलर रहा।एसिनेटोबैक्टर बॉमानीमें यह आंकड़ा 655डॉलर और 436 डॉलर रहा।स्यूडोमोनास एरुगिनोसामें खर्च 702 डॉलर और510 डॉलर पाया गया।
इसके अलावा प्रतिरोधीसंक्रमण वाले मरीजोंको अस्पताल में भीज्यादा दिन रुकनापड़ा। ई कोली से जुड़ेप्रतिरोधी मामलों मेंमरीज औसतन 23.1 दिनभर्ती रहे। जबकिसामान्य मामलों में यहअवधि 17.8 दिन थी।
मुंबई के डॉक्टरों की राय
एच एन रिलायंसअस्पताल के क्रिटिकलकेयर विशेषज्ञ डॉ.राहुल पंडित ने भी इसपर अपनी राय रखी।उन्होंने बताया किमुंबई के अस्पतालोंमें कार्बापेनमप्रतिरोधी मरीजों कीसंख्या लगातार बढ़ रहीहै। डॉ. पंडित ने कहाकि प्रतिरोधी संक्रमणके इलाज में ज्यादासमय लगता है। संक्रमणकी पहचान और उसकाप्रतिरोध पैटर्न जाननेमें कई दिन लग जातेहैं।
हालांकिमॉलिक्यूलरडायग्नोस्टिक्स की मददसे यह प्रक्रिया अबतेज हो सकती है।उन्होंने यह भी बतायाकि ऐसे मरीजों कोअक्सर एक साथ कईएंटीबायोटिक देनेपड़ते हैं। इससे इलाजका खर्च और भी बढ़जाता है।
डॉ. पंडित नेकहा कि अब होम केयरसेवाएं भी उपलब्ध हैं।कुछ मरीजों को नर्सिंगनिगरानी में घर पर हीइंजेक्शन वालीएंटीबायोटिक दी जासकती है। इससे उन्हेंलंबे समय तक अस्पतालमें रहने की जरूरतनहीं पड़ती।
आगे क्या सावधानी जरूरी है
स्टडी करने वालेशोधकर्ताओं ने एकजरूरी बात भी साफ कीहै। यह स्टडी बड़ेअस्पतालों में हुई है,जहां ज्यादातर गंभीरऔर रेफर किए गए मरीजआते हैं। इसलिए इसेकिसी एक अस्पताल केप्रदर्शन का पैमानानहीं माना जाना चाहिए।शोधकर्ताओं ने कहा किइन नतीजों से एक बातसाफ हो जाती है।
देशमें एंटीमाइक्रोबियलरेजिस्टेंस की निगरानीऔर मजबूत करने कीजरूरत है। इसके साथ हीसंक्रमण नियंत्रण केउपाय भी बढ़ाने होंगे।एंटीबायोटिक के सहीइस्तेमाल पर सख्ती सेध्यान देना होगा। साथही मरीजों को सही समयपर असरदार दवाएं मिलनाभी जरूरी है।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर हरनागरिक केस्वास्थ्य से सीधेजुड़ी है, इसलिए इसेजानना जरूरी है। दवाप्रतिरोधी संक्रमण काबढ़ना पूरे स्वास्थ्यतंत्र के लिए बड़ाखतरा है। संविधान हरव्यक्ति को स्वास्थ्यसुरक्षा का अधिकारदेता है, इसलिए ऐसीजानकारी जनता तकपहुंचना जरूरी मानाजाता है।
यह खबर लोगोंको बिना जरूरतएंटीबायोटिक न लेने औरडॉक्टर की सलाह माननेके लिए जागरूक करतीहै। साथ ही यह सरकारऔर अस्पतालों कीजिम्मेदारी को भीसामने लाती है किसंक्रमण रोकथाम पर कामहो। सही जानकारी सेलोग समय पर इलाज औरबचाव के फैसले ले सकतेहैं।