बदल गई मिडिल क्लास की सोच, सेविंग्स के बजाय लोन लेकर बदल रहे लाइफस्टाइल
Income Hike Loan Trend: हम हमेशा सोचते हैं कि लोग पैसे की कमी होने पर ही लोन लेते हैं। लेकिन हाल ही में आई एक स्टडी ने इस बात को गलत साबित कर दिया है। देशभर के 1.5 लाख से ज्यादा परिवारों पर पूरे 10 साल तक रिसर्च की गई। इस रिसर्च का रिजल्ट वाकई बहुत हैरान करने वाले और आंखें खोलने वाले हैं।
इस स्टडी के मुताबिक, पहली बार कर्ज लेने वाला हर दूसरा परिवार आर्थिक रूप से मजबूत था। इन परिवारों ने अपनी आमदनी बढ़ने के बाद ही बैंक से लोन लिया। मुंबई के थिंक टैंक एक्सकेडीआर (XKDR) की गीतिका पाल्टा और सुजैन थॉमस ने ये रिसर्च की।
इसमें नई दिल्ली के ट्रस्टब्रिज की रेणुका साने भी शामिल थीं। उनकी रिसर्च में पाया गया कि पहली बार लोन लेने वाले 50% परिवारों की आय बढ़ी थी। इन सभी परिवारों की आमदनी में पिछले एक साल में बड़ा उछाल आया था।
घर और गाड़ी के लिए नई प्लानिंग
जब किसी व्यक्ति की सैलरी या आमदनी (Income) बढ़ती है, तो उसका आत्मविश्वास भी बहुत बढ़ जाता है। वे अपने परिवार के सुरक्षित भविष्य को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हो जाता है।
इसके बाद लोग घर, गाड़ी या बच्चों की पढ़ाई के लिए नए सिरे से प्लानिंग करते हैं। कुछ लोग अपना नया बिजनेस शुरू करने के लिए भी बड़ा खर्च करने की सोचते हैं।
आज के समय में लोग किसी बड़ी चीज के लिए सालों तक बचत नहीं करना चाहते। बचत का इंतजार करने के बजाय लोन लेकर खर्च करना अब बहुत आसान विकल्प बन गया है।
रिसर्चर सुजैन थॉमस कहती हैं कि कर्ज (पर्सनल लोन) लेना केवल किसी बड़े आर्थिक संकट का समाधान नहीं है। ये कभी-कभी भविष्य की पक्की आमदनी पर भरोसे का फैसला भी होता है।
लोग यह मान लेते हैं कि भविष्य (Bank loans) में भी उनकी कमाई इसी तरह लगातार बढ़ती रहेगी। इसी भरोसे के कारण वे वर्तमान में बड़ा लोन लेने से बिल्कुल नहीं डरते।
कम शिक्षा और बचत से लोन का रिस्क
थिंक टैंक 'एडीआर' की रिपोर्ट रिसर्च में एक और बहुत ही दिलचस्प पहलू सामने आया है। शिक्षा और बचत का स्तर कम होने पर लोन लेने की आशंका बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। आंकड़ों के मुताबिक जिन परिवारों की औसत मासिक आय 26 हजार 190 रुपए है, वे लोन ज्यादा लेते हैं।
इसके अपोजिट 35 हजार 160 रुपए इनकम वाले लोग पहला लोन लेने से बचते हैं। कम इनकम वाले परिवारों की कमाई में 51.9% तक का बड़ा उतार-चढ़ाव देखा गया है। वहीं लोन न लेने वाले परिवारों में यह उतार-चढ़ाव केवल 36% ही था।
लोन लेने वाले परिवारों का औसत आकार बड़ा होता है, जिसमें आमतौर पर 5 सदस्य होते हैं। इन परिवारों में कामकाजी यानी कमाने वाले सदस्यों की संख्या 28.3% होती है।
वहीं जिन परिवारों में ग्रेजुएट और हाइली एडुकेटेड मेंबर होते हैं, वहां लोन कम लिया जाता है। लोन लेने वाले परिवारों में एडुकेटेड मेंबर्स का ग्राफ केवल 27.5% ही पाया गया है।
अर्बन एरिया के परिवारों का हाल
शहरी इलाकों में रहने वाले परिवारों में भी लोन लेने की प्रवृत्ति बहुत अधिक देखी गई है। आंकड़ों के मुताबिक, लोन लेने वाले परिवारों में 34% परिवार शहरी क्षेत्रों से आते हैं।
इसके अपोजिट लोन न लेने वाले परिवारों में अर्बन एरिया का हिस्सा केवल 26.4% है। इससे साफ है कि शहरों में रहने वाले लोग लोन को ज्यादा अपना रहे हैं। अगर संपत्ति और बचत स्कोर की बात करें तो लोन लेने वालों का स्कोर 0.35 है।
वहीं लोन न लेने वाले परिवारों का संपत्ति स्कोर 0.42 दर्ज किया गया है। ये स्कोर बताता है कि जिनके पास पहले से अच्छी बचत है, वे कर्ज से दूर रहते हैं। कम बचत वाले लोग अपनी जरूरतों के लिए लोन पर ज्यादा निर्भर होते हैं।
कुल मिलाकर यह स्टडी बताती है कि भारतीय परिवारों की सोच अब तेजी से बदल रही है। अब लोन लेना मजबूरी नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल को बेहतर बनाने का जरिया बन चुका है।
References:
- थिक टैंक एक्सकेडीआर (XKDR),
- मुंबई (रिसर्चर: गीतिका पाल्टा और सुजैन थॉमस)
- ट्रस्टब्रिज, नई दिल्ली (रिसर्चर: रेणुका साने)
FAQ
- लोग आमदनी बढ़ने के बाद लोन क्यों ले रहे हैं?
आमदनी बढ़ने पर लोग अपने भविष्य और कमाई को लेकर आश्वस्त हो जाते हैं। वे बचत का लंबा इंतजार करने के बजाय घर, गाड़ी या बिजनेस के लिए तुरंत लोन लेकर खर्च करना ज्यादा आसान और बेहतर विकल्प मानते हैं। - कम पढ़े-लिखे परिवारों में लोन लेने की प्रवृत्ति ज्यादा क्यों है?
रिसर्च के मुताबिक कम शिक्षित परिवारों में फाइनेंशियल प्लानिंग और संपत्ति का स्कोर कम होता है। साथ ही बड़े परिवार और आय में अधिक उतार-चढ़ाव के कारण ये परिवार अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए लोन पर ज्यादा निर्भर रहते हैं। - इस नए लोन ट्रेंड पर एक्सपर्ट्स की क्या राय है?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक लोन अब सिर्फ आर्थिक संकट का हल नहीं है। यह भविष्य की आय पर भरोसे को दिखाता है। हालांकि, कम बचत और बड़ी ईएमआई के कारण भविष्य में वित्तीय जोखिम बढ़ने का खतरा भी बना रहता है।
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