बफैलो मीट एक्सपोर्ट में भारत का दबदबा, 5.1 अरब डॉलर पार हुआ निर्यात
भारत का कृषि निर्यात आज एक नई ऐतिहासिक ऊंचाई को छू रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में बफैलो मीट एक्सपोर्ट में भारी उछाल दर्ज हुआ। इस साल भारत का कुल बफैलो मीट एक्सपोर्ट 5.1 अरब डॉलर पहुंचा। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह रफ्तार और तेज हो गई।
अप्रैल से जून के बीच निर्यात का आंकड़ा रिकॉर्ड स्तर पर रहा। इस तिमाही में भारत ने लगभग 1.5 अरब डॉलर का कारोबार किया। पिछले साल के मुकाबले इस बार 66.6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई। वाणिज्य मंत्रालय को इस साल 6 अरब डॉलर से ज्यादा की उम्मीद है।
भारतीय मीट को अब ग्लोबल मार्केट में मिली बेहतर कीमत
यह तेजी सिर्फ मीट की मात्रा बढ़ने की वजह से नहीं आई। भारतीय एक्सपोर्टर्स को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अब प्रति टन बेहतर कीमत मिल रही है। साल 2014-15 में औसतन 3,240 डॉलर प्रति टन की कीमत मिली थी। इसके बाद कुछ सालों तक कीमतों में काफी बड़ी गिरावट देखी गई।
लेकिन 2025-26 में कीमत बढ़कर 3,591 डॉलर प्रति टन पहुंच गई। इस साल पहली तिमाही में यह कीमत 4,392 डॉलर प्रति टन रही। ब्राजील के बीफ और भारतीय मीट का अंतर अब काफी कम हो गया। यह बदलाव भारत की ग्लोबल साख और ब्रांड वैल्यू को दिखाता है।
सख्त क्वालिटी और सुरक्षा मानकों से दुनिया का बढ़ा भरोसा
विश्व बाजार में बेहतर दाम मिलने की एक बड़ी खास वजह है। सरकार केवल एपीडा से पंजीकृत प्लांट्स को ही निर्यात की अनुमति देती है। ये प्लांट्स साफ-सफाई और सुरक्षा के कड़े मानकों का पालन करते हैं। अधिकारी इन बूचड़खानों का समय-समय पर अचानक निरीक्षण भी करते हैं। देश में करीब 83 एकीकृत बूचड़खाने-सह-मांस प्रसंस्करण प्लांट काम कर रहे हैं। इनके पास रोजाना हजारों बड़े पशुओं को संभालने की मजबूत क्षमता है। सुरक्षा मानकों के कारण विदेशी खरीदारों का भरोसा भारत पर लगातार बढ़ा है।
मीट एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फंड से कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार
एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए एपीडा ने नया कदम उठाया है। अब फ्रोजन बफैलो मीट पर 250 रुपये प्रति टन शुल्क लगेगा। इस शुल्क से मीट एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फंड का निर्माण किया जाएगा।
यह फंड बासमती चावल के लिए बने पुराने फंड की तरह चलेगा। इस पैसे से नए विदेशी बाजारों की पहचान और प्रचार किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय मेलों में हिस्सा लेने के लिए व्यापार प्रतिनिधिमंडल विदेश जाएंगे। कारोबार में आने वाली गैर-टैरिफ बाधाओं को जल्द दूर किया जाएगा।
वियतनाम से लेकर खाड़ी देशों तक फैला भारत का बाजार
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने व्यापारिक साझेदारों को बदला है। पहले भारत का ज्यादातर एक्सपोर्ट केवल वियतनाम देश पर निर्भर रहता था। अब 10 से ज्यादा देश 10 करोड़ डॉलर से अधिक का माल खरीद रहे हैं। मिस्र, मलेशिया, यूएई और सऊदी अरब भारत के बड़े खरीदार बने हैं। रूस, उज्बेकिस्तान और ओमान जैसे देशों में भी मांग काफी बढ़ी है। विदेशी बाजारों का यह विस्तार भारतीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रहा है।
डेयरी किसानों की जेब में जा रहा है इस व्यापार का फायदा
बफैलो मीट एक्सपोर्ट का फायदा सीधे देश के पशुपालकों तक पहुंच रहा है। भारत में कानून के तहत गाय का मांस निर्यात करने की अनुमति नहीं है। दूध न देने वाली या बांझ भैंसों को किसान आसानी से बेच पाते हैं। बिना दूध देने वाले मवेशियों को पालना किसानों के लिए महंगा पड़ता है। चारा, पानी और मजदूरी का खर्च किसान की जेब पर भारी पड़ता है। मीट इंडस्ट्री ऐसे कम उत्पादक पशुओं के लिए सही बाजार देती है। इससे मिलने वाले पैसे से किसान नए दुधारू पशु आसानी से खरीदते हैं।
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