भारत सरकार ने डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क बढ़ाया, घरेलू आपूर्ति पर ध्यान

Sanjay Dhiman | Apr 12, 2026, 12:41 IST
Photograph: (the sootr)
भारत सरकार ने डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क बढ़ा दिया है। इससे घरेलू बाजार में आपूर्ति पर असर नहीं होगा। रिलायंस और निजी रिफाइनरी पर असर पड़ेगा।

भारत सरकार ने हाल ही में डीजल और एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) पर निर्यात शुल्क बढ़ाने का फैसला किया है। यह कदम वैश्विक ऊर्जा संकट और घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू बाजार में ईंधन की आपूर्ति बनी रहे, खासकर जब वैश्विक बाजार में आपूर्ति प्रभावित हो रही हो।



निर्यात शुल्क में वृद्धि

अब डीजल पर निर्यात शुल्क 21.5 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 55.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि एटीएफ पर शुल्क को 29.5 रुपए से बढ़ाकर 42 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है। पेट्रोल पर किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं बढ़ाया गया है, ताकि इसके निर्यात में कोई रुकावट न आए।



यह निर्णय सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों को घरेलू बाजार में ईंधन की प्राथमिकता देने के लिए लिया है। सरकार नहीं चाहती कि कंपनियां निर्यात बढ़ाकर घरेलू बाजार में ईंधन की कमी कर दें।



क्या है इसका उद्देश्य?

सरकार का यह कदम घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से है। वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिमी विवादों के कारण, तेल उत्पादों की आपूर्ति पर प्रभाव पड़ा है। सरकार चाहती है कि पेट्रोलियम कंपनियां विदेशों में उत्पाद भेजने के बजाय भारत में ईंधन की आपूर्ति करें। इस कदम से रिलायंस जैसी कंपनियों पर प्रभाव पड़ेगा, जो बड़े पैमाने पर पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करती हैं।



रिलायंस इंडस्ट्रीज पर प्रभाव

भारत के इस निर्णय से रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी बड़ी कंपनियों पर असर पड़ेगा। डीजल निर्यात की लागत बढ़ने से कंपनी को घरेलू बाजार में अधिक उत्पाद बेचना पड़ेगा। इस वजह से कंपनी को निर्यात पर होने वाले मुनाफे में कमी आ सकती है। इसके अलावा, इससे कंपनियां घरेलू बाजार में अधिक उत्पाद भेजने के लिए मजबूर हो सकती हैं।



ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए कदम

भारत सरकार का यह कदम संकेत देता है कि देश अपनी घरेलू ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कदम उठा रहा है। पश्चिम एशियाई देशों से आने वाला कच्चा तेल भारत की ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में, यह निर्णय घरेलू बाजार में तेल की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।



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