युद्ध के बीच भारत में LPG, तेल और खाद की कितनी कमी? सरकार ने किया क्लियर
समझें क्या है पूरा मामला...
- मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत में ईंधन और खाद की किल्लत पर चर्चा छिड़ गई है।
- इस बीच मंत्रियों ने कच्चे तेल, एलपीजी और गैस के स्टॉक का पूरा सच रख दिया है।
- घरेलू उत्पादन के को लेकर सरकार ने देशवासियों को बड़ी जानकारी दी है।
- वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई को लेकर भी स्थिति साफ हो गई है।
- साथ ही खेती के सीजन में यूरिया और डीएपी को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला सुनाया है।
पश्चिम एशिया में युद्ध के संकट ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। भारत में भी इस बात को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे कि, क्या आने वाले दिनों में हमें पेट्रोल-डीजल की लाइनों में लगना पड़ेगा?
क्या देश में रसोई गैस सिलेंडरों की कमी हो जाएगी और खेतों के लिए जरूरी खाद मिलना बंद हो जाएगी? इन सभी सवालों और आशंकाओं के बीच अब खुद केंद्र सरकार सामने आई है। सरकार ने देश के स्टॉक की असली स्थिति को पूरी तरह क्लियर कर दिया है।
क्या खत्म होने वाला है कच्चा तेल?
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर एक राहत देने वाली जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि तनाव का भारत पर असर नहीं पड़ेगा।
क्योंकि देश के पास 60 दिनों से भी अधिक की खपत के लिए कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस का सुरक्षित स्टॉक मौजूद है।
एलपीजी पर कितनी मजबूत है सरकार?
रसोई गैस की कमी की अफवाहों पर सरकार ने विराम लगा दिया है। बता दें कि भारत ने घरेलू स्तर पर एलपीजी का उत्पादन तेजी से बढ़ाया है। इससे अब भारत बाहरी देशों से गैस आयात करने पर ज्यादा निर्भर नहीं हैं।
देश में एलपीजी की मौजूदा ताकत को आप इस डेटा बॉक्स से समझ सकते हैं।
| विवरण | पहले का आंकड़ा | अब का नया आंकड़ा |
| घरेलू एलपीजी उत्पादन | 32 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन | 54 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन |
| सुरक्षित एलपीजी स्टॉक | - | 75 से 80 दिनों का |
दुनिया में बढ़े दाम, तो भारत में क्या असर?
जब पूरी दुनिया में तेल के दाम आसमान छू रहे थे, तब भारत ने अपनी जनता को महंगाई से बचाने के लिए बड़ा कदम उठाया। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरीके अनुसार मई 2022 से मई 2026 के बीच वैश्विक स्तर पर कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई। इसके बावजूद भारत में पेट्रोल के दामों में 3.1% की गिरावट दर्ज की गई है।
जनता को यह राहत देने के लिए सरकार ने अपनी एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की बड़ी कटौती की थी।इससे सरकारी खजाने पर एक लाख करोड़ रुपए का सीधा बोझ आया।
इसके साथ ही सरकार भविष्य के लिए वैकल्पिक ईंधन पर भी काम कर रही है।
- दिसंबर 2026 तक: देश में ई85 (E85) ईंधन पंपों की संख्या को बढ़ाकर 500 किया जाएगा।
- दिसंबर 2027 तक: इस नेटवर्क को पांच हजार पंपों तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
किसानों के लिए खाद की क्या स्थिति है?
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को खादों की उपलब्धता पर पूरी तरह आश्वस्त किया है। उन्होंने साफ कहा कि चालू खरीफ सीजन के लिए देश में खाद का पर्याप्त भंडार है। आने वाले रबी सीजन के लिए भी एडवांस में सारे इंतजाम कर लिए गए हैं।
दामों पर बड़ा फैसला
मंत्री शिवराज ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया और डीएपी की बढ़ती कीमतों का बोझ भारत के किसानों पर नहीं डाला जाएगा। किसानों को ये दोनों मुख्य खादें पुरानी रियायती दरों पर ही मिलती रहेंगी। बढ़े हुए दामों का पूरा खर्च सरकार खुद उठाएगी।
इसके अलावा अल नीनो (El Nino) के खतरों से निपटने के लिए भी कृषि मंत्रालय ने तैयारी कर ली है। साथ ही देश में जैविक व प्राकृतिक खेती को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है।
पेट्रोल- डीजल बिक्री के नियमों में बदलाव
बता दें कि देश के कई हिस्सों में पेट्रोल और डीजल की मांग अचानक बहुत तेजी से बढ़ गई थी। इस वजह से पेट्रोल पंपों पर तेल की कमी होने का खतरा मंडराने लगा था।
स्थिति को संभालने के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लिया। सरकार ने मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल आदेश 2026 जारी किया है।
इस नए आदेश के तहत तेल कंपनियों और पेट्रोल पंप मालिकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। बड़े और थोक ग्राहकों को रिटेल आउटलेट से ईंधन नंही बेचने को कहा गया है। सरकार का यह प्रतिबंध एक बार में 90 दिनों तक लागू रहेगा।
क्यों पैदा हुई ऐसी स्थिति?
मिडिल ईस्ट में चल रहे संकट की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की लागत काफी बढ़ गई है। सरकार ने आम जनता को महंगाई से बचाने के लिए पेट्रोल पंपों पर खुदरा कीमतें नहीं बढ़ाईं, लेकिन थोक कीमतें बढ़ गईं। इसका नतीजा यह हुआ कि दोनों कीमतों में एक बहुत बड़ा अंतर आ गया।
उदाहरण से समझिए कि दोनों कीमतों में कितना अंतर है।
| ईंधन का प्रकार | खुदरा कीमत | थोक कीमत | कीमतों में अंतर |
| डीजल (प्रति लीटर) | 95.20 रुपए | 134.50 रुपए | 39.30 रुपए |
इस भारी अंतर की वजह से बड़े उद्योग और संस्थागत उपभोक्ता महंगे बल्क सेल पॉइंट से तेल खरीदने के बजाय सीधे आम पेट्रोल पंपों पर पहुंचने लगे। इससे रिटेल मार्केट में डीजल की बिक्री असामान्य रूप से बढ़ गई। साथ ही सप्लाई चेन बिगड़ने का डर पैदा हो गया। इसी को रोकने के लिए सरकार को यह कदम उठाना पड़ा।
आम जनता और वाहनों के लिए खरीद सीमा
सरकार ने इस आदेश में केवल बड़े खरीदारों पर रोक ही नहीं लगाई है, बल्कि पेट्रोल पंपों से तेल बेचने के तरीकों को भी पूरी तरह तय कर दिया है।
अब खुदरा दुकानों या पेट्रोल पंपों पर डीजल केवल वाहनों के असली ईंधन टैंक में भरा जाएगा। इसके अलावा पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन द्वारा मंजूर किए गए खास कंटेनरों में ही भरा जाएगा।
कोई भी ग्राहक या वाहन एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही खरीद सकता है। इससे ज्यादा तेल एक बार में नहीं दिया जाएगा।
पेट्रोल पंप से खरीदे गए डीजल को कोई भी व्यक्ति दोबारा किसी और को नहीं बेच सकेगा।
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