मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच भारत की बड़ी जीत, रूस से आया तेल और अमेरिका से पहुंची गैस
दुनिया भर में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं लेकिन भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने में कामयाब रहा है। रविवार 22 मार्च की सुबह भारतीय बंदरगाहों पर दो विशाल जहाजों ने दस्तक दी। एक तरफ रूस का कच्चा तेल है और दूसरी तरफ अमेरिकी गैस।
एक्वा टाइटन जहाज और पिक्सिस पायोनियर
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के चलते भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। वहीं अब इसके असर जमीनी स्तर पर नजर आने लगे हैं। इसी बीच रविवार सुबह एक्वा टाइटन जहाज रूस से कच्चा तेल लेकर कर्नाटक के मंगलुरु बंदरगाह पहुंच गया है।
साथ ही अमेरिका से एलपीजी लेकर निकला पिक्सिस पायोनियर जहाज भा भारत पहुंच गया है। इसका फायदा ये होगा कि घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।
चीन जा रहा था जहाज
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ये तेल से भरा जहाज पहले चीन जा रहा था। दरअसल अमेरिका ने समुद्र में फंसे रूसी तेल को बेचने के लिए अस्थायी लाइसेंस जारी किया था। इसके बाद इस जहाज का रास्ता बदलकर दक्षिण चीन सागर से होते हुए भारत की ओर मोड़ दिया था।
इस जहाज का नाम अक्वा टाइटन है। यह शनिवार-रविवार की रात कर्नाटक के मंगलुरु पोर्ट पहुंचा है। अब यह जहाज समुद्र में लंगर डालकर खड़ा है। यहां से तेल पाइपलाइनों के जरिए रिफाइनरी तक पहुंचाया जाएगा।
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष, भारत को फायदा
जानकारी के अनुसार कच्चे तेल को जहाज से रिफाइनरी तक लाने के लिए समुद्र में बिछी पाइपलाइनों का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे समय की बचत होगी। साथ ही तेल के ट्रांसपोर्ट के दौरान होने वाले खतरे भी कम होंगे। अब घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कमी का खतरा काफी हद तक कम हो गया है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्षों के बीच अमेरिका ने रूस से कच्चे तेल के आयात को लेकर थोड़ी नरमी दिखाई है। इसका सीधा फायदा भारत को हुआ है।
भारत की रणनीतिक जीत
रविवार सुबह अमेरिका के टेक्सास से लोड होकर जहाज पिक्सिस पायोनियर भारत के मंगलुरु पोर्ट पहुंच गया है। ये जहाज LPG लेकर आया है और इसे पोर्ट पर सफलतापूर्वक डॉक कर दिया गया है। खास बात ये है कि ये दोनों खेप रूस और अमेरिका से आई हैं। ये तब हो रहा है जब इंटरनेशनल मार्केट में सप्लाई चेन को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है।
भारत के लिए ये बहुत बड़ी बात है। क्योंकि रूस और अमेरिका दोनों से एक साथ ऊर्जा आपूर्ति मिल रही है। ये भारत के लिए एक रणनीतिक जीत मानी जा रही है।
पहले भी आ चुके तीन जहाज
भारत का तीसरा जहाज, जग लाडकी, बुधवार को गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पहुंची थी। यह जहाज UAE के फुजैराह पोर्ट से होर्मुज स्ट्रेट पार कर आया था। इस पर 80 हजार 886 मीट्रिक टन कच्चा तेल लदा था, जो करीब 5.8-6 लाख बैरल के बराबर था। भारत में रोजाना 5.5-5.6 मिलियन बैरल तेल की खपत होती है।
वहीं, इससे एक दिन पहले मंगलवार को 'नंदा देवी' नाम का भारतीय जहाज कतर से 46 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर गुजरात के वाडीनार पोर्ट पहुंचा था। इससे पहले, शिवालिक जहाज मुंद्रा पोर्ट पर 45 हजार टन एलपीजी लेकर पहुंचा था, जिससे गैस की आपूर्ति सुरक्षित रहेगी।
ये खबरें भी पढ़िए...
ईरान-इजराइल युद्ध का 23वां दिन: होर्मुज स्ट्रेट नहीं खुला तो अमेरिका करेगा हमला
भारत की जमीन से ईरान पर हमले की सोशल मीडिया पोस्ट, विदेश मंत्रालय ने बताया फेक न्यूज
मोहन भागवत का बड़ा बयान, बोले-ईरान-इजराइल संघर्ष खत्म करने के लिए भारत पर दुनिया का विश्वास
Iran-Israel War: ईरान का अमेरिका के हिंद महासागर बेस पर मिसाइल हमला