अब पेट्रोल पंप पर मिलेगा मिट्टी का तेल, LPG संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे युद्ध (Iran Israel war 2026) के कारण तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ा है। इससे दुनिया भर के कई देशों को ईंधन की कमी हो रही है। भारत भी इस संकट से प्रभावित है।
इस समस्या को हल करने के लिए सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं। अब सरकार ने घरों तक केरोसिन (मिट्टी का तेल) की सप्लाई करेगी। इसके लिए केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम सुरक्षा और लाइसेंसिंग नियमों में अस्थायी छूट दी है।
गैस मंत्रालय ने दी अनुमति
केंद्र सरकार ने 29 मार्च को एक गजट नोटिफिकेशन जारी किया। इसमें बताया गया कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 60 दिन तक सुपीरियर केरोसिन ऑयल (SKO) की अस्थायी सप्लाई देने की अनुमति दी है।
ये ऑयल 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सरकारी राशन की दुकानों के जरिए दिया जाएगा। इसका मकसद है कि लोगों को ईंधन की कमी का सामना न करना पड़े। इसमें मध्यप्रदेश दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गुजरात भी शामिल हैं।
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पेट्रोल पंपों पर मिलेगा केरोसिन
सरकार ने साफ किया है कि केरोसिन केवल घरेलू इस्तेमाल के लिए दिया जाएगा। जैसे खाना बनाने और रोशनी के लिए। इससे इसका गलत इस्तेमाल रोका जा सकेगा। इन नए नियमों के तहत कुछ सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों को चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर केरोसिन स्टोर और वितरित करने की अनुमति दी गई है। इन पेट्रोल पंपों पर ज्यादा से ज्यादा पांच हजार लीटर केरोसिन रखा जा सकेगा।
जिले के दो पेट्रोल पंप पर होगी ये सुविधा
हर जिले में दो पेट्रोल पंपों को केरोसिन बेचने के लिए चुना जाएगा। नोटिफिकेशन में यह भी कहा गया है कि, केरोसिन के स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े डीलरों और वाहनों को पेट्रोलियम नियम 2002 के कुछ लाइसेंसिंग नियमों से छूट दी गई है। इससे सप्लाई चेन तेज हो सकेगी और केरोसिन अंतिम उपभोक्ता तक सही समय पर पहुंच सकेगा।
भारत में केरोसिन की बिक्री पर रोक
भारत में केरोसिन की बिक्री पर पूरी तरह से एक साथ रोक नहीं लगाई गई थी। इसे धीरे-धीरे कम किया गया था। केंद्र सरकार ने 2015 के बाद से उज्ज्वला योजना और सौभाग्य योजना के तहत एलपीजी और बिजली कनेक्शन को बढ़ावा दिया था।
इसके साथ ही राशन दुकानों के जरिए सब्सिडी वाले केरोसिन की बिक्री को भी धीरे-धीरे बंद किया गया था। दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ ने 2018-2020 के बीच केरोसिन की बिक्री बंद कर दी थी और खुद को केरोसिन मुक्त घोषित कर दिया था।
केरोसिन बिक्री पर रोक का कारण
पीडीएस के जरिए सब्सिडी वाले केरोसिन की बिक्री रोकने का मुख्य मकसद प्रदूषण को कम करना था। साथ ही पेट्रोल और डीजल में मिलावट रोकना और सब्सिडी का बोझ घटाना था। 2020 तक ज्यादातर जगहों पर इसका वितरण नेटवर्क लगभग खत्म हो चुका था।
जिन राज्यों में अभी भी एलपीजी और बिजली की पहुंच कम थी वहां पर केरोसिन की सीमित सप्लाई जारी रखी गई। सब्सिडी खत्म होने के बाद खुले बाजार में इसके दाम बढ़ गए और एलपीजी कनेक्शन और गैस सिलेंडर की आसानी से उपलब्धता के कारण लोगों ने केरोसिन का इस्तेमाल कम कर दिया।
इस तरह, धीरे-धीरे केरोसिन (Kerosene) का उपयोग कम हुआ और सरकार को इसे पूरी तरह से बैन करने की जरूरत नहीं पड़ी।
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