भारत में तेजी से बढ़ रहे बांझपन के मामले: दुनिया के हर चौथे मामले में भारत की हिस्सेदारी, 25 से 29 साल की महिलाओं में ज्यादा समस्या, रिपोर्ट में खुलासा

Manya Jain | Sootr Creatives | Nov 02, 2026, 10:11 IST
भारत में बांझपन के मामले बढ़कर 4.92 करोड़ हो गए हैं। ब्रिक्स रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के कुल मामलों में भारत की हिस्सेदारी 24% है।
Infertility cases in India have crossed 4.92 crore, with women accounting for a larger share, according to a BRICS report.
भारत में बांझपन की समस्या लगातार तेजी से बढ़ रही है। पिछले 33 साल में इसके मामले तीन गुना से ज्यादा बढ़े हैं। साल 1990 में करीब 1.59 करोड़ लोग इस समस्या से जूझ रहे थे। वहीं, 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 4.92 करोड़ पहुंच गया है। यानी देश में करीब 4.92 करोड़ लोग बांझपन से प्रभावित हैं। ब्रिक्स देशों पर आई एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के करीब 51 फीसदी मामले पांच देशों में हैं। इनमें भारत, चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। इन देशों में सबसे ज्यादा मामले भारत में सामने आए हैं। दुनिया के कुल मामलों में भारत की हिस्सेदारी करीब 24 फीसदी है। यानी बांझपन का लगभग हर चौथा मामला भारत से जुड़ा है।



यह रिपोर्ट इंटरनेशनल जर्नल ऑफ विमेंस हेल्थ में प्रकाशित हुई है। इसमें वैज्ञानिक मॉडल और अलग-अलग देशों के आंकड़ों का इस्तेमाल हुआ है। रिसर्चर ने महिलाओं और पुरुषों में बांझपन की स्थिति का अध्ययन किया है।



सबसे ज्यादा चिंता भारत की युवा महिलाओं को लेकर है। यहां 25 से 29 साल की महिलाओं में बांझपन तेजी से बढ़ रहा है। आमतौर पर इसी उम्र में महिलाएं परिवार बढ़ाने की योजना बनाती हैं। ऐसे में इस उम्र की महिलाओं में बढ़ती समस्या चिंता बढ़ा रही है।



दुनिया में बांझपन के आधे से ज्यादा मामले पांच देशों में

रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिक्स के पांच देशों में बांझपन के करीब 10.62 करोड़ मामले हैं। वहीं, पूरी दुनिया में इनकी संख्या लगभग 20.66 करोड़ है। इस तरह दुनिया के कुल मामलों में इन पांच देशों की हिस्सेदारी 51.40 फीसदी है।



इन पांच देशों में भी भारत और चीन की स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है। ब्रिक्स देशों में सामने आए कुल मामलों में से लगभग 10 में 9 मामले भारत और चीन में हैं। इन दोनों देशों में बड़ी आबादी होने के कारण कुल संख्या भी ज्यादा है।



हालांकि, इन पांच देशों की आबादी दुनिया की कुल आबादी का करीब 40 फीसदी है। इसके बावजूद बांझपन के मामलों में इनकी हिस्सेदारी 51 फीसदी से ज्यादा है। यानी इन देशों में समस्या का बोझ आबादी के अनुपात से भी अधिक है।



भारत में सबसे ज्यादा 4.92 करोड़ मामले

रिपोर्ट में ब्रिक्स देशों के बांझपन के मामलों की जानकारी दी गई है। इसमें भारत पहले स्थान पर है। चीन दूसरे नंबर पर है। रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में मामले इन दोनों देशों के मुकाबले कम हैं।



देशबांझपन के मामले
भारत4.92 करोड़
चीन4.57 करोड़
रूस49.16 लाख
ब्राजील41.24 लाख
दक्षिण अफ्रीका21.83 लाख

इन आंकड़ों से साफ है कि भारत और चीन में समस्या का बोझ सबसे ज्यादा है। भारत में अकेले 4.92 करोड़ मामले सामने आए हैं। वहीं चीन में यह संख्या 4.57 करोड़ है।



1990 से 2023 तक भारत में तेजी से बढ़ी दर

रिपोर्ट में प्रति एक लाख नागरिकों पर बांझपन के मामलों की तुलना भी की गई है। इसके अनुसार, भारत में 1990 में प्रति एक लाख लोगों पर यह दर 3 हजार 990 थी। साल 2023 में बढ़कर 6 हजार 151 हो गई।



महिलाओं के आंकड़ों को देखें तो भारत में साल 2023 में प्रति एक लाख महिलाओं पर बांझपन की दर 9 हजार 400 थी। दुनिया में यह आंकड़ा 7 हजार 562 था। यानी भारत में महिलाओं के बीच यह दर वैश्विक औसत से ज्यादा रही।



देश1990 में दर (पुरुष+महिला)2023 में दर (पुरुष+महिला)2023 में महिलाओं की दर
रूस6,4646,7068,983
चीन6,0836,5019,969
भारत3,9906,1519,400
दक्षिण अफ्रीका5,7885,7878,999
ब्राजील2,6223,6024,859
दुनिया4,2885,1607,562

अलग-अलग देशों में अलग उम्र में ज्यादा समस्या

रिपोर्ट में हर देश की स्थिति अलग-अलग दिखाई गई है। चीन में 35 से 39 साल की महिलाओं में बांझपन की दर सबसे ज्यादा है। हालांकि, चीन में मामलों की बढ़ोतरी भारत के मुकाबले धीमी रही है।



रूस में 30 से 34 साल के पुरुषों में बांझपन की दर ज्यादा पाई गई है। ब्राजील में भी समस्या बढ़ रही है। यहां बांझपन के मामलों में बढ़ोतरी भारत के बाद सबसे तेज बताई गई है।



दक्षिण अफ्रीका में स्थिति कुछ अलग है। यहां बांझपन की दर लंबे समय तक लगभग स्थिर रही है। हालांकि, साल 2020 से 2023 के बीच इसमें फिर से बढ़ोतरी देखी गई है।



महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले ज्यादा मामले

रिपोर्ट के मुताबिक, BRICS के पांच देशों में महिलाओं में बांझपन के करीब 7.81 करोड़ मामले हैं। वहीं, पुरुषों में करीब 2.81 करोड़ मामले सामने आए हैं।



पूरी दुनिया में महिलाओं में बांझपन के करीब 14.92 करोड़ मामले हैं। वहीं, पुरुषों में यह आंकड़ा करीब 5.74 करोड़ है।



भारत की बात करें तो यहां महिलाओं में करीब 3.64 करोड़ मामले हैं। वहीं, पुरुषों में करीब 1.28 करोड़ मामले बताए गए हैं। इस तरह भारत में कुल 4.92 करोड़ मामले हैं।



इन आंकड़ों के मुताबिक, भारत में बांझपन के कुल मामलों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 74% है। वहीं, पुरुषों की हिस्सेदारी लगभग 26% है। यानी महिलाओं में बांझपन के मामले पुरुषों से करीब 2.84 गुना ज्यादा हैं।



BRICS देशों में पुरुषों के कुल 2.81 करोड़ मामलों में भारत की हिस्सेदारी करीब 46% है। वहीं, दुनिया के कुल 5.74 करोड़ मामलों में भारत की हिस्सेदारी लगभग 22% है। ये प्रतिशत उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर निकाले गए हैं।



रिपोर्ट में महिलाओं के मामले ज्यादा होने की एक वजह भी बताई गई है। महिलाओं में प्रजनन संबंधी समस्याओं की जांच ज्यादा होती है। इसलिए ऐसे मामलों की पहचान भी ज्यादा होती है।



बांझपन बढने की ये 3 बड़ी वजहें

रिपोर्ट में बांझपन बढ़ने के कई कारण बताए गए हैं। इनमें तीन वजहें सबसे अहम हैं। ये हैं बदलती लाइफस्टाइल, प्रदूषण और इलाज की कमी है।



  1. बदलती जीवनशैली: आज लोगों के खानपान और रहन-सहन में बदलाव आया है। ज्यादा कैलोरी वाला खाना और कम शारीरिक मेहनत परेशानी बढ़ा सकती है। मोटापा भी इसका एक कारण हो सकता है। डायबिटीज जैसी बीमारियां भी प्रजनन क्षमता पर असर डालती हैं।
  2. प्रदूषण और रसायनों का संपर्क: शहरों में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। औद्योगिकीकरण के कारण भी इसका स्तर बढ़ा है। लोगों का कई तरह के रसायनों से संपर्क हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ये रसायन शरीर के हार्मोन पर असर डाल सकते हैं।
  3. समय पर इलाज नहीं मिलना: कई लोगों को प्रजनन संबंधी समस्याओं का पता देर से चलता है। कुछ लोगों को सही जांच और इलाज भी नहीं मिल पाता। इससे बीमारी की पहचान में देरी होती है। इलाज शुरू होने में भी समय लग जाता है।

क्या है बांझपन की परिभाषा?

ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (Global Burden of Disease) के मुताबिक, बांझपन एक ऐसी स्थिति है। इसमें दंपती बच्चा चाहते हैं। वे बिना गर्भनिरोधक के संबंध बनाते हैं। इसके बावजूद पांच साल तक संतान नहीं होती।



वहीं, मेडिकल साइंस में 12 महीने का समय तय है। यानी एक साल तक कोशिश के बाद भी गर्भधारण नहीं होता। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।



रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि बांझपन अब दुनिया भर की समस्या बन चुका है। भारत में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं। खासकर कम उम्र की महिलाओं में यह चिंता का विषय है। समय पर जांच और सही इलाज जरूरी है। इस समस्या से निपटने के लिए जागरूकता भी जरूरी है।



FAQ

  1. भारत में बांझपन के कितने मामले हैं?
    रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बांझपन के करीब 4.92 करोड़ मामले हैं।
  2. भारत में पुरुषों और महिलाओं में बांझपन के कितने मामले हैं?
    भारत में महिलाओं में करीब 3.64 करोड़ मामले हैं, जबकि पुरुषों में यह संख्या लगभग 1.28 करोड़ है।
  3. दुनिया में बांझपन के मामलों में भारत की हिस्सेदारी कितनी है?
    दुनिया के कुल मामलों में भारत की हिस्सेदारी लगभग 24 फीसदी है, यानी हर चौथा मामला भारत से जुड़ा है।
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