भारत-जापान रक्षा सहयोग: भारतीय युद्धपोतों में लगेगा जापान का यूनिकॉर्न सिस्टम
समझें क्या है पूरा मामला...
- भारतीय युद्धपोतों में लगेगी जापान की स्टील्थ तकनीक।
- रडार को चकमा देगा नया यूनिकॉर्न एंटीना सिस्टम।
- भारत-जापान रक्षा सहयोग में नया ऐतिहासिक अध्याय जुड़ा।
- मेक इन इंडिया को मिलेगी बड़ी रक्षा तकनीकी ताकत।
- चीन की चुनौती बढ़ाएगी भारत की नई स्टील्थ क्षमता।
भारत और जापान ने यूनिकॉर्न स्टील्थ एंटीना सिस्टम पर संयुक्त परियोजना शुरू की है। यह सिस्टम युद्धपोतों की रडार पहचान को काफी कम कर देता है।
जापान की तीन कंपनियां इस तकनीक को पहले ही विकसित कर चुकी हैं। भारत में इसका सह-उत्पादन भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड करेगी। इस कदम से भारत जापानी रक्षा तकनीक पाने वाला दूसरा एशियाई देश बन गया है।
क्या है यूनिकॉर्न सिस्टम
यूनिकॉर्न एक आधुनिक नौसैनिक एंटीना प्रणाली है। इसे NORA-50 इंटीग्रेशन मस्त भी कहते हैं। सामान्य युद्धपोतों पर कई अलग-अलग एंटीना खुले लगे होते हैं। लेकिन यूनिकॉर्न इन सभी को एक ही सुरक्षात्मक गुंबद में समेट देता है। इससे जहाज की रडार पर पहचान काफी घट जाती है।
एक सिस्टम, कई तकनीकें
इस प्रणाली में टैक्टिकल डेटा लिंक और टैकन (TACAN – Tactical Air Navigation System) जैसी तकनीकें शामिल हैं। इसमें आईएफएफ (IFF – Identification Friend or Foe) और ईएसएम (ESM – Electronic Support Measures) भी जुड़े हैं। यह सिस्टम दुश्मन के रडार और संचार संकेतों को पहचान सकता है। सभी उपकरण एक ही रेडोम में होने से स्टील्थ क्षमता और बढ़ जाती है।
जापान की तीन कंपनियों की भूमिका
यूनिकॉर्न सिस्टम को जापान की तीन कंपनियों ने मिलकर बनाया है। इनमें एनईसी कॉर्पोरेशन, सांपा कोग्यो और योकोहामा रबर कंपनी शामिल हैं। यह तकनीक अभी जापान के मोगामी श्रेणी के फ्रिगेट पर लगी है। जापान अब तक ऐसे 12 युद्धपोत बना चुका है। 12 और जहाजों का निर्माण अभी जारी है।
भारत में होगा सह-उत्पादन
इस परियोजना में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL – Bharat Electronics Limited) अहम भूमिका निभाएगी। जापान डिजाइन और तकनीकी विशेषज्ञता देगा। भारत सिस्टम के एकीकरण और निर्माण की जिम्मेदारी संभालेगा। यह परियोजना मेक इन इंडिया अभियान को भी मजबूती देगी।
2024 के समझौते से मिली रफ्तार
इस परियोजना की नींव नवंबर 2024 में टोक्यो में रखी गई थी। वहां दोनों देशों ने कार्यान्वयन समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इससे पहले सितंबर 2022 में टोक्यो में हुई भारत-जापान 2+2 बैठक में इसे राजनीतिक मंजूरी मिली थी। अब यह परियोजना अमल में आने की ओर बढ़ रही है।
दूसरा एशियाई देश बना भारत
इस समझौते से भारत जापानी रक्षा तकनीक पाने वाला दूसरा एशियाई देश बन गया है। इससे पहले नवंबर 2023 में फिलीपींस को जापान ने हवाई निगरानी रडार दिए थे। जापान ने 2014 में अपने पुराने रक्षा निर्यात नियमों में बदलाव किया था। इसी बदलाव से हथियार निर्यात पर लगी दशकों पुरानी रोक हटी थी।
चीन के लिए बढ़ सकती है चुनौती
यूनिकॉर्न सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत उसकी स्टील्थ क्षमता है। पूर्वी और दक्षिण चीन सागर में चीन की नौसेना रडार संकेतों से जहाजों की पहचान करती है। यूनिकॉर्न सिस्टम इस पहचान को और मुश्किल बना देगा। इससे भारत की समुद्री निगरानी क्षमता भी मजबूत होगी।
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक यह परियोजना सिर्फ एक उपकरण का निर्माण नहीं है। यह भारत-जापान रक्षा सहयोग के नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है। आने वाले समय में इस साझेदारी का असर हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा पर भी दिखेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परियोजना को भारत-जापान रक्षा तकनीकी साझेदारी का नया अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्रीय शांति और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगी।
जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने कहा कि मुक्त और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र दोनों देशों की साझा प्राथमिकता है।
FAQ
- यूनिकॉर्न सिस्टम क्या करता है?
यह एक स्टील्थ एंटीना सिस्टम है जो जहाज की रडार पहचान कम करता है। इससे दुश्मन के लिए युद्धपोत को पहचानना मुश्किल हो जाता है। - यूनिकॉर्न सिस्टम को भारत में कौन बनाएगा?
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड इसका सह-उत्पादन करेगी। जापान डिजाइन और तकनीकी सहयोग देगा। - भारत के अलावा किस देश को जापानी रक्षा तकनीक मिली है?
इससे पहले नवंबर 2023 में फिलीपींस को जापान ने हवाई निगरानी रडार दिए थे। भारत यह तकनीक पाने वाला दूसरा एशियाई देश है।
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