भारत में बीमारियां बदल रहीं पैटर्न, हर 15 दिन में कोई न कोई बीमारी करती है परेशान
समझें क्या है पूरा मामला
- NSO (National Statistics Office) के 2025 के सर्वे में हुआ खुलासा।
- भारत में करीब आधी आबादी हार्ट, डायबिटीज, बीपी और थायरॉइड जैसी बीमारियों से जूझ रही है।
- 2025 में हर आठ में से एक भारतीय ने पिछले 15 दिनों में बीमार होने की बात कही।
- अस्पताल में भर्ती होने पर जेब से होने वाला खर्च करीब 70 फीसदी बढ़ गया है।
- संक्रामक बीमारियां घटी हैं, लेकिन 14 साल से कम उम्र के बच्चों में ये अभी भी ज्यादा हैं।
एक दशक में बदली बीमारियों की तस्वीर
देश में बीमारियों का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। NSO यानी National Statistics Office के ताजा नेशनल हेल्थ सर्वे के नतीजे बताते हैं कि भारत अब संक्रामक बीमारियों से ज्यादा लाइफस्टाइल बीमारियों की चपेट में आ रहा है। यह रिपोर्ट करीब एक लाख चार हजार घरों को कवर करते हुए किया गया है।
2025 में करीब आधी आबादी ने हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप), हार्ट डिजीज, डायबिटीज और थायरॉइड जैसी बीमारियों की शिकायत की। एक दशक पहले यह आंकड़ा सिर्फ 31 फीसदी था। आइए ग्राफिक्स से समझते हैं- देश में बामारियों का ट्रेंड...
हार्ट और मेटाबॉलिक बीमारियों में तेज उछाल
संक्रामक बीमारियां घटीं, पर बच्चे अभी भी चपेट में
हर आठ में से एक भारतीय बीमार
बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा मार
इलाज का खर्च बढ़ा
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर हर उस परिवार से सीधे जुड़ती है जहां कोई बुजुर्ग, मधुमेह का मरीज या हृदय रोगी है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 स्वास्थ्य को जीवन के अधिकार का हिस्सा मानता है। जब इलाज का खर्च 70 फीसदी बढ़ जाए (हॉस्पिटल) और हर 8 में से 1 व्यक्ति बीमार हो, तो यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के लिए एक बड़ी चुनौती है।
डिजिटल और सामाजिक नैतिकता के नजरिए से यह जरूरी है कि नागरिकों को इन आंकड़ों की जानकारी हो ताकि वे सचेत रहें, सही जीवनशैली अपनाएं और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं। यह सर्वे नीति निर्माताओं को भी दिशा देता है कि स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश (सरकारी योजनाएं)और प्राथमिकताएं कहां होनी चाहिए।
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