मिडिल ईस्‍ट में तनाव: भारत की खुदरा महंगाई दर 3.4% तक पहुंची, जानें किस राज्य में सबसे अधिक Dearness

Sandeep Kumar | Apr 13, 2026, 18:15 IST
india retail inflation
भारत की खुदरा महंगाई दर मार्च में 3.4% तक बढ़ गई, जबकि फरवरी में यह 3.21% थी। इसका मुख्य कारण मिडिल ईस्ट में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन पर दबाव है।

News in short

  • मार्च 2026 में भारत की खुदरा महंगाई दर 3.4% तक बढ़ी, फरवरी में यह 3.21% थी।
  • मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव ने महंगाई को प्रभावित किया।
  • खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट आई, प्याज, आलू और लहसुन की कीमतों में कमी दर्ज की गई।
  • तेलंगाना में महंगाई सबसे ज्यादा 5.83% रही, जबकि छत्तीसगढ़ और दिल्ली में यह दर कम रही।
  • RBI ने कहा कि वैश्विक तनाव बढ़ने से महंगाई में और इजाफा हो सकता है।

News in Detail

भारत की खुदरा महंगाई दर मार्च 2026 में बढ़कर 3.4% हो गई, जबकि फरवरी में यह 3.21% थी। इस वृद्धि का प्रमुख कारण मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन पर दबाव है। वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव, खासकर ईरान युद्ध के कारण, महंगाई पर प्रभाव डालने वाला एक मुख्य कारण रहा।



CPI सीरीज के तहत महंगाई दर

संशोधित सीपीआई सीरीज के अनुसार, 2024 को आधार वर्ष मानते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर 3.63% रही। शहरी क्षेत्रों में यह दर 3.11% रही। यह आंकड़े सरकारी डेटा पर आधारित हैं।



ईरान युद्ध का असर

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच भू-राजनीतिक तनाव में इजाफा हुआ है। इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ रहा है। अमेरिका की ओर से ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी के बाद से ऊर्जा बाजार अस्थिर हो गए हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज , जो वैश्विक तेल शिपमेंट के लिए एक महत्वपूर्ण रास्ता है, पर बढ़ते दबाव के कारण तेल आपूर्ति में रुकावटें आ रही हैं। इसके अलावा, सोने की कीमतों में लगभग 11% की गिरावट भी महंगाई पर असर डाल रही है, जिससे सप्लाई चेन में थोड़ी राहत मिली है।



RBI का बयान

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अप्रैल 2026 की बैठक में कहा कि भारत के आर्थिक बुनियादी फैक्‍टर मजबूत हैं। यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है, तो बाहरी जोखिम बढ़ सकते हैं। इससे महंगाई दर में और इजाफा हो सकता है।



खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट

इस माह कई प्रमुख खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट आई। प्याज की कीमतों में 27.76% की गिरावट आई। आलू की कीमतों में 18.98% कमी आई। लहसुन की कीमतों में 10.18% की गिरावट दर्ज की गई। अरहर और चना जैसी दालों की कीमतों में भी गिरावट आई। इस गिरावट से खाद्य महंगाई नियंत्रित हुई।



देश के इन राज्यों में महंगाई का दर

तेलंगाना में महंगाई 5.83% दर्ज की गई। इसके बाद सिक्किम, पुडुचेरी और केरल का स्थान रहा। छत्तीसगढ़ और दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में महंगाई कम रही, क्रमशः 1.35% और 1.86%।



महंगाई के आंकड़े 2024 को आधार वर्ष मानकर जारी किए गए। फरवरी में भारत ने पहली बार संशोधित आधार वर्ष के आंकड़े उपयोग में लिए। संशोधित आंकड़ों में अब 358 मदों को शामिल किया गया, जबकि पहले 299 मद थे।



इनमें ई-कॉमर्स, हवाई किराया और ओटीटी सब्सक्रिप्शन जैसी आधुनिक उपभोग प्रवृत्तियों को शामिल किया गया है। साथ ही, ग्रामीण और शहरी बाजारों में डेटा संग्रह केंद्रों की संख्या बढ़ाई गई है। सरकार अप्रैल 2026 के लिए अगले सीपीआई आंकड़े 12 मई 2026 को जारी करेगी।



क्या है खुदरा महंगाई

खुदरा महंगाई (Retail Inflation) उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित दर है। यह दर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में वृद्धि को मापती है। यह दिखाता है कि दैनिक जरूरतों के लिए कितनी अधिक राशि खर्च हो रही है। भारत में जनवरी 2026 में यह दर 2.75% रही।



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