भारत ने रूस से बढ़ाया तेल आयात, अब चीन जा रहा रूसी तेल टैंकर भी आएगा भारत, खत्म होगी तेल की टेंशन

Sanjay Dhiman | Mar 18, 2026, 20:12 IST
Photograph: (the sootr)
भारत सरकार ने रूस से ज्यादा मात्रा में कच्चा तेल खरीदने का निर्णय लिया है, जिससे तेल की किल्लत की अफवाहों पर विराम लगा दिया गया है। रूस के तेल टैंकर अब चीन के बजाय भारत आ रहे हैं, जिससे तेल की स्थिति सुधरने की उम्मीद है।

News in Short

  • भारत ने रूस से कच्चा तेल आयात बढ़ाकर दुनिया को अपना मास्टरस्ट्रोक दिखा दिया है।
  • चीन जा रहे रूसी तेल टैंकरों ने अब भारत के बंदरगाहों की ओर रास्ता मोड़ लिया।
  • ईरान युद्ध के चलते सप्लाई बिगड़ने पर अमेरिका ने भारत को तेल खरीदने की छूट दी।
  • सिर्फ एक हफ्ते में भारत ने रूस से करीब 3 करोड़ बैरल तेल खरीद लिया है।
  • रूसी तेल की बढ़ती सप्लाई से अब देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम हो सकती हैं।

News in Detail

भारत सरकार के एक मास्टरस्ट्रोक ने फिर दुनिया को चौंका दिया है। साथ ही देश में चल रही तेल की किल्लत की अफवाहों पर भी विराम लगा दिया है। सरकार ने रूस से फिर कच्चा तेल खरीदी बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के बाद दूसरे देशों की ओर जा रहे रूस के तेल टैंकरों ने भी अपना रास्ता बदलना शुरु कर दिया है।



भारत सरकार ने एक ऐसा दांव खेला है जिससे न केवल देश की तेल की टेंशन खत्म हो रही है, बल्कि चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। रूस से आने वाला कच्चा तेल, जो पहले चीन की ओर जा रहा था, अब अपना रास्ता बदलकर भारत के बंदरगाहों पर पहुंच रहा है। यह सब मुमकिन हुआ है भारत की बेहतरीन डिप्लोमेसी और समय पर लिए गए कड़े फैसलों की वजह से।



रूस से तेल आयात बढ़ाने का निर्णय

भारत सरकार ने रूस से तेल खरीदने में वृद्धि की है, जिससे पहले से ही चीन की तरफ बढ़ रहे तेल टैंकर अब भारत की ओर मुड़ रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, 'एक्वा टाइटन' नामक टैंकर, जो रूस के बाल्टिक सागर से तेल लेकर चीन के रिजाओ पोर्ट जा रहा था, अब दक्षिण चीन सागर में पहुंचने के बाद अपना रास्ता बदलकर भारत की तरफ बढ़ गया है। यह तेल टैंकर 21 मार्च को न्यू मैंगलोर पोर्ट पर पहुंचेगा।



ईरान युद्ध और रूस से तेल खरीदने की बढ़ी छूट

मध्य-पूर्व में ईरान युद्ध के चलते तेल सप्लाई पर असर पड़ा है। इस बीच, अमेरिका ने भारत को रूस से अधिक तेल खरीदने की छूट दी, जिससे भारत ने सिर्फ एक सप्ताह में करीब 3 करोड़ बैरल तेल खरीद लिया। यह निर्णय रूस से तेल आयात की बढ़ती आवश्यकता को पूरा करने के लिए लिया गया था। भारत की बड़ी रिफाइनरियां रूस से तेल खरीद रही हैं, और अब तेल के बड़े टैंकर भारत की ओर बढ़ रहे हैं।



भारत की रिफाइनरियां और रूस के टैंकर

भारत के तेल उद्योग के लिए यह एक बड़ा लाभकारी कदम साबित हो रहा है, क्योंकि अब रूस के तेल टैंकरों ने अपना रुख भारत की तरफ मोड़ लिया है। अब तक कम से कम 7 टैंकर अपने रास्ते बदलकर भारत आ चुके हैं। जैसे-जैसे रूस भारत को तेल सप्लाई बढ़ा रहा है, वैसे-वैसे चीन की तुलना में भारत को ज्यादा प्राथमिकता मिलने लगी है।



7 टैंकरों ने बदला रास्ता

सिर्फ 'एक्वा टाइटन' ही नहीं, बल्कि 'जौजू एन' जैसे कम से कम सात बड़े टैंकर जो चीन या अन्य देशों की तरफ जा रहे थे, अब भारत की ओर रुख कर चुके हैं। 'जौजू एन' जो कजाखिस्तान का तेल लेकर चीन जा रहा था, अब गुजरात के सिक्का पोर्ट पर आने वाला है। यह दिखाता है कि रूस के लिए भारत अब चीन से भी बड़ा और भरोसेमंद बाजार बनता जा रहा है।



तेल की कीमतों पर असर

अगर रूस के साथ अन्य देशों जैसे जापान और साउथ कोरिया ने भी तेल खरीदने की दिशा में कदम उठाया तो तेल की कीमतों पर बड़ा असर हो सकता है। फिलहाल भारत को रूस से तेल की सप्लाई मिलने से स्थिति बेहतर हो सकती है।



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