मध्य प्रदेश में बढ़ा बेरोजगारी का स्तर, गांवों की चिंता, देशभर के आंकड़े और भी खराब
समझें क्या है पूरा मामला...
- देश में बेरोजगारी दर बढ़कर 5.5 प्रतिशत पर पहुंच गई है।
- ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी दर 4.6 प्रतिशत से बढ़कर 5.1 प्रतिशत हो गई है।
- मध्य प्रदेश में भी युवाओं की बेरोजगारी दर में 0.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी 6.6 प्रतिशत से घटकर 6.4 प्रतिशत पर आ गई है।
- बाजार में श्रम बल भागीदारी और रोजगार दोनों में गिरावट आई है।
- राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के मुताबिक मौसमी सुस्ती की वजह से यह गिरावट आई है।
देश में इस समय रोजगार को लेकर स्थिति थोड़ी चिंताजनक बनी हुई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (National Statistical Office) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि देश में बेरोजगारी दर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
देश के दिल मध्य प्रदेश से भी जो आंकड़े आ रहे हैं, वे युवाओं को परेशान करने वाले हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर रोजगार के बाजार में इस समय क्या चल रहा है।
बेरोजगारी का बढ़ता ग्राफ
फरवरी 2025 में सरकार ने हर महीने PLFS (Periodic Labour Force Survey) रिपोर्ट जारी करना शुरू किया। तब से अब तक के आंकड़े चिंताजनक तस्वीर दिखाते हैं।
फरवरी में बेरोजगारी दर 4.8 प्रतिशत थी। (बेरोजगारी पर आई लिस्ट) मार्च में यह बढ़कर 5.0 प्रतिशत हो गई। अप्रैल में 5.2 प्रतिशत और मई में 5.5 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं इस बार की बढ़त सबसे तेज रही।
गांवों में हालात सबसे खराब
जानकारी के अनुसार ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी (बेरोजगारी को लेकर तनाव) अप्रैल के 4.6 प्रतिशत से बढ़कर मई में 5.1 प्रतिशत हो गई। यह पिछले 12 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है।
वहीं शहरों में थोड़ी राहत मिली है। शहरी बेरोजगारी दर 6.6 प्रतिशत से घटकर 6.4 प्रतिशत हो गई। लेकिन गांवों की गिरावट इस राहत पर भारी पड़ गई।
कम लोग काम ढूंढने निकले, फिर भी बेरोजगारी बढ़ी
आमतौर पर जब कम लोग काम ढूंढते हैं तो बेरोजगारी की दर नीचे आती है। लेकिन मई में उल्टा हुआ है।
LFPR (Labour Force Participation Rate) अप्रैल के 55.0 प्रतिशत से घटकर 54.4 प्रतिशत रह गई। यानी कम लोग काम के बाजार में नौकरी ढंढने आए। इसके बावजूद बेरोजगारी बढ़ी।
WPR (Worker Population Ratio) भी 52.2 प्रतिशत से गिरकर 51.4 प्रतिशत हो गया है। इसका सीधा मतलब है कि जितने लोग काम मांग रहे थे, उनके लिए रोजगार नहीं बना।
सरकार ने क्या कहा
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (National Statistical Office) ने कहा कि मई में रोजगार के आंकड़ों में आई नरमी मौसमी कारणों से हो सकती है। मई का महीना कई क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधि के लिहाज से सुस्त रहता है।
वहीं जानकार इस सफाई से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। लगातार चार महीनों की बढ़त को केवल मौसमी नहीं कहा जा सकता है।
क्यों नहीं बन रहीं नौकरियां
श्रम बाजार के जानकार मानते हैं कि असल समस्या रोजगार सृजन की धीमी रफ्तार है। देश में हर साल लाखों युवा काम के लिए तैयार होते हैं लेकिन उतनी नौकरियां नहीं बन रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में खेती के अलावा दूसरे रोजगार के अवसर सीमित हैं। इससे शहरों पर दबाव बढ़ रहा है। लेकिन शहरों में भी सभी के लिए काम नहीं है।
मध्य प्रदेश में बेरोजगारी दर
बता दें कि हाल ही में मध्य प्रदेश में भी बेरोजगारी दर में पिछले कुछ महीनों में बढ़ोतरी देखी गई है। खासकर युवाओं में यह दर 0.4% बढ़ी है। प्रदेश में बेरोजगारी का आलम ये है कि 100 में से 9 नौजवान काम की तलाश में हैं। आंकड़े बताते हैं कि पिछली तिमाही के मुकाबले युवाओं में बेरोजगारी 0.4% बढ़ी है।
FAQ
- PLFS रिपोर्ट क्या होती है?
PLFS यानी Periodic Labour Force Survey सरकार की वह रिपोर्ट है जो हर महीने रोजगार और बेरोजगारी के आंकड़े जारी करती है। इसे राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय तैयार करता है। यह रिपोर्ट 2025 से हर महीने आ रही है। - बेरोजगारी दर 5.5% का मतलब क्या है?
इसका मतलब है कि 100 में से 5.5 लोग जो काम करना चाहते हैं, उन्हें नौकरी नहीं मिल रही। यह आँकड़ा जितना ज्यादा होगा, रोजगार बाजार उतना कमजोर माना जाएगा।
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