शेयर बाजार से दूरी बना रहे भारतीय परिवार, दूसरी ओर बढ़ रहा कर्ज और EMI का बोझ
समझें क्या है पूरा मामला...
- भारतीय परिवारों ने पिछले एक साल में बाजार निवेश कम कर दिया है।
- यह कोविड-19के बाद पहली बार हुआ है, जब निवेश में गिरावट आई है।
- वहीं घरों में रखी नकदी एक साल में लगभग दोगुनी हो गई है।
- इसके साथ ही घरेलू कर्ज भी 36.3% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
- RBI के आंकड़े बताते हैं कि परिवारों की बचत क्षमता भी घट रही है।
निवेश में आई भारी कमी
कोविड के बाद पहली बार भारतीय परिवारों का बाजार निवेश घटा है। 2024-25 में परिवारों का निवेश 6.84 लाख करोड़ रुपए था। यह 2025-26 में घटकर 5.68 लाख करोड़ रुपए रह गया है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों की तरह अब भारतीय परिवार भी शेयर बाजार से दूरी बना रहे हैं। जोखिम भरे निवेश से भी उनका मोह कम होता दिख रहा है। यह बदलाव पांच साल में पहली बार देखा गया है।
घरों में नकदी 98% तक बढ़ी
जहां निवेश घटा है वहीं घरों में रखी नकदी तेजी से बढ़ी है। 2024-25 में यह 2.09 लाख करोड़ रुपए थी। 2025-26 में यह बढ़कर 4.15 लाख करोड़ रुपए हो गई। यानी एक साल में नकदी लगभग दोगुनी हो गई है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अनिश्चितता के दौर में लोग तुरंत इस्तेमाल के लिए पैसा नकद रखना पसंद करते हैं। इससे बाजार में तरलता का पैटर्न भी बदल सकता है।
सुरक्षित बचत की ओर रुझान
RBI (Reserve Bank of India) के अनुसार परिवारों का रुझान अब सुरक्षित बचत विकल्पों की ओर बढ़ा है। बैंक जमा 2024-25 में 12.55 लाख करोड़ रुपए था। यह 2025-26 में बढ़कर 15.32 लाख करोड़ रुपए हो गया।
पेंशन और भविष्य निधि में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई है। यह 7.88 लाख करोड़ से बढ़कर 8.69 लाख करोड़ रुपए हो गई है। कुल मिलाकर परिवारों की दौलत 2025-26 में 42.89 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई है।
कर्ज में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
सुरक्षित बचत बढ़ने के बावजूद परिवारों की माली हालत मजबूत नहीं हुई है। 2025-26 में घरेलू कर्ज 36.3% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। 2020-21 में यह कर्ज सिर्फ 7.82 लाख करोड़ रुपए था। पांच साल में यह बढ़कर 21.45 लाख करोड़ रुपए हो गया है। यानी कर्ज लगभग 2.7 गुना बढ़ चुका है।
यह बढ़ोतरी दिखाती है कि परिवार अब अपनी बचत से ज्यादा उधार पर निर्भर हो रहे हैं। रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए भी कर्ज लेना पड़ रहा है।
बैंकों से बढ़ी सबसे ज्यादा उधारी
इस कर्ज में सबसे बड़ा योगदान बैंकिंग सेक्टर का है। बैंकों से उधारी 31% तक बढ़ी है। पर्सनल लोन, कंज्यूमर लोन और गोल्ड लोन की मांग तेजी से बढ़ी है। लोग जल्दी पैसा पाने के लिए इन विकल्पों को चुन रहे हैं।
एनबीएफसी से भी कर्ज बढ़ा है। 2024-25 में यह 2.52 लाख करोड़ रुपए था। 2025-26 में यह बढ़कर 4.78 लाख करोड़ रुपए हो गया। अन्य वित्तीय संस्थानों से उधारी भी 3.38 से बढ़कर 5.27 लाख करोड़ रुपए हुई है।
होम लोन की रफ्तार धीमी
इसके उलट होम लोन की उधारी धीमी गति से बढ़ी है। एचएफसी से कर्ज 2024-25 में 0.76 लाख करोड़ रुपए था। यह 2025-26 में घटकर 0.44 लाख करोड़ रुपए रह गया।
इसका मतलब है कि लोगों ने घर खरीदने के बजाय तुरंत जरूरत वाले कर्ज ज्यादा लिए हैं। यह प्रवृत्ति परिवारों की वित्तीय योजना पर सवाल खड़े करती है।
घटती बचत, बढ़ता दबाव
परिवारों की शुद्ध वित्तीय बचत दर भी घटी है। यह अब 3.6% तक रह गई है। इसका मतलब है कि लोग जरूरतें पूरी करने के लिए ज्यादा उधार ले रहे हैं।
2021-22 से 2024-25 के बीच परिवारों की कर्ज चुकाने की क्षमता लगातार घटी है। EMI का बोझ बढ़ने से आगे भी दबाव बढ़ने की आशंका है।
FAQ
- 2025-26 में भारतीय परिवारों का घरेलू कर्ज कितना बढ़ा?
2025-26 में घरेलू कर्ज 36.3% बढ़ा है। यह रिकॉर्ड 21.45 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। पांच साल पहले यह सिर्फ 7.82 लाख करोड़ रुपए था। - भारतीय परिवारों की नकदी कितनी बढ़ी है?
घरों में रखी नकदी एक साल में लगभग दोगुनी हो गई है। यह 2.09 लाख करोड़ से बढ़कर 4.15 लाख करोड़ रुपए हो गई। यह वृद्धि करीब 98% है। - भारतीय परिवारों का सबसे ज्यादा कर्ज किस सेक्टर से बढ़ा?
सबसे ज्यादा उधारी बैंकिंग सेक्टर से बढ़ी है। यह करीब 31% बढ़ी है। पर्सनल, कंज्यूमर और गोल्ड लोन की मांग तेजी से बढ़ी है।
ये खबरें भी पढ़िए...
ऑनलाइन शॉपिंग से बढ़ा सेक्स टॉयज का मार्केट, जानें सबसे ज्यादा क्या खरीद रहे भारतीय
भारतीय परिवारों में बढ़ती खामोशी: सच, भ्रम और समाधान-कैलाश चन्द्र
ICMR का सबसे बड़ा खुलासा: 87% से ज्यादा भारतीयों का कोलेस्ट्रॉल लेवल खराब
ट्रंप के टैरिफ का असर भारतीय दवा बाजार पर, जानिए 200% टैक्स से क्या-क्या बदलेगा