तत्काल बुकिंग सिस्टम अब और आसान, एक मिनट में बुक होंगे एक लाख से ज्यादा टिकट
समझें क्या है पूरा मामला...
- रेलवे अपना पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम यानी PRS अपग्रेड कर रहा है।
- नया सिस्टम एक मिनट में डेढ़ लाख से ज्यादा टिकट बुक कर सकेगा।
- अभी का सिस्टम सिर्फ 32 हजार बुकिंग प्रति मिनट संभालता है।
- अगस्त 2026 से चरणबद्ध तरीके से माइग्रेशन शुरू हो चुका है।
- इससे तत्काल टिकट बुकिंग की स्पीड में पहले ही सुधार दिख रहा है।
आखिर है क्या PRS
बता दें कि पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम रेलवे की टिकट बुकिंग (रेलवे टिकट बुकिंग) व्यवस्था की रीढ़ है। यह टिकट बुकिंग, कैंसिलेशन (टिकट कैंसिलेशन) और सीट बदलाव जैसे काम संभालता है।
सीट अलॉटमेंट, वेटिंग लिस्ट, RAC और रिजर्वेशन चार्ट भी इसी सिस्टम से बनते हैं। रेलवे काउंटर, IRCTC वेबसाइट, मोबाइल ऐप और RailOne ऐप, सभी इसी सिस्टम से जुड़े हैं।
चार दशक पुराना है सिस्टम
रेलवे के CRIS यानी सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स ने यह सिस्टम करीब चार दशक पहले बनाया था। 1986 में इसने मैनुअल रजिस्टर वाली बुकिंग को इलेक्ट्रॉनिक रूप दिया था।
1990 के दशक में यह नेटवर्क रेलवे के अलग-अलग जोन तक पहुंचा। 2002 में इंटरनेट टिकट बुकिंग शुरू हुई। 2014 में नेक्स्ट जेनरेशन ई-टिकटिंग सिस्टम यानी NGeT लॉन्च हुआ था।
मौजूदा सिस्टम 2010 में Itanium सर्वर और OpenVMS प्लेटफॉर्म पर तैयार हुआ था। उस समय की जरूरतों के हिसाब से बना यह ढांचा अब बढ़ते डिजिटल दबाव का सामना कर रहा है।
तेजी से बढ़ी ऑनलाइन बुकिंग
रेलवे के आंकड़े बताते हैं कि जून 2025 से जून 2026 के बीच 65.08 करोड़ रिजर्व टिकट बुक हुए। इनमें से 57.90 करोड़ टिकट यानी करीब 89% बुकिंग ऑनलाइन हुई।
जुलाई 2026 तक यह हिस्सेदारी बढ़कर 89.84% हो गई। इस दौरान 5.72 करोड़ से ज्यादा ऑनलाइन यूजर अकाउंट दर्ज हुए। एक साथ 5 लाख से ज्यादा यूजर सिस्टम पर सक्रिय पाए गए।
यही बढ़ता दबाव नया सिस्टम लाने की सबसे बड़ी वजह बना।
कैसे हो रहा माइग्रेशन का काम
रेलवे ने मई 2026 में बताया था कि अगस्त से नए सिस्टम पर माइग्रेशन चरणबद्ध तरीके से होगा। यह प्रक्रिया अब शुरू हो चुकी है।
नई IRCTC बीटा वेबसाइट भी इसी ट्रांजिशन का हिस्सा है। पुराने और नए सिस्टम के बीच लेयर-बाय-लेयर मैचिंग की जा रही है, ताकि डेटा में कोई गड़बड़ी न हो।
धीमी और स्थिर रफ्तार से लोड आधारित टेस्टिंग की जा रही है। इसका मकसद है कि सिस्टम पर अचानक ज्यादा दबाव न बने।
तत्काल बुकिंग में दिखा असर
बता दें कि 15 जुलाई को बीटा वेबसाइट लॉन्च होने के बाद बुकिंग स्पीड में सुधार दिखा। तीन मिनट के भीतर पूरी होने वाली तत्काल बुकिंग में 5% से ज्यादा बढ़ोतरी हुई।
पांच मिनट की विंडो में यह बढ़त 3% रही। तीस मिनट की विंडो में सुधार 2% से ज्यादा दर्ज हुआ। यह आंकड़े नए सिस्टम की उपयोगिता का शुरुआती संकेत हैं।
AI और क्लाउड तकनीक होगी शामिल
रेलवे के मुताबिक नया सिस्टम आधुनिक तकनीकों पर आधारित होगा। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग शामिल होंगे।
बिग डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी तकनीकों का भी इस्तेमाल हो सकता है। AR/VR तकनीक जोड़ने की भी संभावना जताई गई है।
नया सिस्टम क्लाउड-इनेबल्ड, मल्टीलिंगुअल और ज्यादा यूजर फ्रेंडली बनाया जा रहा है।
यात्रियों को क्या फायदा होगा
नए सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा टिकट बुकिंग की स्पीड में मिलेगा। खासकर तत्काल बुकिंग के दौरान, जब एक साथ लाखों यूजर सिस्टम पर आते हैं।
रेलवे ने एडवांस रिजर्वेशन पीरियड भी 120 दिन से घटाकर 60 दिन कर दिया है। जुलाई 2025 से आधार-ऑथेंटिकेटेड तत्काल बुकिंग भी शुरू हो चुकी है, जिसमें बाद में OTP वेरिफिकेशन भी जोड़ा गया।
इन सभी बदलावों का मकसद एक ही है, टिकट बुकिंग को तेज और भरोसेमंद बनाना।
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