पुरुषों से ज्यादा जीने के बाद भी सेहत में पिछड़ रहीं महिलाएं, रिपोर्ट में खुलासा
समझें क्या है पूरा मामला
- भारतीय महिलाएं पुरुषों के मुकाबले औसतन साढ़े तीन साल ज्यादा जीती हैं।
- लेकिन स्वस्थ जीवनकाल में यह फासला घटकर सिर्फ तीन महीने रह जाता है।
- महिलाएं औसतन 10.7 साल बीमारी में बिताती हैं, जबकि पुरुष 7.8 साल।
- इसकी सबसे बड़ी वजह एनीमिया है, जो 15-49 साल की 57% महिलाओं को है।
- विशेषज्ञ पोषण और नियमित जांच को इसका समाधान बता रहे हैं।
भारत में महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ज्यादा उम्र तक जी रही हैं। लेकिन लंबी उम्र का यह फायदा स्वस्थ जीवन में तब्दील नहीं हो पा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO – World Health Organisation) के ताजा आंकड़े इस हकीकत को साफ दिखाते हैं।
उम्र लंबी, पर सेहत कमजोर
WHO के मुताबिक भारतीय महिलाओं की औसत आयु 69 वर्ष है। इसके मुकाबले पुरुषों की औसत आयु 65.5 वर्ष है। यानी उम्र के मामले में महिलाएं पुरुषों से करीब साढ़े तीन साल आगे हैं।
लेकिन स्वस्थ जीवनकाल की बात करें तो यह फासला लगभग खत्म हो जाता है। महिलाओं का औसत स्वस्थ जीवनकाल 58.3 वर्ष है। पुरुषों का स्वस्थ जीवनकाल 58 वर्ष है। यानी महिलाएं स्वस्थ जीवन में पुरुषों से सिर्फ तीन महीने ही आगे हैं।
इसका सीधा मतलब है कि महिलाएं अपनी लंबी उम्र का बड़ा हिस्सा बीमारी और कमजोरी में गुजार देती हैं। आंकड़ों के अनुसार भारतीय महिलाएं करीब 10.7 साल खराब स्वास्थ्य में बिताती हैं। पुरुषों के लिए यह अवधि 7.8 साल है। यानी महिलाओं को पुरुषों से करीब तीन साल ज्यादा बीमारी झेलनी पड़ती है।
एनीमिया बनी बड़ी चुनौती
महिलाओं के जीवन के कई साल बीमारी में गुजरने की सबसे बड़ी वजह एनीमिया है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार 15 से 49 साल की उम्र की 57% महिलाएं एनीमिक हैं। इसी उम्र वर्ग के पुरुषों में यह आंकड़ा सिर्फ 25% है।
यानी हर दूसरी युवा और मध्यम उम्र की महिला किसी न किसी स्तर के खून की कमी से जूझ रही है। यह पुरुषों के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है।
थकान से लेकर जच्चा-बच्चा तक असर
एनीमिया की वजह से महिलाओं में थकान और कमजोरी बनी रहती है। वे बार-बार बीमार पड़ती हैं। बच्चों को जन्म देते समय भी उन्हें कई तरह की दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं।
यह समस्या अक्सर बचपन से शुरू होकर पूरी जिंदगी साथ चलती है। गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की समस्या सबसे ज्यादा देखी जाती है। इससे मां और होने वाले बच्चे, दोनों की सेहत प्रभावित होती है।
पोषण की कमी से बढ़ी समस्या
विशेषज्ञों के मुताबिक महिलाओं के कमजोर स्वास्थ्य की कई वजहें हैं। इनमें आयरन, विटामिन बी-12 और विटामिन डी की कमी शामिल है। असंतुलित खान-पान, गरीबी और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही भी बड़े कारण हैं।
इसका असर सिर्फ सेहत तक सीमित नहीं रहता। कमजोर स्वास्थ्य महिलाओं की कामकाज करने की क्षमता को घटाता है। इसका असर मातृ स्वास्थ्य और बच्चों के विकास पर भी पड़ता है। बढ़ती उम्र में हड्डियों की मजबूती पर भी इसका सीधा प्रभाव देखा जाता है।
समाधान क्या है
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस स्थिति को बदला जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति खुद जागरूक होना होगा। रोजाना के खान-पान में हरी सब्जियां, दालें, फल और गुड़ जैसी चीजें शामिल करनी चाहिए।
नियमित स्वास्थ्य जांच कराना भी बेहद जरूरी है। इससे एनीमिया और पोषण की कमी जैसी समस्याओं का समय रहते पता चल जाता है। समय पर इलाज शुरू होने से आगे चलकर बड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है।
परिवारों की भूमिका भी इसमें बेहद अहम है। घरों में बेटियों को बचपन से ही अच्छा और पौष्टिक खान-पान देना चाहिए। जब पोषण की नींव बचपन में ही मजबूत होगी, तभी आगे चलकर महिलाओं का स्वस्थ जीवनकाल भी बढ़ सकेगा।
क्यों जरूरी है यह चर्चा
यह सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है, बल्कि करोड़ों महिलाओं की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा मुद्दा है। जब महिलाएं अपनी बीमारी को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देती हैं, तो समस्या और गहरी होती जाती है। थकान, कमजोरी या बार-बार बीमार पड़ना अक्सर एनीमिया का शुरुआती संकेत हो सकता है।
परिवार और समाज दोनों को इस मुद्दे पर साथ आना होगा। सिर्फ महिला की जिम्मेदारी मानकर इसे नहीं छोड़ा जा सकता। घर के खान-पान और स्वास्थ्य जांच से जुड़े फैसलों में महिलाओं को भी बराबर की प्राथमिकता मिलनी चाहिए। तभी लंबी उम्र सच में स्वस्थ और खुशहाल जिंदगी में बदल पाएगी।
FAQ
- भारतीय महिलाओं का स्वस्थ जीवनकाल कितना है?
WHO के मुताबिक भारतीय महिलाओं का औसत स्वस्थ जीवनकाल 58.3 वर्ष है। पुरुषों का स्वस्थ जीवनकाल 58 वर्ष है। यानी दोनों में फासला सिर्फ तीन महीने का है। - महिलाओं में एनीमिया कितना आम है?
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार 15 से 49 साल की 57% भारतीय महिलाएं एनीमिक हैं। इसी उम्र वर्ग के पुरुषों में यह आंकड़ा सिर्फ 25% है। यह महिलाओं में बीमारी की सबसे बड़ी वजह है। - महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार के लिए क्या करें?
हरी सब्जियां, दालें, फल और गुड़ जैसी पौष्टिक चीजें खान-पान में शामिल करें। नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहें। बेटियों को बचपन से ही अच्छा पोषण देना भी जरूरी है।
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