सिंधु जल संधि पर भारत का कड़ा रुख : इंटरनेशनल कोर्ट का फैसला किया खारिज, पाकिस्तान को चेतावनी

Sanjay Dhiman | May 17, 2026, 16:31 IST
Photograph: (the sootr)
भारत ने हेग स्थित अवैध कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को पूरी तरह खारिज किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि सिंधु जल संधि स्थगित रहेगी और पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय कानून का दुरुपयोग न करने की चेतावनी दी गई है।

पांच पाइंट में समझें मामला

  • फैसला खारिज: भारत ने सिंधु जल संधि पर हेग की अवैध अदालत का फैसला पूरी तरह ठुकराया।
  • कोई वजूद नहीं: विदेश मंत्रालय के मुताबिक गैर-कानूनी तरीके से बनी इस कोर्ट की कोई मान्यता नहीं।
  • संधि स्थगित: सीमा पार आतंकवाद के विरोध में भारत द्वारा संधि को स्थगित रखने का फैसला बरकरार।
  • पाकिस्तान की साजिश: पाकिस्तान द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंचों का दुरुपयोग कर कश्मीर विकास रोकने की कोशिश नाकाम हुई।
  • सख्त चेतावनी: जब तक पाकिस्तान आतंकवाद बंद नहीं करता, भारत किसी भी नियम को नहीं मानेगा।

भारत ने कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को खारिज किया

भारत ने 15 मई 2026 को हेग स्थित तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (CoA) के फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह अदालत अवैध तरीके से गठित की गई है और इसका कोई कानूनी अस्तित्व नहीं है। इसलिए इसके किसी भी फैसले, आदेश या कार्रवाई को भारत मान्यता नहीं देता ।



भारत का कहना है कि इस अदालत का गठन ही सिंधु जल संधि का उल्लंघन है और उसके सभी फैसले अवैध हैं। मंत्रालय ने साफ किया कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का भारत का फैसला अब भी लागू है।



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सिंधु जल संधि और भारत का स्थगन

सिंधु जल संधि 19 सितंबर 1960 को भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी। यह संधि सिंधु नदी प्रणाली के जल उपयोग को लेकर थी। भारत ने पिछले साल सीमा पार आतंकवाद के समर्थन के चलते अपने संप्रभु अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए इसे स्थगित कर दिया। भारत का कहना था कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को स्थायी रूप से समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक संधि स्थगित रहेगी ।



विदेश मंत्रालय ने पहले भी स्पष्ट कर दिया था कि संधि स्थगित होने के दौरान भारत किसी भी दायित्व के लिए बाध्य नहीं है।



किशनगंगा और रतले परियोजनाओं को लेकर विवाद

पिछले साल भी भारत ने तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन की आलोचना की थी, जब उसने जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा और रतले जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर “सप्लीमेंटल अवॉर्ड” जारी किया। भारत ने कहा कि उसने कभी इस अदालत को कानूनी रूप से मान्यता नहीं दी।



भारत का रुख है कि यह अदालत पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय मंचों का दुरुपयोग है। इसके जरिए पाकिस्तान आतंकवाद के वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है ।



भारत का संदेश पाकिस्तान के लिए

भारत ने स्पष्ट किया कि कोई भी अवैध मध्यस्थता अदालत भारत के संप्रभु अधिकारों पर सवाल नहीं उठा सकती। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान की यह फर्जी मध्यस्थता प्रक्रिया उसकी लंबे समय से चली धोखाधड़ी और अंतरराष्ट्रीय मंचों के दुरुपयोग की नीति का हिस्सा है।



भारत ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून का दुरुपयोग करके किसी भी तरह का लाभ नहीं उठा सकता।



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