FIR नहीं तो बीमा क्लेम भी नहीं! कंपनी की दलील खारिज, उपभोक्ता आयोग ने 27 लाख देने का दिया आदेश
पीड़ित ने पुलिस को घटना की जानकारी दी, लेकिन FIR दर्ज नहीं हुई। बीमा कंपनी ने इसी आधार पर क्लेम खारिज कर दिया। मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा। आयोग ने बीमा कंपनी की दलील खारिज कर दी। आयोग ने कहा कि सिर्फ FIR दर्ज नहीं होने से क्लेम नहीं रोका जा सकता।
पुलिस को दी गई शिकायत भी घटना की जानकारी देने के लिए पर्याप्त हो सकती है। इस मामले में आयोग ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी को 27 लाख रुपए देने का निर्देश दिया है। आइए जानते हैं पूरा मामला।
FIR नहीं होने पर बीमा कंपनी ने क्यों रोका क्लेम?
यह मामला साल 2003 का है। हरियाणा के पानीपत के इंडस्ट्रियल एरिया में रिंकू शर्मा की हैंडलूम यूनिट थी। उन्होंने इस यूनिट का बीमा न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी से कराया था। इसके लिए 50 लाख रुपए की फायर इंश्योरेंस पॉलिसी ली गई थी। इसी दौरान यूनिट में भीषण आग लग गई थी। घटना के बाद फायर ब्रिगेड और स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद पीड़ित ने बीमा कंपनी के पास क्लेम पेश किया।
जानकारी के मुताबिक, कंपनी ने नुकसान की जांच के लिए सर्वेयर नियुक्त किया। सर्वेयर ने मौके पर जाकर नुकसान का जायजा लिया। उसने घटनास्थल की तस्वीरें भी लीं। इसके बाद कंपनी ने एक के बाद एक तीन सर्वेयर नियुक्त किए।
हालांकि, कंपनी ने क्लेम खारिज कर दिया। उसका कहना था कि पुलिस में सिर्फ रिपोर्ट देना पर्याप्त नहीं है। मामले में FIR दर्ज नहीं हुई थी। कंपनी ने आग लगने का स्पष्ट कारण नहीं मिलने की बात भी कही।
कंज्यूमर कमीशन ने बीमा कंपनी की दलील खारिज की
रिपोर्ट के मुताबिक, क्लेम नहीं मिलने पर रिंकू शर्मा ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत की। उन्होंने बीमा कंपनी के फैसले को चुनौती दी। आयोग ने मामले और उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार किया। राज्य उपभोक्ता आयोग ने कहा कि घटना वाले दिन पुलिस को सूचना दी गई थी। पुलिस ने शिकायत दर्ज की, लेकिन उसे एफआईआर में नहीं बदला।
आयोग के मुताबिक, पुलिस का एफआईआर दर्ज नहीं करना उपभोक्ता की गलती नहीं है। आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी सिर्फ इस वजह से क्लेम खारिज नहीं कर सकती। उपभोक्ता ने समय पर पुलिस को घटना की जानकारी दी थी।
'बीमा क्लेम के लिए FIR जरूरी नहीं'
आयोग ने कहा कि बीमा कंपनियां हर मामले में FIR को अनिवार्य नहीं मान सकती है। खासकर आग या चोरी जैसी घटनाओं में पुलिस को सूचना देना अहम है। आयोग के प्रेसिडेंट जस्टिस जे.डी. कपूर ने कहा कि बीमा क्लेम पाने के लिए पुलिस को दी गई रिपोर्ट ही काफी है, भले ही उसे FIR में न बदला गया हो। यह एक गलत धारणा है कि जब तक बीमा कराने वाला व्यक्ति FIR दर्ज नहीं कराता, तब तक वह किसी क्लेम का हकदार नहीं है। आयोग ने माना कि पुलिस की कार्रवाई के लिए उपभोक्ता जिम्मेदार नहीं है। इसलिए सिर्फ FIR नहीं होने को क्लेम खारिज करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
बीमा क्लेम करते समय इन बातों का रखें ध्यान
- आग या चोरी की घटना होने पर पुलिस को सूचना दें।
- बीमा कंपनी को घटना की जानकारी जल्द दें।
- नुकसान की तस्वीरें और दूसरे सबूत सुरक्षित रखें।
- पुलिस को दी गई शिकायत की कॉपी अपने पास रखें।
- बीमा कंपनी को दिए गए दस्तावेज संभालकर रखें।
- क्लेम खारिज होने पर कारण लिखित में मांगें।
FAQs
- क्या FIR न होने पर बीमा क्लेम खारिज हो सकता है?
इस मामले में आयोग ने कहा कि पुलिस को दी गई रिपोर्ट भी क्लेम के लिए पर्याप्त हो सकती है, इसलिए सिर्फ FIR न होने के आधार पर क्लेम खारिज नहीं किया जा सकता। - यह फैसला कब का है?
यह फैसले की तारीख 5 जनवरी 2009 है, और यह एक पुराना मामला है, जिसकी खबर अब सामने आई है। - बीमाधारक शिकायत कहां कर सकते हैं?
क्लेम खारिज होने पर बीमा कंपनी की शिकायत प्रणाली के बाद बीमा लोकपाल या उपभोक्ता आयोग में शिकायत की जा सकती है।