तीन लाख का फोन और ये हाल! ड्यरेबिलटी टेस्ट में iPhone Duo का निकला दम, भूलकर भी मत खरीदना

Sandeep Kumar | Oct 26, 2026, 20:47 IST
तीन लाख के iPhone Duo की मजबूती पर उठे सवाल
तीन लाख रुपए के iPhone Duo की मजबूती पर सवाल उठे हैं। Apple का यह फोल्डेबल फोन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट में कमजोर साबित हुआ। मशहूर यूट्यूबर JerryRigEverything ने इसकी मजबूती की जांच की। टेस्ट के दौरान फोन का हिंज धूल से प्रभावित हुआ। स्क्रीन पर हरी लाइन भी दिखाई दी। जानिए ड्यूरेबिलिटी टेस्ट में और क्या सामने आया।

फोल्डेबल फोन का हिंज क्यों जाम हुआ?

फोल्डेबल फोन का हिंज उसे खोलने और बंद करने वाला जोड़ होता है। JerryRigEverything ने फोन को पहले धूल और मिट्टी के संपर्क में रखा। इसके बाद फोन को कई बार खोलकर और बंद करके देखा। टेस्ट के दौरान धूल हिंज के अंदर पहुंच गई। इससे हिंज से असामान्य आवाज आने लगी। फोन के दोनों हिस्सों को बंद रखने वाले मैग्नेट भी प्रभावित हुए। इसके चलते फोन को पूरी तरह बंद करने में परेशानी हुई। Apple ने फोन को IP68 रेटिंग दी है। यह रेटिंग धूल और पानी से सुरक्षा को दर्शाती है। हालांकि हिंज जैसे चलने वाले हिस्सों में धूल परेशानी पैदा कर सकती है। इसका मतलब यह नहीं कि IP68 रेटिंग बेकार है।



iFixit की जांच में हिंज पर क्या मिला?

MacRumors की रिपोर्ट के मुताबिक iFixit ने भी फोन खोलकर जांच की। उसके परीक्षण में भी कुछ धूल हिंज तक पहुंची। फोन खोलने और बंद करने पर आवाज भी सुनाई दी। हालांकि कुछ दूसरे फोल्डेबल फोन के मुकाबले iFixit को कम धूल मिली। इससे पता चलता है कि हिंज पूरी तरह धूल से सुरक्षित नहीं है। हर परिस्थिति में ज्यादा धूल पहुंचने का निष्कर्ष भी नहीं निकाला जा सकता।



iPhone Duo की स्क्रीन कितनी मजबूत?

ड्यूरेबिलिटी टेस्ट में फोन की बाहरी स्क्रीन ने अच्छा प्रदर्शन किया। मोह्स स्केल के लेवल 7 पर खरोंच के निशान दिखाई दिए। मोह्स स्केल किसी सतह पर खरोंच पड़ने की क्षमता मापता है। बाहरी स्क्रीन के लिए यह अच्छा संकेत माना गया। वहीं फोन की अंदरूनी स्क्रीन ज्यादा नाजुक निकली। लेवल 2 पर ही खरोंच दिखाई देने लगी। लेवल 3 पर निशान और गहरे हो गए। नाखून से ज्यादा दबाव डालने पर भी स्थायी निशान पड़ सकते हैं। फोन की मैट नैनो-टेक्सचर कोटिंग कुछ निशानों को कम दिखाई देने में मदद करती है। हालांकि यह कोटिंग सभी तरह की खरोंच से सुरक्षा की गारंटी नहीं देती।



उलटी दिशा में मोड़ने पर स्क्रीन पर आई हरी लाइन

ड्यूरेबिलिटी टेस्ट के दौरान फोन पर ज्यादा दबाव डाला गया। इसे सामान्य दिशा के विपरीत पीछे की तरफ मोड़ने की कोशिश की गई। इस दौरान स्क्रीन पर चमकदार हरी लाइन दिखाई देने लगी। इसके बाद अंदरूनी स्क्रीन ने ठीक से काम करना बंद कर दिया। हालांकि यह परीक्षण फोन के सामान्य इस्तेमाल से अलग था। इसलिए इस नतीजे को रोजमर्रा के इस्तेमाल पर लागू नहीं किया जा सकता। सामान्य तरीके से फोन खोलने पर स्क्रीन टूटना तय नहीं है।



क्या पहले भी स्क्रीन में दरार आने की शिकायतें मिलीं?

ड्यूरेबिलिटी टेस्ट से पहले भी कुछ यूजर्स ने स्क्रीन में दरार आने की शिकायत की थी। MacRumors की रिपोर्ट में भी इन शिकायतों का उल्लेख किया गया है। कुछ यूजर्स ने खरीदने के कुछ घंटों बाद ही स्क्रीन खराब होने का दावा किया। एक यूजर के मुताबिक उसने फोन 20 बार से भी कम खोला था। इसके बाद हिंज के पास कुछ अटकने जैसा महसूस हुआ। फिर आवाज आई और स्क्रीन पर दरार दिखाई दी। हालांकि शिकायतों की कुल संख्या और खराबी की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं है। इसलिए इन्हें पूरे मॉडल में खराबी का पक्का सबूत नहीं माना जा सकता।



हिंज के किन हिस्सों पर उठ रहे हैं सवाल?

iFixit ने फोन के हिंज और उसके आसपास के डिजाइन की जांच की। शुरुआती शिकायतों में नुकसान हिंज के अंदरूनी हिस्सों के पास दिखाई दिया। इसकी एक संभावित वजह बीच का सपोर्ट बार हो सकता है। फोन बंद होते समय यह बार पीछे नहीं हटने पर स्क्रीन पर दबाव डाल सकता है। दूसरी संभावना हिंज की गाइड रेल से जुड़ी है। गाइड रेल फोन के हिस्सों की गतिविधि नियंत्रित करती है। हालांकि इन संभावनाओं की अभी पुष्टि नहीं हुई है।



iPhone Duo की स्क्रीन रिपेयर कराने में कितना खर्च?

भारत में आईफोन (iPhone Duo) की कीमत करीब तीन लाख रुपए बताई गई है। इसकी अंदरूनी स्क्रीन बदलवाने का खर्च लगभग 1 लाख 49 हजार 900 रुपए बताया गया है। वहीं बाहरी स्क्रीन की मरम्मत के लिए करीब 42 हजार 900 रुपए खर्च हो सकते हैं। यानी अंदरूनी स्क्रीन बदलवाने में फोन की कीमत का लगभग आधा खर्च हो सकता है।



वारंटी और बीमा से कितनी राहत मिलेगी?

स्क्रीन रिपेयर का वास्तविक खर्च नुकसान की प्रकृति पर निर्भर करेगा। लागू वारंटी और बीमा की शर्तें भी महत्वपूर्ण होंगी। सामान्य इस्तेमाल के दौरान निर्माण संबंधी खराबी आने पर वारंटी से मदद मिल सकती है। हालांकि फोन गिरने या गलत तरीके से मोड़ने से हुआ नुकसान अलग माना जा सकता है।



ड्यूरेबिलिटी टेस्ट क्या होता है ?

ड्यूरेबिलिटी टेस्ट (Durability Test) का मतलब किसी चीज की मजबूती और टिकाऊपन की जांच करना है। मोबाइल फोन के ड्यूरेबिलिटी टेस्ट में देखा जाता है कि फोन कितनी टूट-फूट और दबाव सह सकता है। इस दौरान फोन की स्क्रीन पर खरोंच लगाकर जांच की जाती है। फोन को मोड़कर उसकी मजबूती परखी जाती है। धूल और मिट्टी से भी फोन की जांच होती है। फोल्डेबल फोन के हिंज की मजबूती भी परखी जाती है।

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