आईपीएस अफसरों के लिए अब AI और साइबर सिक्योरिटी की पढ़ाई जरूरी, हर साल करना होगा कोर्स, प्रमोशन पर पड़ेगा असर
IPS अफसर पढ़ेंगे साइबर सिक्योरिटी का पाठ
खास बात यह है कि इन कोर्स का रिकॉर्ड उनकी सालाना परफॉर्मेंस रिपोर्ट में भी जुड़ेगा। यानी अब अफसरों के कामकाज के साथ यह भी देखा जाएगा कि उन्होंने नई तकनीक की कितनी ट्रेनिंग ली है।
गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को भेजा पत्र
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस बारे में सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजा है। इसमें बताया गया है कि आईपीएस अफसरों को अब हर साल ऑनलाइन ट्रेनिंग लेनी होगी।
यह फैसला कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के निर्देशों के बाद लिया गया है। सरकार चाहती है कि पुलिस अफसर बदलती तकनीक के साथ खुद को भी अपडेट रखें।
दरअसल, अब अपराध के तरीके भी बदल रहे हैं। ऑनलाइन ठगी से लेकर साइबर अपराध तक के मामले सामने आते रहते हैं। ऐसे में पुलिस अफसरों को नई तकनीक की जानकारी होना जरूरी है।
24 कोर्स तय, तीन करना जरूरी
गृह मंत्रालय ने आईपीएस अफसरों के लिए कुल 24 कोर्स चुने हैं। अफसरों को उनकी नौकरी के अनुभव के आधार पर चार हिस्सों में बांटा गया है। हर हिस्से के लिए छह कोर्स रखे गए हैं। इनमें से पहले तीन कोर्स पूरे करना जरूरी होगा।
बता दें कि ये सभी कोर्स सरकार के iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगे। अफसरों को हर साल निर्धारित ट्रेनिंग पूरी करनी होगी। इसकी जानकारी उनकी सालाना परफॉर्मेंस रिपोर्ट में भी शामिल की जाएगी।
9 साल तक की नौकरी वाले अफसर क्या सीखेंगे?
जिन आईपीएस अफसरों की नौकरी को अभी नौ साल या उससे कम समय हुआ है, उन्हें नई तकनीक की शुरुआती जानकारी दी जाएगी। उन्हें बताया जाएगा कि साइबर सुरक्षा क्या होती है और डिजिटल दुनिया में किस तरह के खतरे सामने आ सकते हैं।
इसके अलावा तलाशी लेने और सामान जब्त करने की कानूनी प्रक्रिया से जुड़े कोर्स भी करने होंगे। इस ट्रेनिंग से अफसरों को जांच के दौरान तकनीक और कानूनी प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।
16 साल तक के अनुभव वालों को अलग ट्रेनिंग
दूसरी श्रेणी में उन अफसरों को रखा गया है, जिनकी नौकरी का अनुभव 16 साल तक है। इन्हें नई तकनीक के साथ आपराधिक न्याय व्यवस्था से जुड़ी डिजिटल प्रणाली के बारे में पढ़ाया जाएगा। इसमें इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम यानी ICJS की जानकारी भी शामिल है।
आसान भाषा में समझें तो यह ऐसी व्यवस्था है, जिसके जरिए पुलिस, अदालत, जेल और दूसरी संबंधित संस्थाओं के बीच अपराध से जुड़ी जानकारी साझा की जा सकती है। अफसरों को बताया जाएगा कि यह सिस्टम कैसे काम करता है और इसका इस्तेमाल किस तरह किया जाता है।
16 से 25 साल वाले अफसर सीखेंगे ChatGPT चलाना
जिन आईपीएस अफसरों का अनुभव 16 से 25 साल के बीच है, उन्हें AI और ChatGPT जैसे टूल्स की जानकारी भी दी जाएगी। इसके अलावा साइबर सुरक्षा, नई तकनीक और सबूतों के आधार पर फैसले लेने जैसे विषय भी पढ़ाए जाएंगे।
अफसरों को यह भी सिखाया जाएगा कि किसी बात को प्रभावी तरीके से कैसे समझाया और पेश किया जाए। इसे आर्ट ऑफ स्टोरीटेलिंग कहा जाता है। इस ट्रेनिंग का मकसद अफसरों को नई तकनीक समझाना और उनके कामकाज को बेहतर बनाने में मदद करना है।
25 साल से ज्यादा अनुभव वालों को भी करना होगा कोर्स
ऐसा नहीं है कि सिर्फ नए अफसरों को ही पढ़ाई करनी होगी। जिन आईपीएस अफसरों की नौकरी को 25 साल से ज्यादा हो चुके हैं, उन्हें भी ट्रेनिंग लेनी होगी। इनके लिए भी नई तकनीक और दूसरे जरूरी विषयों से जुड़े कोर्स रखे गए हैं। इसके साथ ही इन्हें इंटीग्रेटिव वेलनेस का कोर्स भी कराया जाएगा।
इसमें शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बातें शामिल होती हैं। इसका मकसद अफसरों को अपनी सेहत और काम के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद करना है।
क्या है iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म?
iGOT कर्मयोगी केंद्र सरकार का ऑनलाइन ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म है। इस पर सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए अलग-अलग कोर्स उपलब्ध हैं। अफसर अपनी जरूरत और जिम्मेदारी के हिसाब से यहां नई चीजें सीख सकते हैं।
अब आईपीएस अफसरों को भी इसी प्लेटफॉर्म पर तय किए गए कोर्स पूरे करने होंगे। सरकार का मकसद है कि अफसर नौकरी के दौरान भी लगातार कुछ नया सीखते रहें।
पुलिस अफसरों को AI सीखने की जरूरत क्यों पड़ी?
आजकल अपराधी भी नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऑनलाइन ठगी, फर्जी वीडियो, आवाज की नकल और डिजिटल धोखाधड़ी जैसे मामले पुलिस के सामने चुनौती बन रहे हैं।
AI की मदद से असली जैसे दिखने वाले नकली फोटो और वीडियो भी बनाए जा सकते हैं। ऐसे में पुलिस अफसरों के लिए इन तकनीकों को समझना जरूरी हो गया है।
इसके अलावा साइबर अपराधों की जांच में डिजिटल सबूतों की अहम भूमिका होती है। इन सबूतों को समझने और सुरक्षित रखने के लिए तकनीकी जानकारी काम आती है। सरकार की कोशिश है कि पुलिस अफसर इन बदलावों को समझें और नई चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकें।
FAQ
- आईपीएस अफसरों के लिए नई तकनीक की पढ़ाई क्यों आवश्यक है?
आईपीएस अफसरों के लिए नई तकनीक की पढ़ाई आवश्यक है क्योंकि अपराधों के तरीके बदल रहे हैं, जैसे ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध। नई तकनीक की जानकारी से अफसर इन्हें बेहतर ढंग से समझ सकते हैं और इनसे निपटने में सक्षम होंगे। - आईपीएस अफसरों को कितने ऑनलाइन कोर्स करने होंगे और उनकी संरचना क्या है?
आईपीएस अफसरों को हर साल कुल 24 ऑनलाइन कोर्स में से तीन कोर्स करने होंगे, जिन्हें नौकरी के अनुभव के आधार पर चार श्रेणियों में बांटा गया है। - iGOT कर्मयोगी प्लेटफार्म क्या है और यह आईपीएस अफसरों के लिए कैसे उपयोगी है?
iGOT कर्मयोगी केंद्र सरकार का ऑनलाइन ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म है, जहां आईपीएस अफसरों को नई तकनीक और अन्य आवश्यक विषयों से जुड़े कोर्स पूरे करने होंगे, जिसका उद्देश्य उन्हें नौकरी के दौरान निरंतर सीखने में मदद करना है।