रिटायर आईपीएस ए.बी. वेंकटेश्वर राव ने DGP समेत 10 को भेजा एक करोड़ का कानूनी नोटिस
News In Short
- रिटायर आईपीएस अफसर ए.बी. वेंकटेश्वर राव ने 10 अधिकारियों को नोटिस भेजा।
- नोटिस में 1 करोड़ रुपए हर्जाने की मांग की गई है।
- आरोप है कि उन्हें एक खरीद मामले में झूठा फंसाया गया।
- रिकॉर्ड में हेरफेर, गैरकानूनी सस्पेंशन और बदनामी के आरोप हैं।
- आंध्र प्रदेश सरकार को भी नोटिस में पक्षकार बनाया गया है।
News In Detail
रिटायर आईपीएस का बड़ा कदम
आंध्र प्रदेश के रिटायर आईपीएस (Indian Police Service) अफसर ए.बी. वेंकटेश्वर राव ने एक साथ कई बड़े नामों को कानूनी नोटिस थमाया है। इनमें सेवारत और सेवानिवृत्त दोनों तरह के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हैं। यह कदम पुलिस महकमे में हलचल मचाने वाला है।
नोटिस में पूर्व डीजीपी डी. गौतम सावंग और आर.पी. ठाकुर के नाम सबसे ऊपर हैं। इनके अलावा सीआईडी (Criminal Investigation Department) के महानिदेशक रवि शंकर अय्यनार, पी.वी. सुनील कुमार, पी.एस.आर. अंजनेयुलु और के. राघुरामी रेड्डी को भी नोटिस मिला है।
रिटायर अतिरिक्त एसपी सीआईडी आर. विजय पॉल, डीजीपी कार्यालय के रिटायर मुख्य लेखा अधिकारी सी. गोविंद राजन, एसीबी (Anti-Corruption Bureau) के अतिरिक्त एसपी एस. साई कृष्णा और पूर्व सीपीआरओ (Chief Public Relations Officer) पुडी श्रीहरि भी इस सूची में हैं।
आंध्र प्रदेश सरकार को भी बनाया पक्षकार
रिटायर आईपीएस ए.बी. वेंकटेश्वर राव ने सिर्फ अधिकारियों तक ही नहीं रुके। उन्होंने सीपीसी यानी दीवानी प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 80 के तहत आंध्र प्रदेश राज्य को भी नोटिस भेजा है। राज्य की तरफ से मुख्य सचिव इस मामले में पक्षकार हैं।
धारा 80 के तहत नोटिस भेजने का मतलब है कि वे सरकार के खिलाफ अदालत में दावा दायर करने से पहले कानूनी तौर पर जरूरी सूचना दे रहे हैं। यह प्रक्रिया यह दिखाती है कि वेंकटेश्वर राव मामले को पूरी कानूनी तैयारी के साथ आगे ले जाना चाहते हैं।
क्या हैं आरोप?
वेंकटेश्वर राव ने नोटिस में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें एक मामले में झूठा फंसाया गया और बिना वजह प्रताड़ित किया गया। उन पर जो मामला बनाया गया वह सुरक्षा और निगरानी उपकरणों की खरीद से जुड़ा था। इसमें एयरोस्टैट (Aerostat) यानी हवा में तैरने वाला निगरानी गुब्बारा और यूएवी (Unmanned Aerial Vehicles) यानी मानवरहित हवाई वाहन शामिल थे।
यह खरीद एसटीसी (State Trading Corporation of India) के जरिए की जानी थी। इसका मकसद नक्सल प्रभावित इलाकों और सुरक्षा अभियानों में निगरानी रखना था। वेंकटेश्वर राव का कहना है कि इस पूरे मामले में उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया।
नोटिस में किन मांगों का जिक्र?
नोटिस में 1 करोड़ रुपए हर्जाने की मांग की गई है। इसके अलावा झूठे मुकदमे यानी मैलिशियस प्रॉसिक्यूशन (Malicious Prosecution) के लिए मुआवजा मांगा गया है। गैरकानूनी निलंबन, सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर और बदनामी के आरोप भी लगाए गए हैं।
पुलिस महकमे में क्यों है हलचल?
यह मामला इसलिए असाधारण है क्योंकि एक रिटायर आईपीएस अफसर ने अपने ही विभाग के मौजूदा और पूर्व वरिष्ठ अफसरों को कानूनी नोटिस थमाया है।
पुलिस की दुनिया में इस तरह के कदम बहुत कम देखने को मिलते हैं। इससे यह भी जाहिर होता है कि वेंकटेश्वर राव का मानना है कि उनके साथ जो हुआ वह पूरी तरह गलत और जानबूझकर किया गया था।
फिलहाल इस मामले में किसी भी नोटिस पाने वाले अधिकारी की तरफ से कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया है।
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