47 साल की दूरी मिटाने की कोशिश: ईरान-अमेरिका वार्ता में उठे सुरक्षा, सेना और अर्थव्यवस्था के मुद्दे
News In Short
- इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका वार्ता का दूसरा दौर शुरू।
- 47 साल बाद दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक बैठक हुई।
- ईरान ने लेबनान पर इजराइली हमले रोकने की मांग की।
- वेंस और गालिबाफ ने अपने-अपने देशों का नेतृत्व किया।
- विफल वार्ता की जिम्मेदारी ईरान ने अमेरिका पर डाली।
News In Detail
ईरान अमेरिका जंग:पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका सीजफायर वार्ता (Iran-America Ceasefire Talks) का दूसरा दौर शुरू हो गया है। 47 साल बाद दोनों देशों के नेता इस स्तर पर आमने-सामने बैठे।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद स्पीकर गालिबाफ इस ऐतिहासिक शांति वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं। यह वार्ता मध्य-पूर्व में स्थायी शांति की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
इस्लामाबाद बना वार्ता का केंद्र
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर वार्ता (Ceasefire Talks) का दूसरा दौर शुरू हो गया है। पहला राउंड लगभग दो घंटे तक चला।
इस दौर में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने सुरक्षा, राजनीति, सेना, अर्थव्यवस्था और कानून से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा की। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद पहली बार हो रही है। दोनों देशों के नेता इतने बड़े स्तर पर सीधे आमने-सामने बैठे हैं।
वेंस और गालिबाफ की अगुवाई में बैठक
अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं। ईरान की ओर से संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ इस बैठक की अगुवाई कर रहे हैं।
इस्लामाबाद रवाना होने से पहले वेंस ने कहा था कि उन्हें बातचीत से अच्छे नतीजों की उम्मीद है। साथ ही उन्होंने ईरान को चेतावनी दी कि वह अमेरिका के साथ कोई चालाकी न करे। दोनों नेताओं की यह मुलाकात अंतरराष्ट्रीय कूटनीति (International Diplomacy) के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।
ईरान की मांग: लेबनान पर हमले तुरंत बंद हों
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वार्ता के दौरान ईरान ने एक स्पष्ट मांग रखी। ईरान ने कहा कि लेबनान पर इजराइली हमले तुरंत बंद होने चाहिए। यह मांग मध्य-पूर्व शांति प्रक्रिया (Middle East Peace Process) के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। ईरान का मानना है कि बिना लेबनान संघर्ष विराम के कोई स्थायी समझौता संभव नहीं है। यह स्थिति वार्ता को और जटिल बनाती है।
ट्रम्प की चेतावनी और पाकिस्तान की भूमिका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को साफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर पीस डील नहीं हुई तो अमेरिका फिर से हमला करेगा। वहीं पाकिस्तान ने इस वार्ता में मध्यस्थ (Mediator) की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर, विदेश मंत्री इशाक डार और गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने वेंस का स्वागत किया। इससे पहले आसिम मुनीर शुक्रवार रात ईरानी प्रतिनिधिमंडल को रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचे थे।
विफलता की जिम्मेदारी अमेरिका पर: ईरान
ईरान ने वार्ता से पहले एक कड़ा बयान दिया था। उसने कहा कि अगर इस्लामाबाद वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंची, तो सिर्फ इजराइल को दोषी नहीं ठहराया जाएगा।
ईरान का कहना है कि इजराइल और अमेरिका के फैसले आपस में जुड़े हुए हैं। इसलिए वार्ता विफल होने पर जिम्मेदारी अमेरिका पर भी होगी। यह बयान अंतरराष्ट्रीय संबंधों (International Relations) में ईरान की सख्त स्थिति को दर्शाता है।
लेबनान-इजराइल वार्ता की अगली कड़ी
इस्लामाबाद वार्ता के साथ ही एक और अहम बैठक की तैयारी चल रही है। लेबनान और इजराइल के बीच 14 अप्रैल को अमेरिका में सीजफायर पर बातचीत शुरू होगी।
यह कदम मध्य-पूर्व में व्यापक शांति प्रयासों (Peace Efforts) का हिस्सा माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इन दोनों वार्ताओं का नतीजा क्षेत्रीय स्थिरता (Regional Stability) पर गहरा असर डालेगा। दुनिया की नजरें अब इस्लामाबाद और वाशिंगटन दोनों पर टिकी हैं।
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