ईरान बनाम अमेरिका-इजराइल: The Economist का दावा- ट्रंप के पास ईरान पर विकल्प कम हैं

Anjali Dwivedi | Mar 28, 2026, 14:00 IST
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अमेरिका- इजराइल के हमलों के बाद भी ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्जा बनाए रखा। The Economist के अनुसार ईरान रणनीतिक रूप से मजबूत है और ट्रंप के पास सीमित विकल्प हैं। आइए समझते हैं पूरा मामला…

5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

  • 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत हमले किए।
  • जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दुश्मन देशों के जहाजों के लिए बंद कर दिया।
  • इस बंदी से दुनिया के 20% तेल और 20% एलएनजी (LNG- Liquefied Natural Gas) की आपूर्ति प्रभावित हुई।
  • The Economist ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ईरान अमेरिका-इजराइल से ज्यादा मजबूत स्थिति में है।
  • ट्रंप के पास ईरान पर दबाव बनाने के लिए बहुत कम विकल्प बचे हैं और यह संकट लंबा खिंच सकता है।

ऑपरेशन एपिक फ्यूरी क्या था?

मिडिल ईस्ट में अब तक का सबसे बड़ा सैन्य टकराव शुरू हुआ। शनिवार 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान (अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग) पर हवाई हमले किए। इस ऑपरेशन का नाम था ऑपरेशन एपिक फ्यूरी। इसका मकसद ईरान के परमाणु ठिकाने, सैन्य केंद्र और नेतृत्व को निशाना बनाना था।



यह टकराव तब हुआ जब जिनेवा में ईरान के साथ परमाणु वार्ता विफल हो गई। जून 2025 में 12 दिनों तक चले युद्ध में ईरान को काफी नुकसान हो चुका था। फिर भी ईरान ने हार नहीं मानी।



ईरान ने होर्मुज बंद किया

हमलों के जवाब में ईरान ने वह कदम उठाया जिससे पूरी दुनिया डरती थी। ईरान के IRGC (Islamic Revolutionary Guard Corps- इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर) ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका, इजराइल और उनके सहयोगी देशों के जहाजों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया।



अंतरराष्ट्रीय संकट समूह (International Crisis Group) के ईरान प्रोजेक्ट निदेशक अली वाएज ने कहा कि होर्मुज बंद होने से रातोंरात दुनिया के 20% व्यापारिक तेल की आपूर्ति ठप हो सकती है।



उनके अनुसार कीमतें सिर्फ बढ़ेंगी नहीं, बल्कि अचानक उछाल मारेंगी। इसका असर ऊर्जा बाजार के पार जाएगा, महंगाई बढ़ेगी और कमजोर अर्थव्यवस्थाएं मंदी की चपेट में आएंगी।



तेल और गैस की कीमतें आसमान पर

ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतें 8 मार्च 2026 को 100 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गईं। यह चार साल में पहली बार हुआ। फिर यह 126 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंचा। इसे 1970 के दशक के ऊर्जा संकट के बाद सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।



यूरोप में गैस की कीमतें लगभग दोगुनी हो गईं। यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने ब्याज दरों में कमी की अपनी योजना रोक दी। ब्रिटेन में महंगाई 5% से ज्यादा होने का अनुमान लगाया गया।



कतर की रास लाफान (Ras Laffan) गैस सुविधा पर हमले के बाद दुनिया के 20% एलएनजी की आपूर्ति खतरे में पड़ गई।



The Economist ने क्या कहा?

The Economist ने लिखा कि ईरान ने अपने संयमित और सुविचारित रवैए से रणनीतिक बढ़त हासिल कर ली है। पत्रिका के मुताबिक ईरान का नेतृत्व शांत रहा और इसी ने उसकी स्थिति मजबूत की। कई अधिकारियों और नागरिकों की मौत के बावजूद ईरान ने नियंत्रण बनाए रखा।



साथ ही यह भी कहा कि इस युद्ध में जिंदा रहना भी ईरान के लिए एक बड़ी सफलता है। ईरान का मानना है कि उसने दुश्मन से ज्यादा नुकसान उठाने और नुकसान पहुंचाने की क्षमता दिखाई है।



ट्रंप के विकल्प क्यों सीमित?

अमेरिका ने ईरान के सामने 15 सूत्रीय समझौते का प्रस्ताव रखा। इसमें परमाणु कार्यक्रम बंद करने, होर्मुज खोलने और मिसाइल क्षमता घटाने की मांग शामिल थी। बदले में अमेरिका ने प्रतिबंध हटाने और परमाणु ऊर्जा के विकास में मदद का वादा किया। लेकिन ईरान ने इसे नहीं माना।



सीएसआईएस (CSIS- Center for Strategic and International Studies) के विशेषज्ञ जॉन ऑल्टरमैन ने न्यूयॉर्क टाइम्स में लिखा कि अमेरिका इजराइल की रणनीति की तरफ खिसकता जा रहा है, जिसमें बार-बार हमले हो रहे हैं लेकिन कोई स्पष्ट लक्ष्य नहीं है। उन्होंने पूछा कि जब समस्या सुलझाने की बजाय लगातार युद्ध होता रहे तो क्या होगा?



भारत और भारतीय जहाजों का क्या हुआ?

ईरान ने चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान के जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी। भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन संकल्प के तहत पांच भारतीय एलपीजी (LPG संकट) जहाजों को होर्मुज से सुरक्षित निकाला। यह भारतीय नौसेना की बड़ी सफलता थी।



आगे क्या होगा?

ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनी ने कहा है कि जब तक अमेरिका दबाव बनाना बंद नहीं करता, होर्मुज बंद रहेगा। दुनिया के लिए यह सबसे बड़ा ऊर्जा संकट बन चुका है। ट्रंप ने दावा किया कि युद्ध लगभग खत्म हो गया। लेकिन फिर खुद ही कहा कि सबसे तेज हमले अभी होने हैं। यह दोहरापन बताता है कि अमेरिका के पास भी कोई स्पष्ट रणनीति नहीं है।



FAQ

  1. होर्मुज जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की जीवन रेखा है। इसके एक तरफ ईरान है और दूसरी तरफ ओमान। हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल तेल यहां से गुजरता है, जो वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20-30% है। इसके अलावा दुनिया का करीब 20% एलएनजी भी यहीं से जाता है। कतर, सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई जैसे देशों का तेल इसी रास्ते से एशिया, यूरोप और अमेरिका पहुंचता है। अगर यह रास्ता बंद हो तो कुछ ही हफ्तों में दुनियाभर में ईंधन की भारी किल्लत हो सकती है।
  2. The Economist ने ईरान को मजबूत क्यों बताया, जबकि उस पर हमले हुए हैं?
    The Economist का तर्क बहुत दिलचस्प है। पत्रिका के अनुसार ईरान पर हमले हुए, नुकसान हुआ, कुछ नेता मारे गए। लेकिन ईरान बिखरा नहीं। उसने होर्मुज बंद करके पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला दिया। यही उसकी ताकत है। दूसरी तरफ ट्रंप के पास सैन्य हमलों के अलावा कोई ठोस विकल्प नहीं है। प्रतिबंध पहले से ही लगे हैं। वार्ता के लिए ईरान तैयार नहीं। और सैन्य हमलों से समस्या हल नहीं हो रही, बल्कि बढ़ रही है। इसलिए पत्रिका ने कहा कि ईरान रणनीतिक फायदे में है।
  3. इस युद्ध का भारत पर क्या असर पड़ा?
    भारत के लिए यह संकट बहुत जटिल रहा। एक तरफ भारत ईरान से तेल खरीदता है, दूसरी तरफ उसके अमेरिका और इजराइल से भी संबंध हैं। होर्मुज बंद होने से भारतीय जहाजों पर भी खतरा मंडराया। भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन संकल्प के तहत पांच एलपीजी जहाजों को सुरक्षित निकाला। ईरान ने भारत को दोस्त देश माना और उसके जहाजों को गुजरने दिया। लेकिन तेल की बढ़ती कीमतों से भारत की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा, पेट्रोल-डीजल महंगे हुए और व्यापारिक कंपनियों का खर्च बढ़ा।

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