भारतीय जहाज को होर्मुज में ग्रीन सिग्नल, ट्रंप ने कहा- ईरान डील के लिए तड़प रहा है
Iran Israel War Update: ईरान और इजराइल के बीच जंग अब बेहद गंभीर मोड़ पर है। समंदर से लेकर संसद तक भारी हलचल मची हुई है। ईरान ने भारत के जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने का वादा किया है। उधर डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध के लिए संसद की मंजूरी टाल दी है।
अमेरिकी बेड़ा समंदर में अपनी ताकत बढ़ाने में जुटा हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दखल देने पर जर्मनी को भी कड़ी चेतावनी दी है। हालांकि, 7 अप्रैल के बाद से कोई गोली नहीं चली है। ट्रंप का दावा है कि ईरान अब समझौता करना चाहता है।
जंग रुकने पर पेट्रोल के दाम घटने की भी उम्मीद है। इजराइल ने साफ किया है कि खतरा बढ़ा तो हमला जरूर होगा। सुप्रीम लीडर की सेहत को लेकर ईरान ने अफवाहें खारिज की हैं।
होर्मुज की लहरों पर भारत को हरी झंडी
ईरान ने साफ कर दिया है कि तनाव के बावजूद भारत जैसे दोस्त देशों के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से गुजरने में कोई दिक्कत नहीं होगी। भारत में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहाली ने कहा कि जो देश अमेरिका-इजराइल की कार्रवाई में शामिल नहीं हैं, उनके लिए रास्ता खुला है।
चाबहार पोर्ट का काम भी तेजी से चल रहा है और वहां की रेलवे लाइन का 90% काम पूरा हो चुका है। साथ ही, उन्होंने भरोसा दिलाया कि ईरान में रहने वाले 10 हजार भारतीय पूरी तरह सुरक्षित हैं।
ट्रंप का नया दांव: संसद की मंजूरी की जरूरत नहीं!
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध को आगे बढ़ाने के लिए संसद से इजाजत लेने का प्लान फिलहाल टाल दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का तर्क है कि 07 अप्रैल को हुए सीजफायर (युद्धविराम) की वजह से 60 दिन वाली समय सीमा रुक गई है, इसलिए अभी वोटिंग की जरूरत नहीं। उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया कि इस वक्त सबसे बड़ा खतरा ईरान नहीं, बल्कि युद्ध का विरोध करने वाले नेता हैं।
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ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जुबानी जंग और समुद्र में बढ़ती हलचल को आप इस आसान रिपोर्ट से समझ सकते हैं:
1. समंदर में अमेरिकी किलेबंदी तेज
अमेरिकी नौसेना अपनी ताकत को फिर से दुरुस्त करने में जुट गई है। सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने तस्वीरें साझा की हैं जिनमें यूएसएस डेलबर्ट डी ब्लैक जैसे युद्धपोतों पर भारी मात्रा में ईंधन, राशन और हथियार लादे जा रहे हैं। मकसद साफ है- अमेरिकी बेड़ा लंबे समय तक मोर्चे पर डटा रहे।
2. जर्मनी को ट्रंप की दो टूक: अपने काम से काम रखें
ट्रंप ने जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज को सोशल मीडिया पर जमकर खरी-खोटी सुनाई है। ट्रंप का कहना है कि चांसलर को ईरान के मामले में टांग अड़ाने के बजाय रूस-यूक्रेन युद्ध रुकवाने और अपने देश की बिजली-पानी की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। नाराजगी इतनी है कि ट्रंप ने जर्मनी से अमेरिकी सैनिक वापस बुलाने तक की धमकी दे दी है।
3. युद्धविराम या युद्ध का अंत?
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी में शुरू हुई अमेरिका-ईरान की यह जंग अब खत्म मानी जा रही है। 7 अप्रैल के बाद से दोनों सेनाओं के बीच एक भी गोली नहीं चली है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि दो हफ्ते का जो सीजफायर शुरू हुआ था, उसे अब आगे बढ़ा दिया गया है।
3. लेबनान और इजराइल को आमने-सामने लाने की कोशिश
अमेरिका अब चाहता है कि इजराइली पीएम नेतन्याहू और लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन सीधी मेज पर बैठकर बात करें। अमेरिकी दूतावास का कहना है कि इससे लेबनान को अपनी सीमाओं की सुरक्षा और आर्थिक मदद की गारंटी मिलेगी। हालांकि, लेबनान के पीएम नवाफ सलाम ने शर्त रखी है कि जब तक इजराइल उनकी जमीन पूरी तरह खाली नहीं करता, कोई समझौता नहीं होगा।
4. ट्रंप का दावा: ईरान डील के लिए तड़प रहा है
ट्रंप का दावा है कि ईरान की हालत अंदरूनी तौर पर काफी खराब है और वह समझौता करने के लिए बेताब है। उन्होंने कहा कि ईरान के नेता जनता के सामने भले ही कुछ भी कहें, लेकिन पर्दे के पीछे वे नाकाबंदी (Blockade) से परेशान हैं और जल्द से जल्द रास्ता निकालना चाहते हैं।
5. जंग रुकी तो घटेगी पेट्रोल की महंगाई
आम आदमी के लिए राहत की खबर देते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध पूरी तरह खत्म होते ही पेट्रोल के दाम नीचे गिर जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्हें इस साल उत्तरी अमेरिका में होने वाले फीफा वर्ल्ड कप में ईरान की टीम के खेलने से कोई ऐतराज नहीं है।
6. इजराइल की चेतावनी: खतरा बढ़ा तो फिर करेंगे हमला
भले ही शांति की बातें हो रही हों, लेकिन इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने तेवर कड़े रखे हैं। उन्होंने कहा कि अगर ईरान फिर से कोई खतरा पैदा करता है, तो वे दोबारा हमला करने से नहीं चूकेंगे। काट्ज के मुताबिक, इस पूरे अभियान में ट्रंप और नेतन्याहू कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं।
7. सुप्रीम लीडर की सेहत पर अफवाहों का बाजार गर्म
ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई की तबीयत बिगड़ने की खबरों को राजदूत फतहाली ने सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि खामेनेई पूरी तरह स्वस्थ हैं और देश के हालातों पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने इन खबरों को केवल मनोबल गिराने वाली साजिश बताया।
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