ईरान-इजराइल युद्ध का 57वां दिन: पाकिस्तान बना शांति का अखाड़ा, कागजों पर सीजफायर, जमीन पर हो रही बमबारी
Iran Israel War Update: ईरान और इजराइल के बीच युद्ध अब 57वें दिन में पहुंच गया है। पाकिस्तान अब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का बड़ा अड्डा बन चुका है। ईरान के विदेश मंत्री और ट्रंप के खास दूत इस्लामाबाद पहुंच गए हैं। हालांकि ईरान अमेरिका से सीधे तौर पर बात करने को तैयार नहीं है।
रूस ने अमेरिका पर सिर्फ तेल के लिए युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया। उधर पनामा नहर में जहाजों से करोड़ों की वसूली की जा रही है। अमेरिका ने ईरानी तेल बेचने वाली चीनी कंपनियों पर भी कड़ा एक्शन लिया है। लेबनान में सीजफायर की चर्चाओं के बीच बमबारी और मौतें जारी हैं। ट्रंप ने युद्ध में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को बेवकूफी भरा बताया है।
अमेरिका-ईरान में दूरी वाली नजदीकी
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के लिए पाकिस्तान का मंच तैयार है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने खास दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर को वहां भेजा है।
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका इसे सीधी शांति वार्ता कह रहा है, जबकि ईरान ने साफ इनकार किया है कि वह सीधे बात करेगा। ईरान का कहना है कि वह अपनी बात पाकिस्तान के जरिए ही पहुंचाएगा। यानी बीच में पाकिस्तान एक बिचौलिए की भूमिका में होगा।
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ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जुबानी जंग और समुद्र में बढ़ती हलचल को आप इस आसान रिपोर्ट से समझ सकते हैं:
1. रूस का आरोप: अमेरिका की नजर सिर्फ तेल पर है
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान और वेनेजुएला में जो भी सैन्य दखल देता है, उसका असली मकसद सिर्फ वहां का तेल हड़पना है। लावरोव के मुताबिक, अमेरिका अपने फायदे के लिए किसी भी देश के नेता की हत्या या तख्तापलट तक करा सकता है। उन्होंने चिंता जताई कि अब अंतरराष्ट्रीय कानून की कोई कीमत नहीं रह गई है, बस जिसकी लाठी उसकी भैंस वाला हिसाब चल रहा है।
2. रास्ता बंद तो जेब ढीली: पनामा नहर में लगी बोली
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से समुद्री व्यापार का गणित बिगड़ गया है। जहाजों को अब पनामा नहर से गुजरना पड़ रहा है। वहां इतनी भीड़ है कि जल्दी निकलने के चक्कर में कंपनियां नीलामी में करोड़ों रुपए लुटा रही हैं। एक-एक जहाज को रास्ता पाने के लिए करीब 36 करोड़ रुपए तक की एक्स्ट्रा फीस देनी पड़ रही है। जाहिर है, जब माल ढुलाई इतनी महंगी होगी, तो दुकानों पर मिलने वाली चीजों के दाम भी बढ़ेंगे।
3. चीन पर अमेरिका की सख्ती: तेल के खेल पर लगाम
अमेरिका ने ईरान के छिपे हुए तेल नेटवर्क को तोड़ने के लिए बड़ा कदम उठाया है। चीन की 40 शिपिंग कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जो चोरी-छिपे ईरानी तेल बेच रही थीं। इसके अलावा, चीन की बड़ी रिफाइनरी हेंगली को भी ब्लैकलिस्ट किया गया है। अमेरिका का मकसद ईरान की कमाई के रास्तों को पूरी तरह ब्लॉक करना है।
4. कागजों पर शांति, जमीन पर जंग: लेबनान में फिर बरसे बम
इजराइल और लेबनान के बीच सीजफायर की बातें तो हो रही हैं, लेकिन हमले रुक नहीं रहे हैं। दक्षिणी लेबनान में इजराइली हवाई हमलों में 6 लोगों की जान चली गई है। इजराइल का कहना है कि उसने हिजबुल्लाह के रॉकेट लॉन्चर्स को निशाना बनाया, जबकि हिजबुल्लाह ने भी इजराइली सेना की गाड़ी पर हमला करने का दावा किया है। यानी सीजफायर के बावजूद तनाव जस का तस है।
5. ट्रंप का दो टूक जवाब: परमाणु हथियार का सवाल ही बेवकूफी
जब डोनाल्ड ट्रंप से पूछा गया कि क्या वे ईरान के खिलाफ परमाणु बम का इस्तेमाल करेंगे, तो उन्होंने इसे बेवकूफी भरा सवाल बताया। ट्रंप ने साफ कहा कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किसी को भी नहीं करना चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि अमेरिका के पास पर्याप्त तेल और मजबूत अर्थव्यवस्था है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि होर्मुज के बजाय अब कई जहाज सीधे अमेरिका की तरफ रुख कर रहे हैं।
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