होर्मुज संकट पर भारत ने दिखाए कड़े तेवर, ईरान बोला- जो हमारे साथ, रास्ता सिर्फ उसके लिए
Iran Israel War Update: ईरान-इजराइल युद्ध आज 79वें दिन में पहुंच गया है। अब खाड़ी में बारूद की गंध और तेज हो गई है। होर्मुज संकट पर भारत ने बेहद कड़े तेवर दिखाए हैं। भारत ने कहा कि व्यापारिक जहाजों को रोकना बर्दाश्त नहीं होगा। उधर, ईरान होर्मुज स्ट्रेट में नया ट्रैफिक सिस्टम ला रहा है। ईरान सिर्फ बात मानने वाले देशों को ही रास्ता देगा। वह इसके बदले भारी टैक्स भी वसूलने की तैयारी में है।
ईरान ने कुवैत और यूएई को भी खुली धमकी दी है। इस महासंकट के बीच अब चीन और रूस भी कूद पड़े हैं। ईरान ने दुश्मन देशों के सैन्य जहाजों पर नाकेबंदी कर दी है। ईरान ने साफ कहा है कि बातचीत टूटी तो जंग होगी। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प दोबारा बड़े हमले की तैयारी में हैं। अमेरिकी सेना की स्पेशल फोर्सेज ईरान के न्यूक्लियर साइट पर नजरें गड़ाए हैं। मिडिल-ईस्ट में 50 हजार अमेरिकी सैनिक बिल्कुल अलर्ट पर हैं। हालात बेहद नाजुक हैं और दुनिया पर बड़ा संकट मंडरा रहा है।
होर्मुज संकट पर भारत ने दिखाए कड़े तेवर
भारत ने साफ कर दिया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों को रोकना या उनके रास्ते में अड़ंगा डालना बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने न्यूयॉर्क में एक खास बैठक के दौरान कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का हर हाल में पालन होना चाहिए।
उन्होंने चिंता जताई कि पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में चल रही जंग की वजह से पूरी दुनिया में बिजली, तेल और खाद (उर्वरक) का संकट गहरा रहा है। हरीश ने दोटूक कहा कि व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना और उनके क्रू की जान खतरे में डालना किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं है।
जो हमारे साथ, रास्ता सिर्फ उसके लिए- ईरान
भारत का यह गुस्सा ऐसे समय पर फूटा है जब ईरान होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को कंट्रोल करने के लिए एक नया ट्रैफिक सिस्टम ला रहा है। ईरानी संसद के इब्राहिम अजीजी ने साफ कहा है कि इस नए रास्ते और सिस्टम का फायदा सिर्फ उन्हीं देशों और जहाजों को मिलेगा जो ईरान की बात मानेंगे और सहयोग करेंगे। इतना ही नहीं, ईरान इस खास सुविधा के बदले टैक्स (शुल्क) भी वसूलने की तैयारी में है।
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ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जुबानी जंग और समुद्र में बढ़ती हलचल को आप इस आसान रिपोर्ट से समझ सकते हैं:
1. खाड़ी देशों को ईरान की खुली धमकी: दोस्ती का वक्त खत्म
मामला सिर्फ टैक्स तक नहीं थमा है। ईरानी सुप्रीम लीडर के सलाहकार मोहम्मद मोखबर ने कुवैत और यूएई (UAE) को सीधे-सीधे धमकी दे डाली है। उन्होंने कहा कि ईरान ने अब तक बहुत सब्र रख लिया, लेकिन अब पानी सिर से ऊपर जा रहा है।
मोखबर का आरोप है कि इन देशों ने अपनी जमीन ईरान के दुश्मनों को इस्तेमाल करने के लिए दे दी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिन्हें हम भाई और दोस्त समझते थे, उन्होंने अपनी आजादी तक बेच दी।
2. महाशक्तियों की एंट्री: चीन और रूस आए एक साथ
इस पूरे विवाद में अब रूस और चीन की जोड़ी भी कूद पड़ी है। रूस ने साफ कहा है कि वह होर्मुज के मुद्दे पर पूरी तरह चीन के साथ खड़ा है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग का मानना है कि ताकत के दम पर इस समस्या का हल नहीं निकल सकता।
रूस और चीन दोनों का कहना है कि अगर इस तनाव को हमेशा के लिए खत्म करना है, तो वॉशिंगटन (अमेरिका) और तेहरान (ईरान) के बीच पक्का युद्धविराम (सीजफायर) होना बेहद जरूरी है।
3. ईरान की नाकेबंदी: दुश्मनों के हथियार अब यहां से नहीं गुजरेंगे
ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि अब दुश्मन देशों के सैन्य साजो-सामान और हथियारों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने माना कि पहले ईरान अपने संप्रभु अधिकारों का इस्तेमाल नहीं करता था और ढील दे देता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
ईरान का दावा है कि इस तनाव की वजह से होर्मुज स्ट्रेट व्यावहारिक रूप से बंद ही है, जिससे दुनिया भर के देशों की टेंशन बढ़ गई है क्योंकि दुनिया का करीब 20% तेल और गैस इसी रास्ते से होकर जाता है।
4. ईरान की खुली चुनौती: बातचीत नहीं बनी, तो जंग को तैयार
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को खुली चेतावनी दी है कि अगर दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत फेल हुई, तो ईरान सीधे युद्ध के मैदान में उतरने के लिए तैयार है। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर लिखा कि इस टकराव का खामियाजा अब खुद अमेरिकी जनता भुगत रही है।
अराघची का दावा है कि ईरान के साथ पंगा लेने की वजह से अमेरिका में महंगाई, तेल के दाम, होम लोन की ब्याज दरें (मॉर्गेज रेट्स) और कार लोन न चुका पाने वालों की तादाद तेजी से बढ़ रही है।
5. अमेरिका का प्लान बी: ईरान पर दोबारा बड़े हमले की तैयारी
दूसरी तरफ, अमेरिका भी चुप बैठने के मूड में नहीं है। 'न्यूज़यॉर्क टाइम्स' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन ने ईरान पर दोबारा सैन्य हमला करने के कई विकल्प तैयार कर लिए हैं, और अब बस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की हरी झंडी का इंतजार है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी इसके संकेत दिए हैं। अमेरिका के प्लान में ईरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमलों से लेकर एक बेहद खतरनाक मिशन भी शामिल है, जिसमें अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज जमीन पर उतरकर ईरान की इस्फहान न्यूक्लियर साइट से यूरेनियम को अपने कब्जे में ले सकती हैं।
6. बारूद के ढेर पर मिडिल-ईस्ट: अमेरिकी सेना अलर्ट पर
तनाव इस कदर बढ़ चुका है कि अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपने 50 हजार से ज्यादा सैनिक तैनात कर रखे हैं। युद्ध के इस माहौल में समुद्र में दो अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर, एक दर्जन से ज्यादा नेवी डेस्ट्रॉयर और आसमान में लड़ाकू विमान लगातार चक्कर काट रहे हैं।
इसके अलावा करीब 5 हजार मरीन कमांडो और 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के 2 हजार पैराट्रूपर्स बिल्कुल मुस्तैद खड़े हैं, जिन्हें बस ऊपर से आदेश मिलने की देरी है। उधर डोनाल्ड ट्रम्प ने भी चेताया है कि अगर जल्द ही कोई समझौता नहीं हुआ, तो हालात बहुत ज्यादा बिगड़ सकते हैं।
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