युद्ध के बीच ईरान में तख्तापलट की आहट? राष्ट्रपति पेजेशकियान ने दिया इस्तीफा!

Amresh Kushwaha | Jun 01, 2026, 08:37 IST
iran israel war update
ईरान-इजराइल जंग के बीच राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के इस्तीफे और तख्तापलट की खबरों ने दुनिया को चौंका दिया है। जानिए अमेरिका, हिजबुल्लाह और इजराइल से जुड़े इस बड़े संकट की पूरी इनसाइड स्टोरी।

Iran Israel War Update: ईरान-इजराइल जंग के 94वें दिन बहुत बड़ी खबरें आ रही हैं। ईरान और अमेरिका के बीच जुबानी जंग के साथ समुद्र में हलचल बढ़ गई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान डील में परमाणु मुद्दे को सबसे खास बताया है।



इधर हिजबुल्लाह ने इजराइल के घातक हर्मीस 450 ड्रोन को मार गिराया है। लेबनान में इजराइली सेना की बढ़ती ताकत से फ्रांस बहुत ज्यादा परेशान है। उसने इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में इमरजेंसी मीटिंग की मांग की है।



इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के इस्तीफे की खबर आई है। हालांकि राष्ट्रपति कार्यालय ने इस्तीफे के दावों को पूरी तरह खारिज किया है।



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ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जुबानी जंग और समुद्र में बढ़ती हलचल को आप इस आसान रिपोर्ट से समझ सकते हैं:



1. ट्रंप का दावा- ईरान डील का असली बॉस परमाणु मुद्दा ही है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने जो ईरान समझौते (डील) का प्रस्ताव रखा है, उसमें परमाणु मुद्दों को बहुत साफ-साफ और डिटेल में समझाया गया है। उन्होंने साफ किया कि इस पूरी डील का एक बड़ा हिस्सा परमाणु मामलों के इर्द-गिर्द ही घूमता है। ट्रंप के मुताबिक, इस डील में बेहद कड़े नियमों और लंबी-चौड़ी डिटेल्स के साथ परमाणु मुद्दों के हर छोटे-बड़े पहलू पर बात की गई है।



2. हिजबुल्लाह का नया शिकार, आसमान से गिराया इजराइल का धाकड़ ड्रोन

हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि उसने दक्षिणी लेबनान के पश्चिमी इलाके में इजराइल के हर्मीस 450 ड्रोन को मार गिराया है। यह ड्रोन इजराइल के लिए जासूसी और हमलों में इस्तेमाल होने वाला बहुत खास हथियार माना जाता है। हालांकि, इजराइली सेना ने अभी तक इस दावे पर हां या ना में कोई जवाब नहीं दिया है।



इसके साथ ही हिजबुल्लाह ने यह भी कहा कि रात के ठीक 01 बजे उनके लड़ाकों ने दक्षिणी लेबनान के योहमोर अल-शकीफ कस्बे के पूर्वी छोर पर तैनात इजराइली सैनिकों पर ताबड़तोड़ रॉकेट और तोप के गोले बरसाए।



3. ईरान-अमेरिका की गुपचुप बात, पर क्या नतीजे की उम्मीद है?

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य इस्माइल कौसरी ने बताया कि इस समय ईरान और अमेरिका के बीच चार बड़ी बातों पर चर्चा चल रही है।



  • पहली: आगे कभी फिर से युद्ध न होने की पक्की गारंटी।
  • दूसरी: युद्ध में जो भी नुकसान हुआ है, उसका मुआवजा।
  • तीसरी: होर्मुज इलाके से अमेरिकी सेना की पूरी तरह से विदाई।
  • चौथी: ईरान पर लगे नौसैनिक प्रतिबंधों को हटाना।

कौसरी का कहना है कि दुनिया के कई देशों ने होर्मुज पर ईरान के हक को मान लिया है, लेकिन अमेरिका से बातचीत के बाद युद्ध रुकने की कोई ठोस उम्मीद नहीं दिख रही है। उन्होंने एक चौंकाने वाला दावा यह भी किया कि अब अमेरिका के साथ चल रही बातचीत की लिस्ट से परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे को पूरी तरह से हटा दिया गया है।



4. इजराइल की बढ़ती ताकत से फ्रांस परेशान, UN में इमरजेंसी मीटिंग की मांग

लेबनान में इजराइल की बढ़ती सैन्य कार्रवाई को देखकर फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की इमरजेंसी बैठक बुलाने की जिद की है। यह कदम तब उठाया गया जब इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से अहम ब्यूफोर्ट किले को अपने कब्जे में ले लिया है।



फ्रांस के विदेश मंत्री जां-नोएल बारो ने कहा कि फ्रांस इजराइल के खुद की रक्षा करने के हक को समझता है, लेकिन लेबनान के अंदर घुसकर लगातार हमले करना और अपनी पहुंच बढ़ाना सही नहीं है। इससे पूरा इलाका सुलग सकता है।



किले पर कब्जे के बाद इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के एक बड़े इलाके के लोगों को घर खाली करने को कह दिया है। फ्रांस को डर है कि इससे वहां रहने वाले लोगों पर बहुत बड़ा संकट आ जाएगा और दोनों देशों की जंग और खतरनाक हो सकती है।



5. ईरानी राष्ट्रपति का बड़ा कदम, क्या सच में दे दिया इस्तीफा?

ईरान की राजनीति से एक बहुत बड़ी खबर आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और अपनी चिट्ठी देश के सबसे बड़े नेता (सुप्रीम लीडर) अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई को भेज दी है।



ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट की मानें तो पेजेशकियान ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि देश की सत्ता पर अब पूरी तरह से वहां की सेना (इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC) के कमांडरों का कब्जा हो चुका है।



फरवरी में अमेरिका और इजराइल के साथ जंग शुरू होने के बाद से उनकी सरकार को बड़े और जरूरी फैसलों से बिल्कुल किनारे कर दिया गया है। सारा कंट्रोल अब सेना के हाथ में है।



हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि सुप्रीम लीडर उनका इस्तीफा मंजूर करेंगे या नहीं। दूसरी तरफ, फर्स्टपोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय के डिप्टी चीफ सैयद मेहदी तबातबाई ने इस्तीफे की इन खबरों को पूरी तरह से झूठा बताया है।



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