अमेरिका की ईरान को सीधी धमकी, बातचीत बिगड़ी तो फिर बरसेंगे बम!
Iran Israel War Update: ईरान-इजराइल जंग के 93वें दिन बहुत बड़ी खबर आ रही है। अमेरिका ने ईरान को सीधे युद्ध की धमकी दी है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सिंगापुर समिट में साफ चेतावनी दी है।
बातचीत बिगड़ने पर अमेरिका दोबारा बम बरसाने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने अमेरिकी सेना के बारूद और ताकत का दम भी भरा है। यह धमकी दोनों देशों के बीच चल रही नाजुक बातचीत के दौरान आई है। हालांकि, ईरान भी झुकने को बिल्कुल तैयार नहीं है। दोनों देशों के बीच जुबानी जंग और समुद्र में हलचल लगातार बढ़ती जा रही है।
बातचीत बिगड़ी, तो फिर बरसेंगे बम!
अमेरिका ने एक बार फिर ईरान को सीधे-सीधे युद्ध की धमकी दे दी है। सिंगापुर के एक समिट में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने साफ कहा कि अगर ईरान के साथ चल रही बातचीत फेल हुई, तो अमेरिका दोबारा हमला करने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने यह भी जता दिया कि अमेरिकी सेना के पास इतना बारूद और ताकत है कि वह पश्चिम एशिया ही नहीं, बल्कि दुनिया के किसी भी कोने में एक साथ मोर्चा संभाल सकती है।
यह धमकी ऐसे समय पर आई है, जब दोनों देश अप्रैल में हुए अस्थायी युद्धविराम को 60 दिनों के लिए और बढ़ाने और किसी पक्के समझौते पर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में इस पर एक मीटिंग भी की, लेकिन दो घंटे की माथापच्ची के बाद आखिरी फैसला टाल दिया।
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ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जुबानी जंग और समुद्र में बढ़ती हलचल को आप इस आसान रिपोर्ट से समझ सकते हैं:
1. हमें कोई जल्दी नहीं, ट्रम्प पर भरोसा ही नहीं है- ईरान
दूसरी तरफ ईरान भी झुकने के मूड में नहीं है। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया पर दो टूक कह दिया कि उन्हें अमेरिका पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है। जब तक अमेरिका पहले कदम नहीं उठाएगा, ईरान भी शांत बैठा रहेगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्हें समझौते की कोई हड़बड़ी नहीं है।
वहीं ईरान की IRGC के पूर्व कमांडर मोहसिन रेजाई ने एक्स (ट्विटर) पर भड़ास निकालते हुए कहा कि ट्रम्प ने बातचीत के नाम पर तीसरी बार धोखा दिया है। एक तरफ वो समुद्री नाकेबंदी कर रहे हैं और दूसरी तरफ बातचीत में ऐसी मांगें रख रहे हैं जो मानी नहीं जा सकतीं। इससे साफ है कि ट्रम्प का मकसद शांति नहीं, कुछ और ही है।
2. समझौता हो भी गया, तो नहीं लौटेंगे वो पुराने दिन!
भूराजनैतिक मामलों के एक्सपर्ट मार्को विनचेंजो का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो भी जाता है और होर्मुज स्ट्रेट का रास्ता खुल भी जाता है, तो भी हालात पहले जैसे नॉर्मल नहीं होंगे। अब यह समुद्री रास्ता हमेशा राजनीति के साए में रहेगा और शिपिंग कंपनियों का भरोसा इतनी जल्दी नहीं लौटने वाला।
आपको बता दें कि ट्रम्प के ईरान पर एक्शन लेने से पहले दुनिया का करीब 20% तेल और एलएनजी (LNG) इसी रास्ते से होकर गुजरता था, जो अब खतरे में है।
3. होर्मुज स्ट्रेट पर मालिकाना हक जताने की तैयारी
ईरान अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना कब्जा और मजबूत करने के लिए एक नया कानून लाने जा रहा है। ईरानी सांसद अलीरेजा सलीमी ने बताया कि संसद जल्द ही एक बिल पास करेगी, जिससे होर्मुज स्ट्रेट के मैनेजमेंट और कंट्रोल में ईरान की भूमिका को कानूनी मान्यता मिल जाएगी। उनका कहना है कि चूंकि यह रास्ता ईरान और ओमान के समुद्री इलाके में आता है, इसलिए इसके नियम तय करने का हक भी सिर्फ इन्हीं दोनों देशों को है, किसी तीसरे को नहीं।
4. युद्धविराम के बाद भी अस्पतालों पर बरस रहे गोले
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि लेबनान में सैन्य कार्रवाई की वजह से भयंकर स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है। हैरानी की बात यह है कि कागजों पर युद्धविराम लागू होने के बाद भी लेबनान के हेल्थ सेंटर्स पर 27 हमले हो चुके हैं। इन हमलों में 25 लोगों की जान गई और 42 घायल हुए हैं। अब तक 16 अस्पताल और 13 छोटे हेल्थ सेंटर पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं।
5. लेबनान में हर 24 घंटे में लहूलुहान हो रहे 11 बच्चे
संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ ने बेहद चौंकाने वाले आंकड़े जारी किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लेबनान में पिछले एक हफ्ते के दौरान हर 24 घंटे में औसतन 11 बच्चे या तो मारे गए हैं या घायल हुए हैं। 16 अप्रैल को युद्धविराम लागू होने के बावजूद इजराइल के हमले रुक नहीं रहे हैं।
पिछले 7 दिनों में ही 77 बच्चे इन हमलों का शिकार बने हैं। युद्धविराम के बाद से अब तक कुल 55 बच्चों की मौत हो चुकी है और 212 घायल हैं। यूनिसेफ ने सभी देशों से अपील की है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करें और कम से कम बच्चों और आम नागरिकों को इस आग में न झोंकें।
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