ईरान-इजराइल युद्ध का 41वां दिन: लेबनान पर इजरायली हमलों के बाद ईरान ने फिर बंद किया होर्मुज स्ट्रेट

Amresh Kushwaha | Apr 09, 2026, 08:18 IST
iran israel war updates 09 april am
ईरान-इजराइल युद्ध के 41वें दिन ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद कर दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन पर हमले और ट्रम्प की नाटो से नाराजगी ने तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।

Iran Israel War Update: ईरान और इजराइल की जंग अब खतरनाक मोड़ पर आ गई है। आज युद्ध का 41वां दिन है। ईरान ने फिर से होर्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया है। इससे पूरी दुनिया की धड़कनें तेज हो गई हैं।



ट्रम्प ने नाटो देशों से अपनी नाराजगी जाहिर की है। अमेरिका ने ईरान को हथियार देने वालों पर टैक्स बढ़ा दिया। ईरान ने सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन को निशाना बनाया है।



न्यूयॉर्क और लंदन की सड़कों पर शांति के लिए प्रदर्शन हो रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिका को दो टूक जवाब दिया है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ईरान की लाचारी का दावा किया है। दुनिया भर में तेल सप्लाई ठप होने का डर बना हुआ है।



ईरान का पलटवार: होर्मुज स्ट्रेट फिर बंद

इजराइली हमलों के बाद ईरान ने दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद कर दिया है। यह फैसला तब आया जब हिजबुल्लाह ने धमकी दी कि अगर लेबनान को सीजफायर का हिस्सा नहीं बनाया गया, तो समझौता टिका नहीं रहेगा।



दूसरी तरफ, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ कर दिया है कि हिजबुल्लाह इस शांति योजना का हिस्सा नहीं है। ईरान चाहता था कि हिजबुल्लाह पर भी हमले रुकें, लेकिन इजराइल इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं है।



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1. अंदर की बात: सीजफायर के खिलाफ थे नेतन्याहू

इजरायल और ईरान के बीच हुए युद्धविराम को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। इजरायली मीडिया (अल जजीरा के हवाले से) ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस सीजफायर के हक में बिल्कुल नहीं थे। बताया जा रहा है कि समझौते की घोषणा से ठीक पहले नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को फोन किया था और ईरान के साथ किसी भी तरह की डील का कड़ा विरोध जताया था। इस खुलासे ने साफ कर दिया है कि भले ही दुनिया के सामने सीजफायर का ऐलान हो गया हो, लेकिन परदे के पीछे इजरायल और अमेरिका के बीच गहरे कूटनीतिक मतभेद चल रहे हैं।



2. नाटो से ट्रम्प की नाराजगी: दोस्तों ने साथ नहीं दिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने नाटो (NATO) साथियों से काफी खफा हैं। नाटो चीफ मार्क रुट से मुलाकात के बाद पता चला कि ट्रम्प को लगता है कि ईरान मामले में उन्हें यूरोपीय देशों से वैसा साथ नहीं मिला जैसा मिलना चाहिए था। हालांकि रुट ने समझाया कि कई देशों ने रसद और बेस देकर मदद की है, पर ट्रम्प का कहना है कि जरूरत के वक्त NATO उनके साथ खड़ा नहीं था। यहां तक कि व्हाइट हाउस ने ट्रम्प के NATO से बाहर निकलने तक के संकेत दे दिए हैं।



3. सड़कों पर उतरे लोग: जंग नहीं, शांति चाहिए

भले ही कागजों पर सीजफायर की बातें हो रही हों, लेकिन जनता में गुस्सा बरकरार है। न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर और लंदन में इजराइली दूतावास के बाहर सैकड़ों लोग जुटे। प्रदर्शनकारियों का एक ही नारा है- ईरान और लेबनान पर बमबारी तुरंत रुके और इस युद्ध को हमेशा के लिए खत्म किया जाए।



4. ट्रम्प का टैरिफ कार्ड: हथियार देने वालों की खैर नहीं

सीजफायर के ऐलान के चंद घंटों बाद ही ट्रम्प ने एक और कड़ा फैसला लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी कि जो भी देश ईरान को हथियार सप्लाई करेगा, उसके सामान पर अमेरिका 50% टैरिफ (भारी टैक्स) लगाएगा। इशारा रूस और चीन की तरफ माना जा रहा है, और ट्रम्प ने साफ कर दिया है कि इसमें किसी को कोई छूट नहीं मिलेगी।



5. ईरान की दो टूक: अमेरिका चुन ले-शांति या युद्ध

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गेंद अमेरिका के पाले में डाल दी है। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि अमेरिका एक साथ दो नावों पर सवारी नहीं कर सकता; उसे या तो सीजफायर लागू करना होगा या इजराइल के जरिए युद्ध लड़ना होगा। उन्होंने लेबनान की हिंसा का हवाला देते हुए कहा कि पूरी दुनिया देख रही है कि अमेरिका अपने वादे निभाता है या नहीं।



6. अमेरिकी रक्षा मंत्री का दावा: भीख मांग रहा था ईरान

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि ईरान की लीडरशिप इतनी मजबूर हो गई थी कि वह सीजफायर की भीख मांग रही थी। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि ईरान को कभी भी परमाणु बम नहीं बनाने दिया जाएगा और होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखा जाएगा। हेगसेथ के मुताबिक, ट्रम्प चंद मिनटों में ईरान की अर्थव्यवस्था बर्बाद कर सकते थे, पर उन्होंने मौका दिया है।



7. ईरान ने सऊदी अरब की पाइपलाइन को बनाया निशाना

हवाई हमलों के बीच ईरान ने सऊदी अरब की सबसे महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर मिसाइल और ड्रोन से हमला कर दिया है। यह पाइपलाइन इसलिए खास थी क्योंकि इसके जरिए होर्मुज स्ट्रेट को बायपास करके तेल भेजा जाता था। हमले में अमेरिकी कंपनियों से जुड़ी फैसिलिटी को भी नुकसान पहुंचा है। रोजाना 70 लाख बैरल तेल ले जाने वाली इस पाइपलाइन पर हमले से ग्लोबल मार्केट में हड़कंप मच सकता है।



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