ईरान-इजराइल युद्ध का 44वां दिन: इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका की 21 घंटे चली बातचीत, पह बात नहीं बनी
Iran Israel War Update: ईरान-इजराइल जंग के 44वें दिन हालात और भी बिगड़ गए हैं। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पूरी तरह फेल हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कोई भी समझौता करने से साफ मना कर दिया है।
ईरान परमाणु अधिकारऔर होर्मुज स्ट्रेट पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। इस बीच इजराइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर बड़े हमले का दावा किया। राष्ट्रपति ट्रंप ने हथियारों की सप्लाई को लेकर चीन को सीधी चेतावनी दी है। लेबनान में भी इजराइली हमलों के कारण भारी तबाही और संकट मचा हुआ है। समंदर से लेकर आसमान तक बारूद की गंध अब और गहरी हो गई है।
इस्लामाबाद में 21 घंटे चली बातचीत विफल
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच शांति को लेकर दो राउंड की लंबी बातचीत हुई। करीब 21 घंटे तक माथापच्ची चली, लेकिन आखिर में नतीजा सिफर (जीरो) रहा। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ कह दिया कि अमेरिका बिना किसी समझौते के वापस लौट रहा है। उन्होंने चुटकी लेते हुए यह भी कहा कि डील न होना अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है।
जरूरत से ज्यादा सख्त थीं अमेरिका की शर्तें- ईरान
ईरानी न्यूज एजेंसी तस्नीम के मुताबिक, ईरान ने भी मान लिया है कि इस्लामाबाद की बातचीत बेनतीजा रही। ईरान का कहना है कि समझौते का रास्ता इसलिए नहीं निकल पाया क्योंकि अमेरिका की शर्तें बहुत ज्यादा कड़ी थीं। ईरान के हिसाब से अमेरिका की मांगें ऐसी थीं, जिन्हें मानना उनके लिए मुमकिन नहीं था।
ईरान के प्रेस टीवी ने विवाद की असली वजहों का खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दो सबसे बड़े मुद्दों पर दोनों देश एक-दूसरे के सामने खड़े हैं। पहला- होर्मुज स्ट्रेट (समुद्री रास्ता) से गुजरने का अधिकार और दूसरा- ईरान का अपना परमाणु अधिकार। ईरान इन दोनों ही मुद्दों पर पीछे हटने को तैयार नहीं है, जिसके चलते यह बातचीत फेल हो गई।
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1. वेंस की दो टूक: परमाणु हथियार नहीं तो समझौता नहीं
जेडी वेंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अमेरिका की शर्तें बिल्कुल साफ थीं। अमेरिका चाहता है कि ईरान न केवल परमाणु हथियार बनाना बंद करे, बल्कि ऐसी कोई तैयारी भी न करे जिससे वह भविष्य में जल्दी हथियार बना सके। वेंस के मुताबिक, ईरान इन शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं हुआ, इसलिए बात बिगड़ गई।
2. ट्रंप का फुल कंट्रोल: फोन पर ही तय हो रही थी रणनीति
इस पूरी बातचीत के दौरान जेडी वेंस अपनी टीम के साथ लगातार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संपर्क में थे। वेंस ने बताया कि पिछले 21 घंटों में उनकी ट्रंप से 10 से ज्यादा बार बात हुई। अमेरिका ने ईरान को अपना आखिरी और सबसे अच्छा ऑफर दे दिया है, अब गेंद ईरान के पाले में है।
3. समुद्र में बारूदी सुरंगों का खतरा और अमेरिका का सफाई अभियान
हॉर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) को लेकर दोनों देशों के बीच भारी तनाव है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने इस समुद्री रास्ते में माइंस (बारूदी सुरंगें) बिछाई हैं। इसी खतरे को देखते हुए अमेरिकी नौसेना (CENTCOM) ने समुद्री रास्ता सुरक्षित करने के लिए अभियान शुरू कर दिया है। ट्रंप ने भी साफ कर दिया है कि वहां सफाई अभियान जारी रहेगा।
4. नेतन्याहू का दावा: ईरान के परमाणु मिशन को लगी तगड़ी चोट
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने आग में घी डालने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई अभी रुकी नहीं है। नेतन्याहू का दावा है कि इजराइली हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भारी नुकसान पहुंचाया है और यह हमले इसलिए जरूरी थे क्योंकि ईरान परमाणु बम बनाने के बेहद करीब पहुंच गया था।
5. भावुक माहौल: गालिबाफ का प्लेन और बच्चों की तस्वीरें
राजनीति के बीच एक भावुक तस्वीर भी सामने आई। ईरानी संसद के स्पीकर गालिबाफ जब पाकिस्तान पहुंचे, तो उनके प्लेन में उन बच्चों की तस्वीरें रखी थीं, जो 28 फरवरी को एक मिसाइल हमले में मारे गए थे। ईरान इन मौतों का जिम्मेदार अमेरिका और इजराइल को मानता है।
6. खतरे में लेबनान: पीएम ने रद्द किया अमेरिका दौरा
लेबनान में हालात बेहद खराब हैं। वहां के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने अपना प्रस्तावित अमेरिका दौरा टाल दिया है। उनका कहना है कि इस संकट की घड़ी में उनका अपने देश (बेरूत) में रहना जरूरी है। लेबनान पर 2 मार्च से इजराइली हमले जारी हैं, जिसमें हाल ही में तुफाहता इलाके में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
6. ट्रंप की चीन को चेतावनी: बीच में आए तो खैर नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने पुराने अंदाज में नजर आए। उन्होंने कहा कि डील हो या न हो, जीत अमेरिका की ही होगी क्योंकि उन्होंने ईरान को सैन्य रूप से कमजोर कर दिया है। साथ ही, उन्होंने चीन को भी कड़ी चेतावनी दी है कि अगर उसने ईरान को हथियारों की सप्लाई की, तो चीन के लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी।
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