60 दिनों का सीजफायर या नया वर्ल्ड वॉर? ट्रंप की हरी झंडी का इंतजार!
Iran Israel War Update: ईरान और इजराइल के बीच जंग अब 91वें दिन में पहुंच चुकी है। समंदर से लेकर आसमान तक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को दुश्मनों के लिए बंद करने की धमकी दी है।
इस बीच, अमेरिका और ईरान में 60 दिनों के सीजफायर पर सहमति बनी है। हालांकि, इस समझौते पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आखिरी मंजूरी मिलना अभी बाकी है।
दूसरी ओर, इजराइल ने प्रतिबंधों को लेकर यूरोपीय संघ पर तीखा पलटवार किया है। वहीं, अमेरिका अब ईरानी फ्लाइट्स पर नए कड़े प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है। अमेरिका ने ओमान को भी ईरान की मदद न करने की खुली चेतावनी दी है।
इसी बीच, रूस ने दोनों देशों से बातचीत और शांति की अपील की है। रूस ने ईरान का अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम खुद संभालने का बड़ा ऑफर दिया है। फिलहाल 440 किलो यूरेनियम के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बात अड़ी है।
दुश्मनों के लिए बंद रहेगा होर्मुज- ईरान
ईरान ने साफ कह दिया है कि वह अपने खिलाफ किसी भी मिलिट्री एक्शन के लिए 'होर्मुज स्ट्रेट' (समुद्री रास्ते) का इस्तेमाल नहीं होने देगा। संयुक्त राष्ट्र (UN) सुरक्षा परिषद में ईरान के राजदूत अमीर-सईद इरावानी ने कहा कि होर्मुज का रास्ता सीधे तौर पर ईरान की सुरक्षा और देश के हितों से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने आगे कहा कि इस इलाके में ईरान जो भी कदम उठा रहा है, वह इंटरनेशनल लॉ (अंतरराष्ट्रीय कानून) के दायरे में है और इसमें किसी भी देश की दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जंग पर ब्रेक? ट्रंप की हरी झंडी का इंतजार
इसी बीच, एसोसिएटेड प्रेस (AP) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के सीजफायर MoU (समझौते) पर सहमति बन गई है। हालांकि, इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आखिरी मंजूरी मिलना अभी बाकी है।
खबरों की मानें तो इस समझौते का असली मकसद दोनों देशों के बीच लड़ाई को रोकना और ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम (परमाणु कार्यक्रम) पर फिर से बातचीत शुरू करना है। अगर यह समझौता फाइनल होता है, तो होर्मुज के रास्ते जहाजों का आना-जाना बिना किसी रोक-टोक के चलता रहेगा।
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ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जुबानी जंग और समुद्र में बढ़ती हलचल को आप इस आसान रिपोर्ट से समझ सकते हैं:
1. इजराइल का EU पर पलटवार- बदले की राजनीति बंद करो
इजराइल के विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ (EU) पर पाखंडी होने और राजनीतिक बदले की भावना से काम करने का गंभीर आरोप लगाया है।
यह पूरा मामला तब गरमाया जब EU ने कुछ इजराइली नागरिकों और संगठनों पर पाबंदियां (प्रतिबंध) लगाने का फैसला किया। EU का दावा है कि ये लोग वेस्ट बैंक वाले इलाके में फिलिस्तीनियों के साथ हिंसा और उनके मानवाधिकारों के हनन में शामिल हैं।
2. वेस्ट बैंक विवाद पर इजराइल की सफाई
इजराइल ने EU के इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिन लोगों और संगठनों पर बैन लगाया गया है, उनका हिंसा से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। इजराइली विदेश मंत्रालय के मुताबिक, EU का असली एजेंडा यहूदियों को जूडिया और समारिया (वेस्ट बैंक) में बसने से रोकना है।
बता दें कि EU ने जिन चार संगठनों और तीन लोगों पर शिकंजा कसा है, उनमें 'नचाला सेटलमेंट मूवमेंट' और उसकी डायरेक्टर डेनिएला वीस भी शामिल हैं। EU का आरोप है कि यह संगठन फिलिस्तीनियों को डरा-धमकाकर उनकी जमीन छुड़ाने का काम करता है।
3. अब ईरानी फ्लाइट्स की खैर नहीं, अमेरिका कसने जा रहा है शिकंजा
अमेरिका ने ईरान की एयरलाइंस कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाने का मन बना लिया है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी (वित्त मंत्री) स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि अमेरिका अब ईरानी विमानों की इंटरनेशनल लैंडिंग, उनमें ईंधन (फ्यूल) भरने और टिकटों की बिक्री पर रोक लगाने की तैयारी में है। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि इन पाबंदियों को जमीन पर कैसे लागू किया जाएगा।
4. अमेरिका की ओमान को खुली धमकी- ईरान का साथ दिया तो भुगतना होगा
अमेरिका ने ओमान को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर उसने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों से टैक्स (टोल) वसूलने के ईरान के किसी भी सिस्टम में उसकी मदद की, तो अमेरिका उस पर सख्त एक्शन लेगा।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने साफ किया कि अमेरिका होर्मुज में किसी भी तरह की टोल वसूली चलने नहीं देगा। उन्होंने कहा कि ओमान को यह अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि जो भी देश, कंपनी या इंसान इस वसूली सिस्टम का हिस्सा बनेगा, अमेरिका उसके खिलाफ आक्रामक रुख अपनाएगा। इसके साथ ही बेसेंट ने दुनिया के बाकी देशों से भी अपील की कि वे ईरान की इस कोशिश का बिल्कुल साथ न दें, क्योंकि इससे समंदर के जरिए होने वाला ग्लोबल बिजनेस प्रभावित हो सकता है।
5. ईरान का दावा- होर्मुज पर हमारा कब्जा, अमेरिका दूर ही रहे
ईरान ने अमेरिका को सीधे तौर पर जता दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट पर उसका पूरा कंट्रोल है और वह इसमें किसी भी तरह की तांक-झांक स्वीकार नहीं करेगा। ईरानी मीडिया के अनुसार, उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका मिलिट्री प्रेशर बनाकर होर्मुज पर ईरान की पकड़ को ढीला करना चाहता है, लेकिन तेहरान (ईरान) उसके इस मंसूबे को कभी कामयाब नहीं होने देगा।
6. ट्रंप पर भड़के विपक्षी सीनेटर- ईरान मामले में गलती पर गलती हो रही है
अमेरिका में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर क्रिस मर्फी ने राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान नीति को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन लगातार गलत फैसले ले रहा है, जिससे ईरान के साथ युद्ध की स्थिति अब कंट्रोल से बाहर होती जा रही है।
कनेक्टिकट से सीनेटर क्रिस मर्फी ने X पर पोस्ट लिखकर कहा कि ट्रंप ने जिस तरह ओमान को धमकी दी है, उससे साफ पता चलता है कि हालात कितने ज्यादा बिगड़ चुके हैं।
7. रूस की समझौते की कोशिश- लड़ो मत, ईरान का यूरेनियम हम संभाल लेंगे
रूस ने अमेरिका और ईरान, दोनों से बातचीत का रास्ता अपनाने और दोबारा जंग जैसी स्थिति में न उलझने की अपील की है। साथ ही, मॉस्को (रूस) ने एक बड़ा ऑफर देते हुए कहा है कि वह ईरान से 'हाईली एनरिच्ड यूरेनियम' (अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम) को हटाने में मदद करने के लिए तैयार है।
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने कहा कि मॉस्को चाहता है कि दोनों देश सैन्य टकराव का रास्ता छोड़ें। उन्होंने साफ किया कि रूस यूरेनियम हटाने में मदद की यह पेशकश किसी पर थोप नहीं रहा है, बल्कि यह सिर्फ एक मदद का हाथ है।
8. 440 किलो यूरेनियम पर अड़ी बात, क्या निकलेगा हल?
दरअसल, राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को हाईली एनरिच्ड यूरेनियम रखने की इजाजत नहीं देगा। इस समय ईरान के पास करीब 440 किलोग्राम 60% एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है, जो दोनों देशों के बीच विवाद की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है। इसी मुद्दे के चलते फिलहाल शांति वार्ता भी रुकी हुई है।
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