ईरान-इजराइल जंग का 12वां दिन: टेक कंपनियां, तेल सप्लाई और पानी पर खतरा, भारत क्यों चिंतित?
Iran Israel War: ईरान- इजराइल और अमेरिका की जंग शुरु हुए आज 12 दिन हो गए हैं। इन 12 दिनों में हालात तेजी से बदल रहे हैं, इसलिए द सूत्र अपने दर्शकों के लिए एकदम सटीक, सही और विश्वसनीय जंग से जुड़ी वो खबरें लेकर आया है, जिनका असर आप पर सीधे तौर पर या किसी और तरह से पड़ सकता है... तो चलिए शुरु करते हैं जंग से जुड़ी जरूरी अपडेट्स.....
ईरान की तरफ से दावा किया जा रहा है कि उसने इजराइल के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा हमला शुरु कर दिया है। ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान अमेरिका की टेक कंपनियों के ऑफिस और डेटा सेंटर्स को भी निशाना बना सकता है। दावा है कि इन कंपनियों में गूगल, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया, IBM और ओरेकल जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं।
भारत पर असर-अमेरिका की कई टेक कंपनियों में हजारों भारतीय और भारतीय मूल के लोग काम करते हैं। टेक कंपनियों के ऑफिस और डेटा सेंटर्स पर हमला होता है तो इसका भारत पर भी पड़ सकता है क्योंकि नौकरियां जा सकती हैं और सबसे बड़ा नुकसान भारतीयों की भी जान जा सकती है।
जंग के बीच आज यानी 11 मार्च को UNSC (संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद) में एक प्रस्ताव पर वोटिंग होने वाली है। इस प्रस्ताव में ईरान से कहा गया है कि वो बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, UAE और जॉर्डन पर हमले बंद करें।
भारत पर असर- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अगर ये प्रस्ताव पास होता है और ईरान खाड़ी देशों पर हमले बंद करता है तो इससे क्रूड ऑइल सप्लाई सामान्य हो सकती है क्योंकि हमलों में ज्यादातर तेल रिफाइनरी को ही निशाना बनाया जा रहा है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव हो रहा है। हमले बंद होने से भारत में रसोई गैस और पेट्रोल की सप्लाई सामान्य हो सकती है।
अमेरिका- इजराइल और ईरान की जंग में सबका ध्यान क्रूड ऑइल पर टिका हुआ है क्योंकि क्रूड ऑइल सप्लाई का एक तिहाई हिस्सा खाड़ी देश ही दुनिया को सप्लाई करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ पानी की भी चर्चा होने लगी है। बता दें कि खाड़ी देशों के पास पानी सीमित मात्रा में है। इस कमी को दूर करने खाड़ी देश डिसैलिनेशन प्लांट्स के जरिए खारे पानी से नमक को अलग करके उसे पीने लायक बनाते हैं। ये डिसैलिनेशन प्लांट भी जरूरी हैं। बहरीन ने 8 मार्च को दावा किया कि ईरान ने उसके डिसैलिनेशन प्लांट्स पर हमला किया, जिससे प्लांट्स को नुकसान पहुंचा है। अगर किसी बड़े डिसैलिनेशन प्लांट पर हमला होता है तो उस खाड़ी देश में पानी की भारी किल्लत हो सकती है।
डिसैलिनेशन क्या है- डिसैलिनेशन को हिंदी में अलवणीकरण कहा जाता है। ये समुद्र के पानी से नमक हटाने की प्रक्रिया है। संयुक्त अरब अमीरात में पीने के पानी का करीब 42 फीसदी हिस्सा ऐसे ही प्लांट्स से आता है। कुवैत में ये आंकड़ा 90 फीसदी, ओमान में 86 फीसदी और सऊदी अरब में 70 फीसदी है। दुबई के जबल अली बंदरगाह पर दुनिया का सबसे बड़ा डिसैलिनेशन प्लांट है।
जंग में होर्मुज रूट के बंद होने के खतरे के बीच पाकिस्तान ने ऑपरेशन मुहाफिज उल बहर यानी ऑपरेशन समुद्र का रखवाला शुरु किया है। पाकिस्तानी नौसेना के मुताबिक इस ऑपरेशन का मकसद सी लाइन्स ऑफ कम्युनिकेशन की सुरक्षा और बिना रुकावट राष्ट्रीय शिपिंग को जारी रखना है। सी लाइन्स ऑफ कम्युनिकेशन वो समुद्री रास्ते हैं, जो बंदरगाहों के बीच होते हैं। और जिनका इस्तेमाल व्यापार और नौसेना की एक्टिविटी के लिए किया जाता है।
भारत पर असर-भारत पर भी इस जंग का असर पड़ता दिखाई दे रहा है....देश में रसोई गैस की कीमतें 60 रुपए तक बढ़ चुकी हैं। ऐसे में विपक्ष सरकार से ऐसे ही किसी ऑपरेशन को चलाने की मांग कर सकता है।
इजराइल ईरान युद्ध: 10 और 11 मार्च 2026 के 5 बड़े अपडेट्स
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ईरान और इजराइल के बीच जारी युद्ध में 10 और 11 मार्च 2026 को महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखे गए हैं। इन घटनाओं में सैन्य हमले, कूटनीतिक पैंतरे और अंतर्राष्ट्रीय प्रयास शामिल हैं। यहां जानिए इस युद्ध के प्रमुख 5 अपडेट्स...
1. होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी हमला
10 मार्च को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरानी माइन-लेयर जहाजों को नष्ट करने की घोषणा की। ये जहाज समुद्री नेविगेशन को बाधित करने के लिए माइंस बिछा रहे थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने माइंस हटाने की मांग की और कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है। यह कदम ईरान के तेल निर्यात, विशेषकर चीन को होने वाली आपूर्ति पर बड़ा असर डाल सकता है।
2. ईरान पर इजराइली हवाई हमले
इजराइली वायुसेना ने 10 मार्च को ईरान के विभिन्न शहरों- तेहरान, इस्फहान और शिराज में 170 से अधिक हमले किए। इन हमलों का मुख्य लक्ष्य ईरानी सैन्य बुनियादी ढांचे को कमजोर करना था। इसमें आईआरजीसी (IRGC) कुद्स फोर्स मुख्यालय और न्यूक्लियर लैब्स शामिल थीं।
3. इजराइल पर ईरानी मिसाइल हमले
ईरान ने 9 और 10 मार्च की रात को इजराइल पर तीन मिसाइल बैराज दागे। इनमें क्लस्टर वारहेड्स वाली मिसाइलें भी शामिल थीं, हालांकि इनकी संख्या कम रही। एक मिसाइल बिना किसी नुकसान के खाली क्षेत्र में गिरी। यह युद्ध की शुरुआत से दागी गई 300 मिसाइलों के अभियान का ही हिस्सा था।
4. नेतन्याहू का ईरानियों को संदेश
10 मार्च को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरानी नागरिकों से सीधा संवाद किया। उन्होंने कहा कि इजराइल उन्हें ईरानी तानाशाही को उखाड़ फेंकने का अवसर दे रहा है। साथ ही उन्होंने ईरान की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने का वादा किया। यह कूटनीति का एक प्रयास था, जिसके तहत तेहरान में दमन केंद्रों पर हुए हमलों की तस्वीरें भी साझा की गईं।
5. हिजबुल्लाह के बढ़ते हमले
10 मार्च तक हिजबुल्लाह ने इजराइल डिफेंस फोर्स (IDF) पर 29 हमले किए, जो अब तक की एक दिन की सर्वाधिक संख्या है। ये हमले उत्तरी इजराइल और दक्षिणी लेबनान में केंद्रित थे, जिनमें मुख्य रूप से टैंकों को निशाना बनाया गया। IDF ने जवाबी कार्रवाई करते हुए लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले जारी रखे हैं।
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