भारत के लिए खुलेगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज? ईरानी राष्ट्रपति ने रखी ये बड़ी शर्त...

Aman Vaishnav | Sept 13, 2026, 08:50 IST
भारत के लिए खुलेगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने पर ईरानी राष्ट्रपति ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तभी खुलेगा, जब अमेरिका अपनी नाकेबंदी और दुश्मनी वाली हरकतें बंद करेगा।

ईरान राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह अहम जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत ही खुलेगा। लेकिन इसके लिए एक शर्त है। उनके मुताबिक अमेरिका को पहले अपनी नाकेबंदी और शत्रुतापूर्ण कार्रवाई रोकनी होगी।



नाकेबंदी हटे तभी रास्ता खुले

राष्ट्रपति ने कहा कि जलमार्ग खोलने का रास्ता बातचीत से ही निकलेगा। उन्होंने अमेरिका पर सीधा निशाना साधा। उनका कहना था कि अमेरिका पहले अपनी नाकेबंदी हटाए। साथ ही क्षेत्र में चल रही शत्रुतापूर्ण गतिविधियां भी बंद करे। तभी हालात सामान्य हो सकते हैं।



ओमान से चल रही बातचीत

जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति ने एक अहम जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि ओमान के साथ एक खास समुद्री व्यवस्था पर बातचीत जारी है। आगे अरब देशों के विदेश मंत्री भी ओमान के साथ बैठक करेंगे। मकसद है कि इस मसले पर कोई ठोस समझौता हो सके।



समझौते के बाद होगी घोषणा

राष्ट्रपति के अनुसार अगर समझौता हो जाता है तो इसकी औपचारिक घोषणा अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन यानी आईएमओ करेगा। यानी सिर्फ बातचीत से बात नहीं बनेगी। एक अंतरराष्ट्रीय संस्था की मुहर भी जरूरी होगी।



भारत की चिंता क्या है

यह पूरा जवाब एक अहम सवाल पर आया था। सवाल था कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भरोसा दिया गया है कि होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय नाविक और जहाज सुरक्षित रहेंगे। दरअसल भारत इस नाकेबंदी की वजह से बड़े ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है। ऐसे में भारत के लिए यह मसला सीधे उसकी ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा है।



ट्रंप के बयान पर क्या कहा

एक और सवाल में मौजूदा हालात का जिक्र हुआ। ईरानी राष्ट्रपति से पूछा गया कि नाकेबंदी से पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है और भारत भी इसकी आंच महसूस कर रहा है। इसी सवाल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इसे स्ट्रेट ऑफ ट्रंप नाम देने का जिक्र भी हुआ। साथ ही हूती, हिज्बुल्लाह और हमास की भूमिका पर भी सवाल पूछा गया।



हमने शुरुआत नहीं की

इसके जवाब में ईरानी राष्ट्रपति ने साफ किया कि न तो हिज्बुल्लाह ने और न ही ईरान ने इस टकराव की शुरुआत की। उनके मुताबिक ये सभी समूह सिर्फ अपना बचाव कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले यह देखना चाहिए कि हमला किसने शुरू किया। उनके शब्दों में दुश्मन हमला करते हैं, इलाके पर वार करते हैं और रास्ते बंद कर देते हैं। इसके बाद भी वे उम्मीद करते हैं कि ईरान चुप बैठा रहे।



हम जीवित हैं, जवाब देंगे

इस बातचीत में राष्ट्रपति ने एक भावुक टिप्पणी भी की। उन्होंने कहा कि अगर हम जीवित हैं तो हमें जवाब देना होगा। जब हम मर जाएंगे, तब जवाब नहीं दे पाएंगे। इसलिए हम जीवित हैं और जवाब देंगे।



प्रतिबंधों का असर आम लोगों पर

राष्ट्रपति के मुताबिक प्रतिबंधों का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है। उनके अनुसार प्रतिबंधों का मतलब है मरीजों की जान को खतरे में डालना। साथ ही लोगों को बेरोजगार करना और देश में गरीबी तथा असंतोष बढ़ाना भी इसमें शामिल है।



सेना से लड़े अमेरिका, नागरिकों से नहीं

अमेरिका को लेकर राष्ट्रपति का रुख साफ था। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका युद्ध करना चाहता है तो उसे सैन्य कर्मियों से लड़ना चाहिए, आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाना चाहिए।



राष्ट्रपति ने आगे कहा कि अमेरिका युद्ध के जरिए अपने मकसद हासिल नहीं कर पाया। अब वह आर्थिक दबाव के जरिए यही कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक इसमें भी अमेरिका को सफलता नहीं मिलेगी।



ब्रिक्स बन सकता है समाधान

राष्ट्रपति ने ब्रिक्स को एक अहम मंच बताया। उनके अनुसार ब्रिक्स (BRICS – Brazil, Russia, India, China, South Africa) जैसा गठबंधन बंद रास्तों को फिर से खोल सकता है। यह मंच व्यापार को बढ़ावा दे सकता है। साथ ही देशों के बीच आपसी संपर्क भी मजबूत कर सकता है।



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