बादलों ने दे दी खुशखबरी: जल्द होने वाली है झमाझम बारिश, मौसम विभाग ने मैप जारी कर दी सूचना
समझें क्या है पूरा मामला...
- 19 जुलाई को ISRO के सैटेलाइट ने भारत के मौसम की तस्वीर खींची।
- इसमें देश के दो-तिहाई हिस्से पर घने बादल दिखे।
- जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है।
- कुछ इलाकों में बेहद ठंडे और ऊंचे तूफानी बादल बने हैं।
- इनकी वजह से कई राज्यों में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी दी गई है।
देश के आसमान पर मानसून का कब्जा साफ दिख रहा है। इसरो के INSAT-3DR सैटेलाइट ने 19 जुलाई को भारत के ऊपर बड़ा बदलाव दिखाया है। पूरे देश के करीब 60 से 70 प्रतिशत हिस्से पर बादल छाए हुए हैं। यह तस्वीर बताती है कि मानसून अब देश के ज्यादातर हिस्सों में पूरी तरह सक्रिय है।
कहां-कहां छाए बादल
जम्मू-कश्मीर से गंगा के मैदानी इलाकों तक बादल फैले हैं। बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्य भी पूरी तरह ढके हुए हैं। पंजाब और उत्तर प्रदेश में भी घने बादल दिख रहे हैं।
साथ ही दक्षिणी प्रायद्वीप में अरब सागर से आती नमी के कारण लंबी बादल पट्टियां बनी हैं। सिर्फ पश्चिमी राजस्थान और तमिलनाडु के कुछ हिस्से साफ दिख रहे हैं। यह आंकड़ा दिनभर बदलता रहता है, क्योंकि बादल लगातार बनते-बिगड़ते हैं।
सैटेलाइट कैसे करता है काम
बता दें कि INSAT-3DR भारत का मौसम निगरानी सैटेलाइट है। इसे इसरो ने तैयार किया है। यह धरती से 36 हजार किलोमीटर ऊपर से हर आधे घंटे में तस्वीरें लेता है। मौसम विभाग यानी IMD (इन्हीं तस्वीरों से मौसम का पूर्वानुमान तैयार करता है।
इस सैटेलाइट में दो मुख्य कैमरे लगे हैं। पहला विजिबल चैनल है, जो सूरज की रोशनी से बादल की मोटाई पकड़ता है। दूसरा थर्मल इंफ्रारेड चैनल है, जो गर्मी को मापता है और दिन-रात दोनों समय काम करता है।
जितना ठंडा उतना खतरनाक
सैटेलाइट बादल के ऊपरी हिस्से का तापमान भी मापता है, जिसे क्लाउड टॉप ब्राइटनेस टेम्परेचर या CTBT (Cloud Top Brightness Temperature) कहते हैं। जितनी ऊंचाई बढ़ती है, हवा उतनी ठंडी होती जाती है। हर एक किलोमीटर पर तापमान करीब 6.5 डिग्री सेल्सियस गिरता है।
जो बादल जितना ठंडा होता है, वह उतना ही ऊंचा और खतरनाक माना जाता है। माइनस 40 डिग्री से नीचे के बादल गहरे तूफानी बादल होते हैं। माइनस 70 डिग्री से नीचे के बादल बेहद हिंसक तूफान का संकेत देते हैं।
19 जुलाई की तस्वीर में जम्मू-कश्मीर में माइनस 80 डिग्री तक ठंडे बादल दिखे हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पूर्वोत्तर में भी माइनस 50 डिग्री से नीचे के बादल मौजूद हैं।
हर बादल से बारिश नहीं
बता दें कि बादलों से ढका दो-तिहाई हिस्सा हर जगह तेज बारिश नहीं लाता है। कई इलाकों में सामान्य मानसूनी बादल सिर्फ हल्की बूंदाबांदी कराते हैं। तेज और भारी बारिश सिर्फ सबसे गहरे तूफानी बादलों के नीचे होती है। यह इलाका पूरे देश के दसवें हिस्से से भी कम होता है।
ये तूफानी बादल खुद अपनी ऊर्जा बनाते हैं। जब पानी की भाप जमा होती है, तो भारी गर्मी निकलती है। यह गर्मी हवा को तेजी से ऊपर धकेलती है। इससे बादल 15 किलोमीटर तक ऊंचे उठ जाते हैं। उत्तरी भारत में सक्रिय मानसून ट्रफ ने इस प्रक्रिया को और तेज कर दिया है।
किन राज्यों पर सबसे ज्यादा असर
मानसून ट्रफ लाइन इस समय उत्तरी भारत में सक्रिय है। इसकी वजह से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश हो रही है।
साथ ही अरब सागर से आती नमी वाली हवाएं पश्चिमी तट और मध्य भारत को भी प्रभावित कर रही हैं। बंगाल की खाड़ी फिलहाल शांत है, लेकिन इसमें बदलाव संभव है।
आगे क्या हो सकता है
अगले कुछ दिनों में इन इलाकों में भारी बारिश (भारी बारिश की चेतावनी), आंधी और ओले गिरने का अनुमान है। निचले इलाकों में जलभराव हो सकता है। नदियों में उफान और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा भी बना रहेगा। किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा के इंतजाम करने होंगे। शहरों में ड्रेनेज सिस्टम पर दबाव बढ़ सकता है।
INSAT-3DR जैसी तकनीक मौसम पूर्वानुमान को काफी सटीक बनाती है। पहले भी कई बार समय पर चेतावनी देकर जान-माल का नुकसान कम किया जा चुका है।
वहीं वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून का पैटर्न बदल रहा है। कभी सूखा तो कभी अचानक भारी बारिश देखने को मिल रही है। ऐसे में सैटेलाइट निगरानी और सटीक पूर्वानुमान पहले से ज्यादा जरूरी हो गए हैं।
आम नागरिकों को मौसम विभाग की चेतावनियों का पालनकरना चाहिए। जरूरत न हो तो भारी बारिश के दौरान बाहर निकलने से बचें। उत्तरी और पूर्वी भारत में बारिश से राहत जरूर मिली है, लेकिन नुकसान की आशंका भी बनी हुई है।
दक्षिणी हिस्सों में मानसून की प्रगति फिलहाल अच्छी बताई जा रही है। कुल मिलाकर इस साल मानसून सामान्य से बेहतर दिख रहा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर सतर्कता बेहद जरूरी है।
FAQ
- INSAT-3DR क्या है?
यह इसरो का मौसम निगरानी सैटेलाइट है। यह हर आधे घंटे में भारत की तस्वीरें लेता है। IMD इन तस्वीरों से मौसम पूर्वानुमान बनाता है। - मौसम विभाग के अनुसार बारिश होने का खतरा सबसे ज्यादा किन राज्यों में है?
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार में मानसून ट्रफ के कारण खतरा ज्यादा है। पूर्वोत्तर राज्यों में भी भारी बारिश की आशंका बनी हुई है।
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