अब सिर्फ शेयर करना नहीं चलेगा, सोशल मीडिया पर न्यूज डालने वालों के लिए सरकार ला रही सख्त नियम
News In Short
- अब सिर्फ मीडिया संस्थान ही नहीं, बल्कि आम लोग भी खबर शेयर करने पर जवाबदेह होंगे।
- सोशल मीडिया कंपनियों पर सख्ती बढ़ेगी, सरकार के निर्देशों का पालन करना प्लेटफॉर्म्स के लिए अनिवार्य किया जाएगा।
- कमेटी को मिलेगी सीधी कार्रवाई की ताकत, सरकारी कमेटी अब खुद से भी मामलों को उठाकर कार्रवाई कर सकेगी।
- फेक न्यूज पर लगेगा कड़ा नियंत्रण, गलत, भ्रामक और अपुष्ट खबरों को रोकने के लिए नियम बनाए जा रहे हैं।
- सरकार ने जनता से इस प्रस्ताव पर राय देने के लिए 14 अप्रैल तक का समय तय किया है।
क्या है पूरा मामला?
केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने IT नियम, 2021 में संशोधन का प्रस्ताव जारी किया है। सोमवार 30 मार्च, 2026 को जारी आधिकारिक नोटिस में यह स्पष्ट किया गया है कि, सरकार अब डिजिटल स्पेस में सूचना के प्रसार को लेकर अधिक सख्त और स्पष्ट व्यवस्था बनाना चाहती है।
अब तक ये नियम मुख्य रूप से डिजिटल न्यूज पोर्टल्स और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स तक सीमित थे, लेकिन तेजी से बढ़ते सोशल मीडिया के प्रभाव को देखते हुए सरकार ने आम यूजर्स को भी इसमें शामिल करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसका सीधा मतलब है कि अब सोशल मीडिया केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का प्लेटफॉर्म भी बनता जा रहा है।
अब आम यूजर्स पर भी लागू होंगे नियम
नए प्रस्ताव के तहत IT नियमों के Part III (आचार संहिता) का दायरा बढ़ाया जा रहा है। अब वे लोग भी इसके अंतर्गत आएंगे, जो पेशेवर न्यूज पब्लिशर नहीं हैं, लेकिन फेसबुक, व्हाट्सएप, एक्स या अन्य प्लेटफॉर्म्स पर समाचार या करंट अफेयर्स से जुड़ी सामग्री पोस्ट, शेयर या स्टोर करते हैं।
इसका मतलब यह है कि अगर कोई व्यक्ति बिना सत्यापन के कोई खबर वायरल करता है, तो उसे इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। यह बदलाव सोशल मीडिया पर फॉरवर्ड या शेयर करने की आदत को सीधे प्रभावित करेगा, जहां लोग अक्सर बिना जांचे जानकारी आगे बढ़ा देते हैं।
सोशल मीडिया कंपनियों के लिए क्या बदलेगा?
प्रस्ताव में IT नियमों के Part II में भी संशोधन किया गया है, जिसके तहत एक नया प्रावधान (Rule 3(4)) जोड़ा जा रहा है। इसके अनुसार, फेसबुक, व्हाट्सएप, एक्स (ट्विटर) और अन्य इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स को सरकार द्वारा जारी की जाने वाली एडवाइजरी, गाइडलाइंस और SOP का पालन करना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा।
यदि ये प्लेटफॉर्म्स सरकार के निर्देशों को नजरअंदाज करते हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि सरकार अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने के लिए और सख्त रुख अपनाने जा रही है।
कमेटी को मिलेगी ज्यादा ताकत
सरकार इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी (IDC) के अधिकारों को भी मजबूत करने जा रही है। पहले यह कमेटी मुख्य रूप से यूजर्स या संगठनों द्वारा की गई शिकायतों पर ही विचार करती थी, लेकिन अब इसे स्वतः संज्ञान लेने की शक्ति भी दी जा रही है।
यानी अगर सरकार को किसी कंटेंट या खबर पर संदेह होता है, तो यह कमेटी बिना शिकायत के भी उस पर जांच और कार्रवाई शुरू कर सकती है। इससे डिजिटल कंटेंट की निगरानी और नियंत्रण पहले की तुलना में अधिक तेज और प्रभावी हो सकता है।
सरकार का क्या है मकसद?
सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य किसी की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है। मंत्रालय के अनुसार, ये संशोधन स्पष्टीकरण और प्रक्रियात्मक सुधार की श्रेणी में आते हैं, जिनका मकसद कानूनी अस्पष्टताओं को दूर करना और फेक न्यूज जैसी समस्याओं पर नियंत्रण पाना है।
सरकार मानती है कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली अपुष्ट खबरें समाज में भ्रम और तनाव पैदा कर सकती हैं, इसलिए इन्हें नियंत्रित करना जरूरी है।
आप भी दे सकते हैं अपनी राय
सरकार ने इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाते हुए आम जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। कोई भी नागरिक 14 अप्रैल, 2026 तक अपनी राय ईमेल के माध्यम से भेज सकता है।
इसके लिएitrules.consultation@meity.gov.in ईमेल आईडी जारी की गई है। सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया है कि सुझाव देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी, ताकि लोग बिना किसी डर या दबाव के अपनी बात रख सकें।
क्या पड़ेगा असर?
यदि ये नियम लागू होते हैं, तो सोशल मीडिया पर खबरें शेयर करने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। अब यूजर्स को हर खबर को पोस्ट या फॉरवर्ड करने से पहले उसकी सत्यता जांचनी होगी, क्योंकि गलत जानकारी शेयर करने पर कानूनी कार्रवाई का खतरा बढ़ जाएगा।
एक तरफ यह कदम फेक न्यूज पर लगाम लगाने में मददगार साबित हो सकता है, वहीं दूसरी तरफ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन नियमों के जरिए अभिव्यक्ति की आजादी और नियंत्रण के बीच संतुलन कैसे बनाए रखती है।
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