बिना जुर्म किए काटनी है जेल? तो जेब में रखिए 500 रुपए और पहुंच जाइए यहां
News In Short
- भारत में जेल टूरिज्म का क्रेज बढ़ रहा है, जहां लोग पैसे देकर एक दिन के लिए कैदी बन सकते हैं।
- उत्तराखंड के हल्द्वानी जेल में मात्र 500 रुपए में रहने और खाने की सुविधा दी जा रही है।
- तेलंगाना की संगारेड्डी जेल Feel the Jail प्रोग्राम के तहत 24 घंटे का अनुभव प्रदान करती है।
- पर्यटकों को कैदियों वाली यूनिफॉर्म, स्टील के बर्तन और सादा भोजन दिया जाता है।
- इस पहल का उद्देश्य लोगों को जेल की सच्चाई दिखाना और कानून के प्रति जागरूक करना है।
News In Detail
क्या आपने कभी सोचा है कि बिना कोई अपराध किए आप जेल की सलाखों के पीछे एक रात गुजार सकते हैं? भारत में इन दिनों एक बहुत ही अनोखा ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे जेल टूरिज्म कहा जा रहा है।
अब आम लोग भी पैसे देकर एक दिन के लिए कैदियों जैसी जिंदगी का अनुभव ले सकते हैं। यह सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लग सकता है, लेकिन एडवेंचर के शौकीन लोगों के लिए यह एक यादगार अनुभव साबित हो रहा है।
हल्द्वानी में बनिए किराएदार कैदी
उत्तराखंड के हल्द्वानी जेल प्रशासन ने एक बेहद दिलचस्प पहल की है। उन्होंने जेल के एक पुराने हिस्से को खास तौर पर पर्यटकों के लिए तैयार किया है। यहां आप बाकायदा एक किराएदार कैदी बनकर रह सकते हैं। जेल की चार दीवारी के अंदर का जीवन कैसा होता है, यह जानने की जिज्ञासा रखने वालों के लिए हल्द्वानी जेल एक बड़ा केंद्र बन गई है।
मात्र 500 रुपए में जेल का अहसास
हल्द्वानी जेल में एक दिन का कैदी बनने के लिए आपको अपनी जेब से बहुत ज्यादा पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है। यहां सिर्फ 500 रुपए देकर आप एक दिन के लिए एंट्री पा सकते हैं। इस मामूली खर्च में आपको जेल के बैरक में रहने की जगह, कैदियों जैसा सादा खाना और जेल की अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। इतने कम दाम में ऐसा अनोखा अनुभव शायद ही कहीं और मिले।
संगारेड्डी जेल का फील द जेल प्रोग्राम
सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं, तेलंगाना की संगारेड्डी जेल भी अपने फील द जेल प्रोग्राम के लिए जानी जाती है। यहां आने वाले पर्यटकों को पूरे 24 घंटे जेल की रूटीन फॉलो करनी होती है। उन्हें बैरक में सोना पड़ता है और वही काम करने होते हैं जो एक असली कैदी करता है। दिल्ली की तिहाड़ जेल ने भी टूरिस्ट सेल के माध्यम से इस तरह का प्रयोग किया है, ताकि लोग जेल प्रशासन को करीब से देख सकें।
यूनिफॉर्म से लेकर बर्तन तक सब असली
इस जेल टूरिज्म के दौरान पर्यटकों को पूरी तरह कैदी की तरह महसूस कराया जाता है। उन्हें जेल की यूनिफॉर्म पहनाई जाती है, स्टील के बर्तनों में खाना दिया जाता है और सोने के लिए साधारण बिस्तर मिलता है। यहां तक कि आपको अपनी बैरक की सफाई भी खुद करनी पड़ सकती है। यह सब इसलिए किया जाता है ताकि अनुभव बिल्कुल असली लगे।
आखिर क्यों शुरू हुई यह पहल?
जेल प्रशासन का मकसद सिर्फ मनोरंजन करना नहीं है। इसके पीछे एक गहरा सामाजिक उद्देश्य भी है। जेल जीवन की कठिनाइयों को करीब से देखकर लोग कानून का महत्व समझते हैं और समाज में अपराध के प्रति जागरूकता बढ़ती है। यह अनुभव लोगों को यह अहसास कराता है कि आजादी कितनी कीमती है।
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